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नीलोखेड़ी के सवालों का हल निकालना होगा : डॉ. चौहान

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शहर की समस्याओं पर वेकअप करनाल में खुली चर्चा
सांसद और विधायक के बीच बेहतरीन तालमेल की माँग

करनाल। देश विभाजन के बाद बसाया गया नीलोखेड़ी आज तक विकास के मामले में ऊँचाइयों को नहीं छू पाया जो उसकी स्थापना के समय सोची विचारी गई थी। कई बार भी विपक्ष के प्रतिनिधि को विधायक चुनकर भेजने के कारण शायद यह स्थिति रही, मगर यह इकलौता कारण नहीं हो सकता।इसे चंडीगढ़ की तर्ज पर बसाने की बात कही गई थी और शुरुआती दौर में स्वयं पंडित नेहरू प्रधानमंत्री होते हुए दो बार यहाँ आए भी। मगर इस नगरी के भाग्य शायद चंडीगढ़ सरीखा बनाना नहीं था। एक बार नीलोखेड़ी को हरियाणा की नई राजधानी के रूप में विकसित करने की बात भी चली मगर वह भी सिरे नहीं चढ़ पाई।परिणाम यह है कि यह शहर मात्र एक-सवा किलोमीटर के दायरे में ही सिमट कर रह गया है।

उपरोक्त विचार-बिंदु रेडियो ग्रामोदय के वेकअप करनाल कार्यक्रम में नीलोखेड़ी की समस्याओं पर स्थानीय निवासियों से हरियाणा ग्रंथ अकादमी उपाध्यक्ष डॉ. वीरेंद्र सिंह चौहान की बातचीत के दौरान उभरकर सामने आए। डॉ. चौहान ने कहा कि राज्य की मनोहर लाल खट्टर की सरकार ने प्रदेश के हर जिले के विकास के लिए धन का समान रूप से आवंटन किया और धन की कहीं कमी नहीं आने दी। इसके बावजूद नीलोखेड़ी के लोगों की कुछ आकांक्षाएं अभी अधूरी है। उन्होंने कहा कि नीलोखेड़ी को सबडिवीजन बनाना विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण साबित होगा और इस दिशा में औपचारिकताएं तेज गति से पूर्ण की जा रही है। उन्होंने कहा कि शहर में बस स्टेण्ड की पुरानी माँग को भी यथाशीघ्र पूरा किया जाना सरकार की प्राथमिकताओं में शुमार है और इसके रास्ते में खड़ी बाधाओं को जल्द दूर किया जाएगा।यह दोनों ही मामले करनाल के सांसद और नीलोखेड़ी के विधायक द्वारा में समुचित तरीक़े से आगे बढ़ायी जा रहे हैं।

चर्चा में जुड़े सामाजिक कार्यकर्ता और भाजपा नेता शिवनाथ कपूर ने बताया कि आज से 32 साल पहले कुछ समस्याएं जहाँ मौजूद थीं, वह आज भी हैं। उन्होंने नीलोखेड़ी में कोरोना संक्रमण की स्थिति की जानकारी देते हुए कहा कि शहर में कोरोना के 100 पुष्ट मामले अस्पताल में उपचाराधीन हैं। शिवनाथ कपूर ने बताया कि नीलोखेड़ी के अस्पताल में 12 अतिरिक्त ऑक्सीजन बेड की व्यवस्था की गई है जिनमें 6 मरीज भर्ती हैं। इसके अलावा नीलोखेड़ी में 100 बिस्तरों वाला एक नया अस्पताल भी बनने जा रहा है।

चर्चा के दौरान एक विकास ने लॉकडाउन के दौरान छोटे दुकानदारों को पेश आने वाले आर्थिक संकट की ओर ध्यान दिलाया। इस पर डॉ. चौहान ने कहा कि दुकानदारों की समस्या से इनकार नहीं किया जा सकता। प्रदेश सरकार ने लॉकडाउन को यथासंभव टालने की कोशिश की, लेकिन परिस्थितियों ने ऐसा नहीं होने दिया। यह मजबूरी का फैसला है। जीवन बचाना हमारी सबसे बड़ी प्राथमिकता है। जब जीवन ही नहीं बचेगा तो दुकानदार रोजगार कैसे करेगा?

समाजसेवी पंकज शर्मा ने बताया कि कोरोना काल में सामाजिक संगठन भी अपना योगदान दे रहे हैं। नीलोखेड़ी के रक्तदाता परिवार आर्थिक रूप से कमजोर लोगों की मदद कर रहे हैं।

मस्कट से चर्चा में जुड़े दीपक शर्मा ने कहा कि करनाल के सांसद संजय और विधायक धर्मपाल के अंदर गोंदर परस्पर अधिक तालमेल के साथ कार्य करें तो अधर में लटके इस क्षेत्र के अनेक कार्य तेज गति से सिरे चढ़ सकते हैं।इस पर शिवनाथ कपूर ने कहा कि पूर्व विधायक भगवान दास कबीरपंथी ने भी क्षेत्र के विकास के लिए भरपूर परिश्रम किया।

युवा सामाजिक कार्यकर्ता योगी गाबा ने वैक्सीनेशन के लिए आवंटित स्लॉट के अनुसार टीकाकरण न होने का जिक्र किया। उन्होंने बताया कि टीकाकरण के लिए निर्धारित समय पर वैक्सीन नहीं लग पाता और उन्हें टीकाकरण के लिए इंतजार करना पड़ता है। उन्होंने सब डिवीज़न बनाने के साथ साथ बस अड्डे की माँग को भी जल्द पूरा किए जाने की बात कही। आशीष सिधवानी ने रोज़गार के नए अवसरों की व्यवस्था करने तथा केन्द्रीय प्रेस परिसर की 35 एकड़ भूमि का सदुपयोग किए जाने की माँग उठायी।

चर्चा में शिवनाथ कपूर, पंकज शर्मा, योगी गाबा, दीपक शर्मा और विकास के अलावा आशीष, अजय वर्मा, पारस खुराना और गुलाब सिंह पोसवाल ने भी भाग लिया।

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पाकिस्तान पर स्पष्ट थे डॉक्टर भीमराव अंबेडकर के विचार

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जिहादी सोच से निपटने में बाबा साहेब के विचार आज भी प्रासंगिक : डॉ. सी.पी. सिंह

करनाल। भारत विभाजन के समय गांधी ने अगर डॉ. भीमराव अंबेडकर की मांग मान ली होती तो देश संभवत: आज इस्लामी आतंकवाद की समस्या से न जूझ रहा होता। इस्लामिक आतंकवाद और अलगाववाद के सन्दर्भ में बाबा साहेब के विचार आज भी प्रासंगिक हैं। डॉ. अम्बेडकर की दूरदर्शिता इस बात से प्रमाणित होती है कि आज जो हो रहा है, उसकी कल्पना उन्होंने अपने जीवन काल में कर ली थी। यह मानना है प्रसिद्ध शिक्षा शास्त्री डॉ. सी. पी. सिंह का। अंबेडकर जयंती के अवसर पर रेडियो ग्रामोदय पर आयोजित वेकअप करनाल कार्यक्रम में वह वीरवार को डॉ . वीरेंद्र सिंह चौहान से रूबरू थे।

कार्यक्रम के दौरान स्वतंत्रता संग्राम में गांधी , नेहरू, पटेल व अंबेडकर समेत अन्य नेताओं की भूमिका, भारत विभाजन, अनुच्छेद 370 व गांधी से अंबेडकर के गंभीर मतभेदों सहित कई अन्य मुद्दों पर डॉ. चौहान द्वारा पूछे गए सवालों का डॉ. सी. पी. सिंह ने बड़ी बेबाकी और संजीदगी से जवाब दिया और अपनी राय रखी।

विभाजन के समय महात्मा गांधी से हुए गंभीर मतभेदों पर डॉ. चौहान द्वारा पूछे गए सवाल पर डॉ.सी.पी. सिंह ने डॉ. अंबेडकर की पुस्तक ‘थॉट्स ऑन पाकिस्तान’ का हवाला देते हुए कहा कि अंबेडकर मानते थे कि इस्लाम में अन्य मतों या मतावलंबियों के लिए कोई स्थान नहीं है। वह अन्य उपासना पद्धति की इजाजत नहीं देता। इसलिए जब धर्म के आधार पर भारत का विभाजन हो तो नवगठित इस्लामिक देश पाकिस्तान में कोई गैर मुस्लिम न रहे और भारत में भी कोई मुस्लिम न रहे। ऐसा ना होने पर देश जिहादी सोच से मुक्त नहीं रह पाएगा और विभाजन की परिस्थितियां भविष्य में भी पैदा हो सकती हैं। डॉ. सी.पी. सिंह ने पाकिस्तान के पहले हिंदू कानून मंत्री डॉ. जोगेंद्र नाथ मंडल का हवाला देते हुए कहा कि पाकिस्तान से उन्हें अपनी जान बचाकर भागना पड़ा था और उनकी यहां गुमनामी में मौत हुई। उन्होंने कहा कि अंबेडकर जानते थे कि मुस्लिम देश पाकिस्तान में हिंदुओं के लिए अपनी पहचान बचा कर रखना मुश्किल होगा।

डॉ. सी. पी. सिंह ने कहा कि अंबेडकर के गांधी और नेहरू से गंभीर वैचारिक मतभेद थे। जम्मू कश्मीर में धारा 370 लगाने के मुद्दे पर भी अंबेडकर ने अपने कानून मंत्री रहते इसमें सहयोग करने से साफ इनकार कर दिया था और इसे एक राष्ट्र विरोधी कृत्य बताया था। डॉ. वीरेंद्र सिंह चौहान के एक सवाल पर डॉ. सी.पी. सिंह ने कहा कि अंग्रेज चाहते थे कि भारतीय मानसिक रूप से उनके गुलाम बने रहें और इस साजिश के तहत उन्होंने कई किताबें लिखी। उन्होंने दलितों को गुमराह करने का प्रयास किया जिससे काफी हद तक अंबेडकर भी प्रभावित हुए। डॉ. सी.पी. सिंह ने कहा कि इस्लाम के प्रति अपनी स्पष्ट सोच के कारण ही अंबेडकर ने इस्लाम और ईसाई धर्म के बजाय बौद्ध धर्म को अपनाया जो वास्तव में सनातन धर्म की ही शाखा है। डॉ. सी.पी. सिंह ने कहा कि सुभाष चंद्र बोस के कारण अंग्रेजों को भारत छोड़कर जाना पड़ा। गांधी सोचते थे कि वह अंग्रेजों से बिना सीधी लड़ाई लड़े भी उन्हें देश छोड़ने पर मजबूर कर देंगे। चर्चा के दौरान डॉ. वीरेंद्र सिंह चौहान ने बताया कि अंबेडकर के गांधी से मतभेद इतने गहरे थे कि बीबीसी को दिए एक साक्षात्कार में अंबेडकर ने उन्हें महात्मा और दलित हितैषी मानने से भी इंकार कर दिया था।

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