आर्यों ने ही बसाई थी हड़प्पा संस्कृति, उनके विदेशी होने की बात गलत : धुम्मन

FacebooktwitterredditpinterestlinkedinmailFacebooktwitterredditpinterestlinkedinmail

रेडियो ग्रामोदय के कार्यक्रम ‘जय हो’ में सरस्वती नदी के ऐतिहासिक व वैज्ञानिक तथ्यों पर चर्चा

https://www.youtube.com/watch?v=HVXAGsBp2Y4

करनाल। पुराणों में वर्णित सरस्वती नदी कोई कपोल कल्पना नहीं, बल्कि एक सच्चाई थी। इस नदी के मूर्त रूप में सतह के ऊपर बहने से लेकर इसके अंतर्ध्यान होकर भूगर्भ में प्रवाहित होने तक के अब पर्याप्त पुरातात्विक एवं वैज्ञानिक प्रमाण उपलब्ध हैं। वैदिक काल में सरस्वती नदी आदिबद्री के पास स्थित बंदर पुच्छ ग्लेशियर से अवतरित होकर राजस्थान की तरफ बहती थी। आदिबद्री सरस्वती का उद्गम स्थल है। इस नदी का इतिहास महाभारत काल से भी जुड़ता है। कहते हैं कि महाभारत युद्ध के लिए कुरुक्षेत्र जैसी भूमि का चयन सरस्वती नदी को ध्यान में रखकर ही किया गया था। मान्यता है कि यहीं पर भगवान ब्रह्मा ने सरस्वती नदी के किनारे ब्रह्म सरोवर की स्थापना की थी और सृष्टि की भी रचना की। महाभारत काल में हुई एक बड़ी भूगर्भीय हलचल के बाद सरस्वती का पानी सतह के नीचे चला गया जो आज तक भूगर्भ में ही बहता है। ओएनजीसी एवं इसरो की रिपोर्ट ने इस ऐतिहासिक तथ्य की पुष्टि की है।

उपरोक्त जानकारी रेडियो ग्रामोदय के कार्यक्रम ‘जय हो’ में सरस्वती नदी के उद्गम एवं इसके अस्तित्व के पुरातात्विक साक्ष्यों पर चर्चा के दौरान सामने आई। हरियाणा ग्रंथ अकादमी के उपाध्यक्ष एवं भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता डॉ. वीरेंद्र सिंह चौहान ने इस महत्वपूर्ण विषय पर हरियाणा सरस्वती विरासत बोर्ड के उपाध्यक्ष धुम्मन सिंह किरमिच के साथ विस्तार से बातचीत की। डॉ. चौहान ने कहा कि हरियाणा की मनोहर सरकार सरस्वती नदी के प्रवाह पथ को फिर से स्थापित करने एवं नदी को पुनर्जीवित करने के लिए कृतसंकल्प है। वर्ष 2015 में प्रदेश में भाजपा की सरकार बनते ही हरियाणा सरस्वती विरासत बोर्ड का गठन किया जाना सरकार की इस उद्देश्य के प्रति गंभीरता को दर्शाता है। यह विरासत बोर्ड राज्य भर में जहां-तहां बिखरे सरस्वती नदी के अवशेषों को ढूंढ कर उसे पुनर्जीवित करने के लिए प्रयासरत है।

FacebooktwitterredditpinterestlinkedinmailFacebooktwitterredditpinterestlinkedinmail