ग्रामोदय

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हिंसा किसी डॉक्टरी चूक का समाधान नहीं : डॉ चौहान

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रेडियो ग्रामोदय के कार्यक्रम जय हो में राष्ट्रीय चिकित्सक दिवस पर चिकित्सकों की समस्याओं पर चर्चा

करनाल। हर पेशे में कुछ खराब लोग हो सकते हैं। मेडिकल प्रोफेशन इससे अछूता नहीं है। कोई भी डॉक्टर अपने मरीज का नुकसान नहीं चाहता। मानवीय चूक उनसे भी संभव है, लेकिन हिंसा किसी डॉक्टरी चूक का समाधान नहीं है। डॉक्टर अपने मरीज को ठीक कर ही देगा, चिकित्सकों से ऐसे चमत्कार की उम्मीद नहीं करनी चाहिए। यह विचार हरियाणा ग्रंथ अकादमी के उपाध्यक्ष एवं भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता डॉ. वीरेंद्र सिंह चौहान ने रेडियो ग्रामोदय पर ‘जय हो’ कार्यक्रम में प्रसिद्ध बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. संदीप अब्रोल, वरिष्ठ नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. राजेंद्र चौहान और करनाल स्थित कल्पना चावला मेडिकल कॉलेज के वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. राजेश गर्ग के साथ चर्चा के दौरान व्यक्त किए। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि नियति मनुष्य को जिस रास्ते पर लेकर आ जाती है, वह अन्य रास्ते कभी बंद नहीं करती। डॉ. बिधान चंद्र रॉय भारतीय उपमहाद्वीप के एक ख्याति प्राप्त दुर्लभ चिकित्सक होने के साथ-साथ एक शानदार राजनेता भी थे। वह 14 वर्षों तक बंगाल के मुख्यमंत्री के पद पर रहे।

डॉ चौहान ने बताया कि डॉ. बी सी राय की जन्म एवं पुण्यतिथि दोनों 1 जुलाई ही है। बिहार में जन्मे डॉ. बी सी राय दो बार पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री बने। उन्हें कोलकाता का मेयर बनने का भी अवसर प्राप्त हुआ था। डॉ. रॉय एशियाई महाद्वीप के पहले मेडिकल कंसलटेंट थे।

डॉ.चौहान ने डॉ. संदीप अबरोल और डॉ. राजेश गर्ग से पूछा कि करोना काल में चिकित्सकों को किन- किन परेशानियों का सामना करना पड़ा? इस पर दोनों चिकित्सकों ने बताया कि कोरोना काल में उन्हें काफी कठिन चुनौतियों का सामना करना पड़ा। डॉ. अबरोल ने बताया कि 22 साल के करियर में इतना कठिन समय कभी देखने को नहीं मिला था। शुरू में अस्पताल में ऑक्सीजन की बहुत कमी थी, लेकिन 1 हफ्ते के अंदर ऑक्सीजन की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित कर दी गई।

आज चिकित्सक बनना कितना सरल है? डॉ चौहान के इस सवाल पर डॉ राजेश गर्ग ने कहा कि एक डॉक्टर की डिग्री लेना आज अत्यंत कठिन कार्य हो गया है। सरकारी और प्राइवेट संस्थानों में मेडिकल की पढ़ाई के खर्च में आसमान जमीन का अंतर है। सरकारी मेडिकल कॉलेजों में जहां इसकी पढ़ाई में प्रतिवर्ष 40 से ₹50000 खर्च करने पड़ते हैं, वही प्राइवेट मेडिकल कॉलेजों में इसकी पढ़ाई का खर्च प्रतिवर्ष 13 से 15 लाख रुपये तक है। पूरे एमबीबीएस कोर्स की पढ़ाई का खर्च 70 से 80 लाख रुपये के बीच बैठता है। यह आम लोगों की पहुंच से बाहर है। उन्होंने कहा कि यूपीएससी की तर्ज पर इंडियन मेडिकल सर्विसेज बनाने की मांग वर्ष 1966-67 से ही हो रही है।

डॉ. संदीप अबरोल ने कहा कि डॉक्टरी के पेशे में वह स्वेच्छा से आए। मरीजों को स्वस्थ होते देखकर लगता है कि उनकी मेहनत सफल हुई। यह उन्हें बहुत खुशी प्रदान करता है। उन्होंने कहा कि उनका डॉक्टरी का सफर काफी कठिन रहा और कई बार असफलताएं भी हाथ लगी।

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तालाबों, जोहड़ों का हो संरक्षण, अतिक्रमण खाली कराएं : डॉ. चौहान

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रेडियो ग्रामोदय के कार्यक्रम ‘म्हारे गाम की बात’ में गांव अरडाना पर चर्चा

असंध। हरियाणा सरकार गावों के सर्वांगीण विकास के लिए कृतसंकल्प है। तालाब – जोहड से लेकर गांव के स्कूलों तक — हर क्षेत्र में स्थिति को बेहतर बनाने के लिए सरकार की ओर से कई योजनाएं शुरू की गई हैं। तालाबों, जलाशयों को बचाने और उनके संरक्षण के लिए सरकार पहले ही तालाब प्राधिकरण का गठन कर चुकी है। इसके अलावा सरकार स्कूलों के अपग्रेडेशन पर भी ध्यान दे रही है। अपग्रेडेशन के लिए निर्धारित न्यूनतम मानकों को पूरा करने वाले स्कूलों को अपग्रेड कर उन्हें प्लस-टू तक किया जा रहा है।

यह जानकारी हरियाणा ग्रंथ अकादमी के उपाध्यक्ष एवं निदेशक डॉ. वीरेंद्र सिंह चौहान ने रेडियो ग्रामोदय के कार्यक्रम ‘म्हारे गाम की बात’ में गांव अरडाना पर चर्चा के दौरान दी। उन्होंने कहा कि पानी की व्यवस्था करना सरकार की पहली प्राथमिकता है। इसके लिए ‘मेरा पानी मेरी विरासत’ योजना शुरू की गई है। सुप्रीम कोर्ट का स्पष्ट निर्देश है कि जलाशयों की जमीन पर कब्जा नहीं किया जा सकता। तालाबों से अतिक्रमण हटाना ही होगा। तालाब बचेंगे, तभी गांव बचेगा। डॉ. चौहान ने कहा कि जो तालाब और जोहड गंदगी के स्रोत हैं। जिनमें गाद और कचरा भरा पड़ा है। उन्हें साफ कराना होगा।

चर्चा में जुड़े गांव अरडाना के सामाजिक कार्यकर्ता सुरेंद्र राणा ने बताया कि गांव में पानी की समस्या पहले अत्यंत गंभीर थी। इस समस्या को लेकर वह विभाग के एक्सईएन और एसपी से भी मिले थे। इसके बाद पेयजल की समस्या तो दूर हुई, लेकिन सिंचाई की समस्या अब भी बाकी है। गांव का परिचय देते हुए सुरेंद्र ने बताया कि गांव में करीब 5200 वोट हैं। इनमें करीब 1400 ब्राह्मण और 1200 राजपूत जाति के लोग भी शामिल हैं। गांव की कुल आबादी अब नौ हजार के करीब अनुमानित है। 2011 की जनगणना के अनुसार गांव की आबादी सात हजार के करीब थी। खूबी साबा, बल्लो पट्टी और मुसलमान पट्टी नाम से गांव में तीन पट्टियां हैं। इस गांव में अब मात्र एक मुस्लिम घर बचा है।

जमीन के मामले में गांव में सबसे संपन्न व्यक्ति कौन है? डॉ. चौहान के इस सवाल पर सुरेंद्र राणा ने बताया कि सुरेंद्र राजपूत के पास गांव में सबसे ज्यादा 120 किले जमीन है। सरकारी नौकरियों के मामले में गांव की स्थिति का जायजा लेते हुए डॉ. चौहान ने पूछा कि गांव में आज तक सबसे ऊंचा पद हासिल करने में कितने लोग कामयाब रहे? इस पर गांव में अटल सेवा केंद्र संचालित करने वाले शुभम राणा ने बताया कि आज की तारीख में गांव में सबसे ऊंची नौकरी हासिल करने का श्रेय चंद्रिका अत्री को है। वह आईएएस के पद पर कार्यरत है। उससे पहले ओ. पी. राणा को तहसीलदार बनने का अवसर प्राप्त हुआ था जो 5 साल पहले सेवानिवृत्त हो चुके हैं।

डॉ. चौहान ने पूछा कि गांव अरडाना में गौशालाओं का क्या हाल है? इस पर सुरेंद्र राणा ने बताया कि गांव में एक बड़ी गौशाला है जिसमें करीब 350 गोवंश हैं। इस गौशाला का संचालन नरेंद्र राणा और जगतराम मिलकर कर रहे हैं। उनके अलावा इस गौशाला के रखरखाव में गांव के अन्य लोगों का भी पूरा सहयोग मिल रहा है।

इस अवसर पर डॉ. चौहान ने बताया कि प्रदेश की मनोहर लाल सरकार गौशालाओं के रखरखाव के लिए अनुदान के तौर पर हर साल एक न्यूनतम राशि देती है। इसके अलावा सरकार प्रदेश के हर गांव में एक पुस्तकालय खोलने का भी प्रयास कर रही है। कांचवा में बिजली वितरण निगम की ओर से एक पुस्तकालय भवन का निर्माण कराया गया है। गांव गोंदर में भी एक पुस्तकालय बनने जा रहा है। पुस्तकालयों की सार्थकता तभी है जब गांव के लोग उससे जुड़ पाएं। उन्होंने कहा कि गांव में पुस्तकालय खोलने के लिए 21 लोगों की एक कमेटी बनाई जाए और चंदे की एक न्यूनतम राशि भी तय होनी चाहिए। विकास के इस कार्य में हरियाणा ग्रंथ अकादमी भी अपने योगदान के तौर पर 400 पुस्तकें मुफ्त देगी।

शुभम राणा ने बताया कि गांव में जलाशयों के तौर पर 5 तालाब और दो-तीन जोहड मौजूद हैं, लेकिन गांव में असंध से जाने वाली सड़क की हालत खराब है। उस पर दो-दो फीट के गड्ढे बने हुए हैं। सुरेंद्र राणा ने गांव के स्कूल को अपग्रेड करने का मुद्दा उठाते हुए कहा कि करीब 300 बच्चों वाले गांव के स्कूल को अपग्रेड करने और गांव में एक आईटीआई खोलने की भी जरूरत है। उन्होंने कहा कि गांव की पंचायत के पास 30 एकड़ जमीन होने के बावजूद गांव में कोई व्यायामशाला नहीं बन पाई है। इस पर डॉ. चौहान ने बताया कि हरियाणा के एक विधानसभा क्षेत्र में कम से कम दस व्यायामशालाओं के निर्माण का प्रावधान किया गया है। प्रदेश के ग्रामीण अंचल में पहले चरण के दौरान करीब 1000 व्यायामशालाओं का निर्माण होना है। इनमें से करीब 500 व्यायामशालाओं का निर्माण पूरा हो चुका है।

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प्रकृति से लेना ही नहीं देना भी सीखें : डॉ. चौहान

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सेवा ही संगठन कार्यक्रम के तहत पौधारोपण

बल्ला । प्रकृति का संरक्षण और संतुलित उपयोग का रास्ता ही मानव को अपनाना होगा । दोहन और उपभोग का रास्ता अंततः विभिन्न आपदाओं और महामारियों को ही आमंत्रित करता है । प्रकृति हमें निरंतर कुछ न कुछ प्रदान करती रहती है । वृक्षारोपण के माध्यम से हम भी प्राकृतिक संतुलन में अपना योगदान दें । हरियाणा ग्रन्थ अकादमी के उपाध्यक्ष और भाजपा प्रदेश प्रवक्ता डॉ. वीरेंद्र सिंह चौहान ने पार्टी के सेवा ही संगठन कार्यक्रम के तहत बल्ला मंड़ल के गाँव सालवन के काली माता मंदिर में पौधा रोपण करते हुए यह टिप्पणी की।

पार्टी के विभिन्न पदाधिकारियों के साथ मिलकर उन्होंने आह्वान किया कि प्रत्येक व्यक्ति को पौधारोपण के पुण्य कार्य में संलिप्त होना चाहिए । उन्होंने बताया कि पर्यावरण को शुद्ध रखने और हरियाली में वृद्धि के लिए भारतीय जनता पार्टी के प्रत्येक कार्यकर्ता को कम से कम एक पौधा अपने नाम से लगाने और उसका समुचित ढंग से पालन करने के लिए पार्टी नेतृत्व ने निर्देश दिया है।

इस अवसर पर पार्टी के विभिन्न पदाधिकारियों ने डॉ. वीरेंद्र सिंह चौहान को प्रदेश प्रवक्ता मनोनीत किये जाने पर माननीय मुख्यमंत्री मनोहर लाल और भाजपा प्रदेशाध्यक्ष ओ. पी. धनखड़ का आभार व्यक्त किया ।

इस अवसर पर मंडल अध्यक्ष संदीप सैनी गोल्ली, मंड़ल महामंत्री अमित राणा सालवन, किसान मोर्चा मंड़ल अध्यक्ष जय कुंवर राणा सालवन, बैकवर्ड मोर्चा अध्यक्ष जयभगवान जांगड़ा,मंड़ल सचिव जयमल पहलवान,शक्ति केंद्र प्रमुख नाथी राम, समाज सेवी जयबीर फ़ौजी सालवन , समाज सेवी गौरव राणा,समाज सेवी मास्टर जसबीर राणा, मंदिर महंत पवन व अन्य ग्रामीण मौजूद रहे।

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एक यूनिट रक्तदान से होती है तीन मरीज़ों की मदद : डॉ. बेनीवाल

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करनाल। रक्तदान लोगों की जान बचाने का अंतिम विकल्प होता है। यह 100 फ़ीसदी सुरक्षित भी नहीं है। रोगी को रक्त चढ़ाने के बाद अलग-अलग अंतराल पर कुछ जटिलताएं पेश आ सकती हैं। इसे रक्तदान के साइड इफेक्ट्स कह सकते हैं। इसके बावजूद अनेक मामलों में रक्तदान ही लोगों की जान बचाने में अहम भूमिका निभाता है। इसलिए रक्तदान को महादान कहा जाता है।
हरियाणा ग्रंथ अकादमी के उपाध्यक्ष डॉ. वीरेंद्र सिंह चौहान ने रक्तदान पर आईएमए हरियाणा के संरक्षक एवं पूर्व अध्यक्ष डॉ. वेद बेनीवाल, सिरसा स्थित शिव शक्ति ब्लड बैंक के संचालक एवं प्रबंधक आर.एम. अरोडा एवं नीलोखेड़ी के रक्तदान एक्टिविस्ट योगी गाबा से रक्तदान के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा में यह टिप्पणी की। डॉ चौहान ने कहा कि विश्व रक्तदाता दिवस पर हम सब मिलकर यह संकल्प लें कि रक्त उपलब्ध न होने के कारण किसी की जान न जाए।
डॉ. आर.एम अरोडा ने कहा कि एक यूनिट रक्तदान से हम 3 रोगियों की जान बचा सकते हैं। उन्होंने बताया कि रक्त के तीन अवयव होते हैं – लाल रक्त कण, प्लेटलेट्स और प्लाज्मा। यह तीनों कंपोनेंट तीन अलग-अलग रोगियों की जान बचाने के काम आते हैं।


डॉ वेद बेनीवाल ने बताया कि रक्तदान दिवस ब्लड ग्रुप की खोज करने वाले व्यक्ति कार लैंड्स के जन्मदिन के अवसर पर 14 जून को मनाया जाता है। इस दिन रक्तदाताओं को सम्मानित कर हम उनका आभार प्रकट करते हैं। भारत में वर्ष 1942 ने कोलकाता में पहले ब्लड बैंक की स्थापना की गई थी। महिलाओं और खासकर गर्भवती महिलाओं को रक्त की जरूरत सबसे ज्यादा होती है। प्रसव के दौरान रक्त की बहुत ज्यादा कमी हो जाने पर उन्हें रक्त चढ़ाना पड़ता है। लड़का और लड़की के बीच अंतर करने की हमारी सामाजिक रूढ़ियों के कारण भी लड़कियों में खून की कमी अक्सर पाई जाती है। थैलेसीमिया के मरीजों के लिए तो खून चढ़ाना अत्यंत आवश्यक है क्योंकि इस बीमारी से ग्रस्त लोगों के शरीर में रक्त निर्माण कि अपनी प्रक्रिया बाधित हो जाती है। उन्होंने बताया कि 100 यूनिट रक्त में दो तिहाई हिस्सा महिलाओं को ही जाता है। महिलाओं एवं बच्चियों में रक्त की कमी हमारी सामाजिक सोच को प्रतिबिंबित करती है।

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अपनी आँखों का रखे ध्यान, नेत्रदान भी है महादान

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रेडियो ग्रामोदय के वेकअप करनाल कार्यक्रम में कॉर्नियल ब्लाइंडनेस पर चर्चा

करनाल। आंखों की देखभाल जरूरी है।साफ और ठंडे पानी से आंखों को नियमित रूप से धोएं और बिना जरूरत कोई दवा न लें। उचित समय पर चश्मा लगाएं और 60 वर्ष की उम्र हो जाने पर मोतियाबिंद की जांच नियमित रूप से कराते रहें..कंप्यूटर या मोबाइल स्क्रीन पर लंबे समय तक निगाह गड़ाए रखना नुकसानदेह हो सकता है। इसलिए हर 15-20 मिनट के बाद 10-15 सेकंड का विश्राम अवश्य लें। बचाव के ये उपाय आपको काफी हद तक नेत्र रोगों एवं नेत्रहीनता से बचा सकते हैं।

वेक अप करनाल

उपरोक्त विचार रेडियो ग्रामोदय के वेकअप करनाल कार्यक्रम में हरियाणा ग्रंथ अकादमी के उपाध्यक्ष एवं निदेशक डॉ. वीरेंद्र सिंह चौहान व करनाल के प्रसिद्ध नेत्र रोग विशेषज्ञ एवं माधव नेत्र बैंक के मेडिकल डायरेक्टर डॉ. भरत ठाकुर के बीच हुई बातचीत में उभर कर सामने आए। कार्यक्रम में नेत्रदान के महत्व और प्रक्रिया को लेकर विस्तार से से बातचीत हुई।

डॉ. भरत ठाकुर ने बताया कि देश में दृष्टिबाधित लोगों में कॉर्नियल ब्लाइंडनेस के शिकार लोगों का अनुपात लगभग 1% है जिनकी संख्या 80 लाख के करीब है। इसके मुकाबले दोनों आंखों से दृष्टिबाधित लोगों की संख्या मात्र दो लाख है। कॉर्नियल ब्लाइंडनेस को सिर्फ कॉर्निया के प्रत्यारोपण से ही दूर किया जा सकता है जो नेत्रदान से ही संभव है। आंखों के अगले हिस्से में स्थित काली पुतली को ही कॉर्निया कहते हैं। इसे नेत्रदान करने वाले व्यक्ति की मृत्यु के बाद उसकी आंखों से निकाला जाता है। उन्होंने बताया कि कॉर्निया प्याज के छिलके जितना मोटा होता है और इसका आकार 10 मिलीमीटर का होता है।

आंखों के अगले हस्से में स्थित काली पुतली को ही कॉर्निया कहते हैं। इसे नेत्रदान करने वाले व्यक्ति की मृत्यु के बाद उसकी आंखों से निकाला जाता है। उन्होंने बताया कि कॉर्निया प्याज के छिलके जितना मोटा होता है और इसका आकार 10 मिलीमीटर का होता है।

नेत्रदान के लिए पात्र व्यक्ति कौन है और एक मृत व्यक्ति के अंगों से कितने लोगों को नई जिंदगी मिल सकती है? डॉ. बीरेंद्र सिंह चौहान के इस सवाल पर डॉ. ठाकुर ने बताया कि एक मृत व्यक्ति के शरीर से कुल 11 लोगों को नई जिंदगी मिल सकती है जिनमें दो लोगों को कॉर्निया का प्रत्यारोपण भी शामिल है। कॉर्निया को 6 घंटे के भीतर दान पाने वाले व्यक्ति की आंखों में प्रत्यारोपित करना होता है। इसे गंतव्य तक सड़क या वायु मार्ग से पहुंचाने के लिए कई बार ग्रीन कॉरिडोर भी बनाना पड़ता है। उन्होंने बताया कि नेत्रदान के लिए आयु की कोई सीमा निर्धारित नहीं है। 100 साल के व्यक्ति की आंखें भी अगर मृत्यु के समय ठीक हो, तो उसके कॉर्निया का प्रत्यारोपण के लिए इस्तेमाल हो सकता है।

डॉ. भरत ठाकुर ने बताया बचपन में खेलते समय आंखों में लगी चोट का यदि समय पर उपचार न हो तो आगे चलकर कॉर्निया खराब होने का खतरा बना रहता है। इसके अलावा विटामिन-]ए की कमी से भी कॉर्निया खराब होता है। कॉर्निया कैमरे के लेंस की तरह होता है जो आंखों के सामने आने वाली आकृति को फोकस करता है। उन्होंने बताया कि भारत में कॉर्निया प्रत्यारोपण 45 वर्ष पहले आई बैंक एसोसिएशन ऑफ इंडिया एवं भारत सरकार के सहयोग से शुरू किया गया था।

 

कार्निया प्रत्यारोण में करनाल देश में सातवें स्थान परडॉ. भरत ठाकुर ने बताया कि कॉर्निया प्रत्यारोपण के मामले में करनाल जिले का स्थान देश में सातवां है।यहां एक साल के भीतर करीब एक हजार नेत्रदान दर्ज किए जाते हैं। इसमें माधव नेत्र बैंक समेत अन्य संगठनों की भूमिका अहम है। इस नेत्र बैंक की स्थापना राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वर्तमान सह सरकार्यवाह अरुण कुमार की प्रेरणा से की गई थी। नेत्र बैंकों का काम दानदाताओं से नेत्र लेकर उन्हें संरक्षित करना और जरूरतमंदों को उपलब्ध कराना है। उन्होंने बताया कि वैसे तो देश भर में 1100 नेत्र बैंक पंजीकृत हैं, लेकिन उनमें से सिर्फ 200 एक्टिव हैं। उनमें भी मात्र 80 नेत्र बैंक ऐसे हैं जो 50 से अधिक नेत्रदान करवा सकते हैं। देशभर में एक साल के भीतर करीब 20,000 लोगों को कॉर्निया का प्रत्यारोपण संभव हो पाता है। इस बीच समाजसेवी कपिल अतरेज़ा ने बताया कि नेत्रदान का संकल्प पत्र ऑनलाइन भी भरा जा सकता है।

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हरियाणा के 5500 गांवों में अब 24 घंटे बिजली आपूर्ति : डॉ. चौहान

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रेडियो ग्रामोदय के कार्यक्रम ‘म्हारे गाम की बात’ में गांव जलमाना पर चर्चा

करनाल। हरियाणा के करीब 5500 गांव ऐसे हैं जहां चौबीसों घंटे बिजली की अबाध आपूर्ति हो रही है। प्रदेश सरकार की ‘म्हारा गांव, जगमग गांव’ योजना के तहत 24 घंटे बिजली आपूर्ति करने पर वर्ष 2015 से ही काम जारी है। यह जानकारी हरियाणा ग्रंथ अकादमी के उपाध्यक्ष एवं निदेशक डॉ. वीरेंद्र सिंह चौहान ने रेडियो ग्रामोदय के कार्यक्रम ‘म्हारे गाम की बात’ में गांव जलमाना पर चर्चा के दौरान दी।जलमाना गांव पर चर्चा में डॉ. चौहान के अलावा कार्यक्रम संचालक प्रवीण धनखड़, वरिष्ठ भाजपा नेता सुरेश गोयल और अटल सेवा केंद्र संचालक रवि गुप्ता भी शामिल थे। डॉ. चौहान ने इस अवसर पर गांवों में नलों से बेकार बहने वाले पानी पर चिंता जताते हुए कहा कि पानी की बर्बादी नहीं होनी चाहिए। इस समस्या की तरफ रवि गुप्ता ने ध्यान दिलाते हुए कहा था कि गांव जलमाना में कई जगह नलों से पानी बेकार बहता रहता है।

डॉ. चौहान ने रवि गुप्ता से अनुरोध किया कि वह स्वयं इस दिशा में पहल करते हुए ऐसे जल स्रोतों को चिन्हित करें जहां नलों से पानी बेकार बहता रहता है ताकि पानी की बर्बादी रोकने के लिए कोई योजना बनाई जा सके।

भाजपा कार्यकर्ता सुरेश गोयल ने जलमाना गांव का परिचय एवं पृष्ठभूमि बताते हुए कहा कि यह एक सिख बहुल गाँव है जहां 36 बिरादरियों के लोग रहते हैं। यह गांव ऐतिहासिक और धार्मिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है। मान्यताओं के अनुसार यहां महर्षि परशुराम के पिता बाबा जमदग्नि ने तपस्या की थी। इसलिए इस गांव का नाम जमदग्नि के नाम पर पड़ा और बदलते – बदलते जलमाना हुआ।गोयल ने बताया कि जलमाना गांव का इतिहास महाभारत काल से जुड़ा हुआ है। यह गांव अपनी न्यायप्रियता के लिए जाना जाता है। जलमाना तीर्थ में एक बहुत बड़ा मंदिर है जिसके अंदर काफी बड़े क्षेत्र में फैला हुआ एक तालाब है। मान्यता है कि इस तालाब के बीचो-बीच वाले स्थान पर ऋषि जमदग्नि ने तपस्या की थी। यहां दूज के दिन एक बहुत बड़ा मेला लगता है जिसमें भाग लेने के लिए लोग दूर-दूर से यहां पहुंचते हैं।

गांव की विशेषता बताते हुए अटल सेवा केंद्र संचालक रवि गुप्ता ने कहा कि गांव जलमाना में मंदिर, मस्जिद और गुरुद्वारा तीनों ही स्थित हैं। गांव में आपसी भाईचारे का आलम यह है कि यहां सभी त्योहार सभी बिरादरियों के लोग मिलजुल कर मनाते हैं। उन्होंने बताया कि प्रदेश के लगभग सभी मुख्यमंत्री इस गांव का दौरा कर चुके हैं। मौजूदा मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने भी इस गांव का दौरा किया था।

प्रवीण धनखड़ के सवाल पर रवि गुप्ता ने बताया कि गांव में पशुओं और मनुष्य के लिए एक-एक सरकारी अस्पताल है जो अच्छी अवस्था में है। उन्होंने गांव के अस्पताल की चारदीवारी के निर्माण का मुद्दा उठाया। रवि ने कहा कि गांव में पक्की सड़कों का भी निर्माण हो चुका है और बिजली आपूर्ति की व्यवस्था भी संतोषजनक है।

गांव जलमाना में कितने जौहड़ हैं और उन पर अतिक्रमण की क्या स्थिति है? डॉ. चौहान के इस सवाल पर रवि गुप्ता ने बताया कि जलमाना में चार जोहड़ हैं जिनका क्षेत्रफल काफी बड़ा है। सुरेश गोयल ने अतिक्रमण का मुद्दा उठाते हुए कहा कि जौहड़ो पर नए अतिक्रमण तो नहीं हो रहे लेकिन पहले के कुछ अतिक्रमण को अब भी हटाया नहीं जा सका है।

म्हारे गाम की बात में जल्माना के साथियों के साथ बातचीत

इस पर डॉ. चौहान ने कहा कि मनुष्यों के अस्तित्व के लिए जलाशयों का अस्तित्व बचाना जरूरी है। गांव-शहरों के जलाशय किसी की निजी संपत्ति नहीं, बल्कि प्राकृतिक संपदा है। हरियाणा सरकार ने इसी को ध्यान में रखते हुए एक तालाब प्राधिकरण गठित किया है जो ग्रामीण अंचल के जोहडों के सौंदर्यीकरण का काम देखता है।

उन्होंने पूछा कि जलमाना पंचायत की अपने स्रोतों से कितनी आय होती है? इस पर सुरेश गोयल ने जानकारी दी कि जलमाना पंचायत के पास 24 एकड भूमि है जो उसकी आय का मुख्य स्रोत है। चर्चा के दौरान गांव में युवाओं को प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए प्रशिक्षण देने के उद्देश्य से निशुल्क कोचिंग शुरू करने की भी योजना तैयार की गई। रेडियो ग्रामोदय ने इस दिशा में आगे बढ़कर पूरा सहयोग एवं पहल करने का संकल्प लिया।

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कोरोना के खिलाफ़ संग्राम में आशा वर्कर्स की भूमिका अहम

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आशा वर्कर्स की भूमिका पर चर्चा

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आयुर्वेद प्राचीन एवं वैज्ञानिक पद्धति : डॉ. जयदीप

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रेडियो ग्रामोदय के कार्यक्रम ‘जय हो’ में कहा, जून में इस योग शिक्षकों की नियुक्ति तय

करनाल। कोरोना से लड़ने में आयुर्वेदिक दवाओं और योग की उपयोगिता को आज सभी मान रहे हैं। आयुर्वेद की महत्ता विश्व स्तर पर प्रमाणित हो चुकी है। आयुर्वेद बनाम एलोपैथी का विवाद निरर्थक है। यह किसी आयुर्वेद विरोधी रणनीति का हिस्सा हो सकता है।

चिकित्सा विज्ञान में एलोपैथी के योगदान को नकारा नहीं जा सकता। एलोपैथी से विरोध नहीं, उसका भी पूरा सम्मान है, लेकिन चिकित्सा के नाम पर कोई धर्मांतरण का एजेंडा चलाए, भारतीय संस्कृति पर हमला हो, तो उसका मुखर विरोध होना ही चाहिए।यह बिंदु रेडियो ग्रामोदय के कार्यक्रम ‘जय हो’ में हरियाणा योग आयोग के अध्यक्ष डॉ. जयदीप आर्य व हरियाणा ग्रंथ अकादमी उपाध्यक्ष डॉ. वीरेंद्र सिंह चौहान की बातचीत के दौरान उभरकर सामने आए।

योग आयोग के कार्यों पर प्रकाश डालते हुए डॉ. जयदीप आर्य ने इस अवसर पर बताया कि स्कूली पाठ्यक्रमों में भी योग को शामिल करने के लिए एससीईआरटी के साथ मिलकर हरियाणा योग आयोग ने एक सिलेबस तैयार किया है जिसे इसी सत्र से लागू कर दिया जाएगा। हरियाणा देश का एक मात्र ऐसा राज्य है जहां गणतंत्र दिवस एवं स्वतंत्रता दिवस समारोहों में योग को शामिल किया गया है। इन समारोहों में सूर्य नमस्कार समेत योग की अन्य प्रस्तुतियां निर्धारित कर दी गई हैं।

'जय हो' में योग पर वार्ता डॉ. जयदीप आर्य जी के साथ

हरियाणा योग आयोग के अध्यक्ष डॉ. जयदीप आर्य के साथ वार्ता

डॉ. वीरेंद्र सिंह चौहान ने पूछा कि हाल में उत्पन्न हुए आयुर्वेद बनाम एलोपैथ के विवाद को वह किस प्रकार देखते हैं? इस पर डॉ. जयदीप ने कहा कि स्वामी रामदेव के जिस बयान पर विवाद पैदा हुआ, वह उनका अपना बयान नहीं था। उन्होंने व्हाट्सएप पर आए एक संदेश को पढ़कर सुनाया था। कभी भारतीय चिकित्सा विज्ञान काफी उन्नत अवस्था में था, लेकिन स्वाधीनता के बाद इस दिशा में ज्यादा काम नहीं हो पाया। इसमें कोई संदेह नहीं कि देर-सबेर आधुनिक चिकित्सा पद्धति को भारतीय संस्कृति और इसके चिकित्सा विज्ञान की शरण में आना ही होगा।

योग शिक्षकों की नियुक्ति प्रक्रिया प्रारंभ

हरियाणा ग्रंथ अकादमी उपाध्यक्ष डॉ. वीरेंद्र सिंह चौहान के साथ चर्चा में हरियाणा योग आयोग के अध्यक्ष डॉ. जयदीप आर्य ने बताया कि मुख्यमंत्री मनोहरलाल खट्टर और स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज की अगवाई में हरियाणा सरकार भारत की पारंपरिक चिकित्सा पद्धति को गौरवपूर्ण स्थान दिलाने के लिए विभिन्न परियोजनाओं पर काम कर रही है। इसके तहत प्रदेश के गावों में एक हजार योगशालाओं के निर्माण का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।इसके लिए 1500 करोड़ रुपए आवंटित कर दिए गए हैं। अब तक 528 व्यायामशालाओं का निर्माण पूरा हो चुका है और इनमें योग शिक्षकों की नियुक्ति की प्रक्रिया भी जून के पहले हफ्ते तक पूरी कर ली जाएगी।

उन्होंने कहा कि जिला स्तरीय चयन समितियों को जल्द से जल्द ही यह कार्य पूरा करने के लिए कहा गया है। इस प्रक्रिया में पुराने योग शिक्षकों को वरीयता देने के लिए 5% का कोटा निर्धारित किया गया है। डॉक्टर जयदीप के अनुसार अंततः एक हज़ार योग शिक्षकों की नियुक्ति होनी है नहीं और पूर्व में कार्य कर चुके अधिकांश योग शिक्षक नई व्यवस्था में नई प्रक्रिया के अनुसार समाहित हो सकेंगे.योग शिक्षकों की नियुक्ति के लिए क्या-क्या योग्यताएं निर्धारित की गई हैं? डॉ. चौहान के इस सवाल पर डॉ. जयदीप ने बताया कि योग शिक्षकों की अर्हता के तौर पर योग में डिप्लोमा एवं लेवल-वन का सर्टिफिकेट होना आवश्यक है जो किसी मान्यता प्राप्त संस्था या आर्ट ऑफ लिविंग, पतंजलि योगपीठ आदि से प्रमाणित हो।

भेंटवार्ता की ऑडियो यहाँ सुना जा सकता है….

कोरोना संक्रमण से बचाव कैसे करें

आयुर्वेद विशेषज्ञ डॉ. जयदीप आर्य ने बताया कि कोरोना संक्रमण से बचने का सबसे अच्छा तरीका यही है कि इसके वायरस को फेफड़ों तक नहीं पहुँचने दिया जाए और संक्रमण के पहले दो तीन दिन में नाक और गले में ही मार दिया जाए। इसमें आयुर्वेद एवं योग अत्यंत प्रभावकारी भूमिका निभा सकता है। नाक में सरसों का तेल या गाय के घी को गुनगुना कर डालें, भाप लें, गरारा करें और अनुलोम-विलोम, कपालभाति, भ्रामरी एवं उज्जयी प्राणायाम का अभ्यास नियमित रूप से करें तो कोरोना संक्रमण से बचा जा सकता है।

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व्यायामशालाओं को जल्द मिलेंगे योग शिक्षक : डॉ. जयदीप

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' जय हो ' में आज वार्ता डॉ. जयदीप आर्य जी के साथ

आयुर्वेद प्राचीन एवं वैज्ञानिक पद्धति, एलोपैथी का अपना महत्व है : डॉ. जयदीप
रेडियो ग्रामोदय के कार्यक्रम ‘जय हो’ में कहा, जून में इस योग शिक्षकों की नियुक्ति तय

पंचकूला / करनाल। कोरोना से लड़ने में आयुर्वेदिक दवाओं और योग की उपयोगिता को आज सभी मान रहे हैं। आयुर्वेद की महत्ता विश्व स्तर पर प्रमाणित हो चुकी है। आयुर्वेद बनाम एलोपैथी का विवाद निरर्थक है। यह किसी आयुर्वेद विरोधी रणनीति का हिस्सा हो सकता है। चिकित्सा विज्ञान में एलोपैथी के योगदान को नकारा नहीं जा सकता। एलोपैथी से विरोध नहीं, उसका भी पूरा सम्मान है, लेकिन चिकित्सा के नाम पर कोई धर्मांतरण का एजेंडा चलाए, भारतीय संस्कृति पर हमला हो, तो उसका मुखर विरोध होना ही चाहिए।यह बिंदु रेडियो ग्रामोदय के कार्यक्रम ‘जय हो’ में हरियाणा योग आयोग के अध्यक्ष डॉ. जयदीप आर्य व हरियाणा ग्रंथ अकादमी उपाध्यक्ष डॉ. वीरेंद्र सिंह चौहान की बातचीत के दौरान उभरकर सामने आए।

योग आयोग के कार्यों पर प्रकाश डालते हुए डॉ. जयदीप आर्य ने इस अवसर पर बताया कि स्कूली पाठ्यक्रमों में भी योग को शामिल करने के लिए एससीईआरटी के साथ मिलकर हरियाणा योग आयोग ने एक सिलेबस तैयार किया है जिसे इसी सत्र से लागू कर दिया जाएगा। हरियाणा देश का एक मात्र ऐसा राज्य है जहां गणतंत्र दिवस एवं स्वतंत्रता दिवस समारोहों में योग को शामिल किया गया है। इन समारोहों में सूर्य नमस्कार समेत योग की अन्य प्रस्तुतियां निर्धारित कर दी गई हैं।

डॉ. वीरेंद्र सिंह चौहान ने पूछा कि हाल में उत्पन्न हुए आयुर्वेद बनाम एलोपैथ के विवाद को वह किस प्रकार देखते हैं? इस पर डॉ. जयदीप ने कहा कि स्वामी रामदेव के जिस बयान पर विवाद पैदा हुआ, वह उनका अपना बयान नहीं था। उन्होंने व्हाट्सएप पर आए एक संदेश को पढ़कर सुनाया था। कभी भारतीय चिकित्सा विज्ञान काफी उन्नत अवस्था में था, लेकिन स्वाधीनता के बाद इस दिशा में ज्यादा काम नहीं हो पाया। इसमें कोई संदेह नहीं कि देर-सबेर आधुनिक चिकित्सा पद्धति को भारतीय संस्कृति और इसके चिकित्सा विज्ञान की शरण में आना ही होगा।

कोरोना काल में आयुर्वेद और योग की भूमिका को किस प्रकार आंका जा सकता है? डॉ. चौहान के इस सवाल पर डॉ. जयदीप ने कहा कि कोरोना से संक्रमित हुए करीब 85% मरीज योग और आयुर्वेद के उपचार से ठीक हुए। इसका आयुष मंत्रालय के ऐप पर प्रमाणिक दस्तावेज मौजूद है जिसे दुनिया भर के विशेषज्ञों ने माना है। हरियाणा पहला ऐसा राज्य है जिसने कोरोना मरीजों के उपचार के लिए दी जाने वाली कोरोना किट में एलोपैथी दवाओं के साथ-साथ आयुर्वेदिक दवाएं भी शामिल करने का साहस दिखाया और इसके व्यापक सकारात्मक परिणाम सामने आए। वायुमंडल में मौजूद कोरोना वायरस को नष्ट करने के लिए प्रदेश के गांव-गांव में यज्ञ के वाहन चलाए गए। कोरोना के उपचार में कोरोनिल अत्यंत लाभकारी है।

योग शिक्षकों की नियुक्ति प्रक्रिया प्रारंभ

हरियाणा ग्रंथ अकादमी उपाध्यक्ष डॉ. वीरेंद्र सिंह चौहान के साथ चर्चा में हरियाणा योग आयोग के अध्यक्ष डॉ. जयदीप आर्य ने बताया कि मुख्यमंत्री मनोहरलाल खट्टर और स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज की अगवाई में हरियाणा सरकार भारत की पारंपरिक चिकित्सा पद्धति को गौरवपूर्ण स्थान दिलाने के लिए विभिन्न परियोजनाओं पर काम कर रही है। इसके तहत प्रदेश के गावों में एक हजार योगशालाओं के निर्माण का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।इसके लिए 1500 करोड़ रुपए आवंटित कर दिए गए हैं। अब तक 528 व्यायामशालाओं का निर्माण पूरा हो चुका है और इनमें योग शिक्षकों की नियुक्ति की प्रक्रिया भी जून के पहले हफ्ते तक पूरी कर ली जाएगी।

उन्होंने कहा कि जिला स्तरीय चयन समितियों को जल्द से जल्द ही यह कार्य पूरा करने के लिए कहा गया है। इस प्रक्रिया में पुराने योग शिक्षकों को वरीयता देने के लिए 5% का कोटा निर्धारित किया गया है। डॉक्टर जयदीप के अनुसार अंततः एक हज़ार योग शिक्षकों की नियुक्ति होनी है नहीं और पूर्व में कार्य कर चुके अधिकांश योग शिक्षक नई व्यवस्था में नई प्रक्रिया के अनुसार समाहित हो सकेंगे.योग शिक्षकों की नियुक्ति के लिए क्या-क्या योग्यताएं निर्धारित की गई हैं? डॉ. चौहान के इस सवाल पर डॉ. जयदीप ने बताया कि योग शिक्षकों की अर्हता के तौर पर योग में डिप्लोमा एवं लेवल-वन का सर्टिफिकेट होना आवश्यक है जो किसी मान्यता प्राप्त संस्था या आर्ट ऑफ लिविंग, पतंजलि योगपीठ आदि से प्रमाणित हो।

कोरोना संक्रमण से बचाव कैसे करें

आयुर्वेद विशेषज्ञ डॉ. जयदीप आर्य ने बताया कि कोरोना संक्रमण से बचने का सबसे अच्छा तरीका यही है कि इसके वायरस को फेफड़ों तक नहीं पहुँचने दिया जाए और संक्रमण के पहले दो तीन दिन में नाक और गले में ही मार दिया जाए। इसमें आयुर्वेद एवं योग अत्यंत प्रभावकारी भूमिका निभा सकता है। नाक में सरसों का तेल या गाय के घी को गुनगुना कर डालें, भाप लें, गरारा करें और अनुलोम-विलोम, कपालभाति, भ्रामरी एवं उज्जयी प्राणायाम का अभ्यास नियमित रूप से करें तो कोरोना संक्रमण से बचा जा सकता है।

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नलकूपों के आवेदक जल्द ही एस्टिमेट के अनुसार पैसा जमा कराए: डॉ. चौहान

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वेक अप करनाल में कार्यकारी अभियंता के साथ बिजली से जुड़े मामलों पर चर्चा

52,00 से अधिक गाँव हो चुके जगमग

असंध। वर्ष 2014 में राज्य में मनोहर सरकार के अस्तित्व में आने के समय चोबीस घंटे बिजली की सुविधा केवल शहरों तक सीमित थी।
ग्रामीण अंचल को भी शहरों की तरह जगमग करने के लिए कि वर्तमान सरकार म्हारा गाँव जगमग गाँव योजना लेकर आयी। इसका परिणाम यह है कि आज प्रदेश के करीब 70 फ़ीसदी गांवों में 24 घंटे उजाला हो रहा है। हरियाणा सरकार की इस योजना से प्रदेश के करीब और 52 सौ से अधिक गांवों में 24 घंटे बिजली की आपूर्ति हो रही है। यह जानकारी हरियाणा ग्रंथ अकादमी के उपाध्यक्ष डॉ. वीरेंद्र सिंह चौहान ने दी। वह सोमवार को रेडियो ग्रामोदय के वेकअप करनाल कार्यक्रम में असंध क्षेत्र के उपभोक्ताओं की बिजली संबंधी समस्याओं पर कार्यकारी अभियंता गगन पांडे से चर्चा कर रहे थे।

चर्चा के दौरान डॉ. चौहान ने क्षेत्र के उपभोक्ताओं को सलाह दी कि उन्हें अपना बिजली बिल घटाने के लिए सोलर संयंत्रों का अधिकाधिक इस्तेमाल करना चाहिए और अपने मकानों एवं प्रतिष्ठानों में सौर बिजली संयंत्र स्थापित करना चाहिए। उन्होंने बताया कि प्रदेश के ग्रामीण अंचल में सोलर संयंत्रों के उपभोक्ताओं की संख्या अब भी अपेक्षा से कम है। गांवों में बैटरी आधारित सोलर संयंत्रों की अधिक मांग है।

गगन पांडे ने एक उपभोक्ता के सवाल का जवाब देते हुए बताया कि निसिंग गौशाला पावरलाइन को जल्द निर्माणाधीन गोंदर पावर हाउस से जोड़ा जाएगा। उन्होंने कहा कि यह पावर हाउस अगले दो महीने में बनकर तैयार हो जाएगा। इसी क्रम में पांडे ने जानकारी दी कि असंध डिवीज़न में अब तीन के बजाय चार सब डिवीज़न होंगी क्योंकि राज्य सरकार ने मंजूरा का सब डिवीज़न को स्वीकृत कर दिया है।

सिंचाई कनेक्शनों का रास्ता खुला

डॉ. चौहान ने कहा कि राज्य सरकार ने वर्ष 2018 तक आवेदन कर चुके किसानों को जल्द ट्यूबवेल के कनेक्शन देने का निर्णय लिया गया है। जो किसान आवेदन के समय 30,000 रुपया की राशि जमा करा चुके उन्हें इस महीने के अंत तक एस्टिमेट के आधार पर बाक़ी राशि जमा कराने के लिए कहा गया है और इस बात के प्रयास किए जाएंगे कि धान के आगामी सीज़न में खेतों को इनका पानी मिल सके।
इस संबंध में गगन पांडे ने स्पष्ट किया कि असंध डिवीज़न के ऐसे 784 आवेदकों को विभाग की ओर से प्रस्तावित लागत के हिसाब से दूसरी किस्त जमा करने का नोटिस भेजा गया है। इनमें से 127 लोगों ने दूसरी किस्त की राशि जमा कर दी है। जैसे-जैसे उपभोक्ताओं की राशि जमा होगी कनेक्शन देने में उन्हें प्राथमिकता मिलेगी।

हेल्प लाइन का करें इस्तेमाल

बिजली की समस्या पर आधारित ‘वेकअप करनाल’ के आयोजन में कार्यकारी अभियंता गगन पांडे ने बताया कि असंध डिवीज़न के बिजली उपभोक्ताओं की समस्या का समाधान करने के लिए क्षेत्र में एक 24* 7 हेल्पलाइन सेवा शुरू की गई है। उन्होंने उपभोक्ताओं को बिजली से संबंधित कोई भी समस्या होने पर हेल्पलाइन नंबर 1912 पर फोन करने की सलाह दी। कार्यकारी अभियंता ने बताया कि इस नंबर पर फोन करने पर डिवीजन में स्थित कंट्रोल रूम को तुरंत इसकी सूचना जाएगी। इसके बाद कंट्रोल रूम में मौजूद विद्युतकर्मी संबंधित उपभोक्ताओं से उनकी समस्या पूछ कर उसका समाधान करेंगे। इस सुविधा का 24 घंटे लाभ उठाया जा सकता है।

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