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हरियाणा के 5500 गांवों में अब 24 घंटे बिजली आपूर्ति : डॉ. चौहान

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रेडियो ग्रामोदय के कार्यक्रम ‘म्हारे गाम की बात’ में गांव जलमाना पर चर्चा

करनाल। हरियाणा के करीब 5500 गांव ऐसे हैं जहां चौबीसों घंटे बिजली की अबाध आपूर्ति हो रही है। प्रदेश सरकार की ‘म्हारा गांव, जगमग गांव’ योजना के तहत 24 घंटे बिजली आपूर्ति करने पर वर्ष 2015 से ही काम जारी है। यह जानकारी हरियाणा ग्रंथ अकादमी के उपाध्यक्ष एवं निदेशक डॉ. वीरेंद्र सिंह चौहान ने रेडियो ग्रामोदय के कार्यक्रम ‘म्हारे गाम की बात’ में गांव जलमाना पर चर्चा के दौरान दी।जलमाना गांव पर चर्चा में डॉ. चौहान के अलावा कार्यक्रम संचालक प्रवीण धनखड़, वरिष्ठ भाजपा नेता सुरेश गोयल और अटल सेवा केंद्र संचालक रवि गुप्ता भी शामिल थे। डॉ. चौहान ने इस अवसर पर गांवों में नलों से बेकार बहने वाले पानी पर चिंता जताते हुए कहा कि पानी की बर्बादी नहीं होनी चाहिए। इस समस्या की तरफ रवि गुप्ता ने ध्यान दिलाते हुए कहा था कि गांव जलमाना में कई जगह नलों से पानी बेकार बहता रहता है।

डॉ. चौहान ने रवि गुप्ता से अनुरोध किया कि वह स्वयं इस दिशा में पहल करते हुए ऐसे जल स्रोतों को चिन्हित करें जहां नलों से पानी बेकार बहता रहता है ताकि पानी की बर्बादी रोकने के लिए कोई योजना बनाई जा सके।

भाजपा कार्यकर्ता सुरेश गोयल ने जलमाना गांव का परिचय एवं पृष्ठभूमि बताते हुए कहा कि यह एक सिख बहुल गाँव है जहां 36 बिरादरियों के लोग रहते हैं। यह गांव ऐतिहासिक और धार्मिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है। मान्यताओं के अनुसार यहां महर्षि परशुराम के पिता बाबा जमदग्नि ने तपस्या की थी। इसलिए इस गांव का नाम जमदग्नि के नाम पर पड़ा और बदलते – बदलते जलमाना हुआ।गोयल ने बताया कि जलमाना गांव का इतिहास महाभारत काल से जुड़ा हुआ है। यह गांव अपनी न्यायप्रियता के लिए जाना जाता है। जलमाना तीर्थ में एक बहुत बड़ा मंदिर है जिसके अंदर काफी बड़े क्षेत्र में फैला हुआ एक तालाब है। मान्यता है कि इस तालाब के बीचो-बीच वाले स्थान पर ऋषि जमदग्नि ने तपस्या की थी। यहां दूज के दिन एक बहुत बड़ा मेला लगता है जिसमें भाग लेने के लिए लोग दूर-दूर से यहां पहुंचते हैं।

गांव की विशेषता बताते हुए अटल सेवा केंद्र संचालक रवि गुप्ता ने कहा कि गांव जलमाना में मंदिर, मस्जिद और गुरुद्वारा तीनों ही स्थित हैं। गांव में आपसी भाईचारे का आलम यह है कि यहां सभी त्योहार सभी बिरादरियों के लोग मिलजुल कर मनाते हैं। उन्होंने बताया कि प्रदेश के लगभग सभी मुख्यमंत्री इस गांव का दौरा कर चुके हैं। मौजूदा मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने भी इस गांव का दौरा किया था।

प्रवीण धनखड़ के सवाल पर रवि गुप्ता ने बताया कि गांव में पशुओं और मनुष्य के लिए एक-एक सरकारी अस्पताल है जो अच्छी अवस्था में है। उन्होंने गांव के अस्पताल की चारदीवारी के निर्माण का मुद्दा उठाया। रवि ने कहा कि गांव में पक्की सड़कों का भी निर्माण हो चुका है और बिजली आपूर्ति की व्यवस्था भी संतोषजनक है।

गांव जलमाना में कितने जौहड़ हैं और उन पर अतिक्रमण की क्या स्थिति है? डॉ. चौहान के इस सवाल पर रवि गुप्ता ने बताया कि जलमाना में चार जोहड़ हैं जिनका क्षेत्रफल काफी बड़ा है। सुरेश गोयल ने अतिक्रमण का मुद्दा उठाते हुए कहा कि जौहड़ो पर नए अतिक्रमण तो नहीं हो रहे लेकिन पहले के कुछ अतिक्रमण को अब भी हटाया नहीं जा सका है।

म्हारे गाम की बात में जल्माना के साथियों के साथ बातचीत

इस पर डॉ. चौहान ने कहा कि मनुष्यों के अस्तित्व के लिए जलाशयों का अस्तित्व बचाना जरूरी है। गांव-शहरों के जलाशय किसी की निजी संपत्ति नहीं, बल्कि प्राकृतिक संपदा है। हरियाणा सरकार ने इसी को ध्यान में रखते हुए एक तालाब प्राधिकरण गठित किया है जो ग्रामीण अंचल के जोहडों के सौंदर्यीकरण का काम देखता है।

उन्होंने पूछा कि जलमाना पंचायत की अपने स्रोतों से कितनी आय होती है? इस पर सुरेश गोयल ने जानकारी दी कि जलमाना पंचायत के पास 24 एकड भूमि है जो उसकी आय का मुख्य स्रोत है। चर्चा के दौरान गांव में युवाओं को प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए प्रशिक्षण देने के उद्देश्य से निशुल्क कोचिंग शुरू करने की भी योजना तैयार की गई। रेडियो ग्रामोदय ने इस दिशा में आगे बढ़कर पूरा सहयोग एवं पहल करने का संकल्प लिया।

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विघटनकारी तत्वों के भरोसे ना छोडें राजनीति , कर्मठ को मौका दें

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रेडियो ग्रामोदय के ‘म्हारे गाम की बात’ कार्यक्रम में गांव राहड़ा पर चर्चा

 

असंध । देश और राज्यों का विकास एवं उनका सुचारू संचालन संस्थागत माध्यमों से ही संभव है। इस व्यवस्था का निर्माण राजनीतिक प्रणाली से ही हो सकता है। इसे इस तरह समझा जाए कि हमारे सामाजिक जीवन का नियमन और संचालन करने के लिए किसी ना किसी व्यवस्था का होना जरूरी है। व्यवस्थाहीन समाज को ही जंगलराज कहते हैं। इसलिए, उस व्यवस्था के निर्माण के लिए जो माध्यम विकसित हुआ उसे ही राजनीति कहते हैं। अच्छी शासन व्यवस्था और शांतिपूर्ण जीवन-यापन के लिए कर्मठ एवं इमानदार लोगों को आगे आना होगा। राजनीति में उनकी सख्त जरूरत है।

उपरोक्त विचार रेडियो ग्रामोदय के कार्यक्रम ‘म्हारे गाम की बात’ में राहडा के ग्रामीणों से चर्चा के दौरान हरियाणा ग्रंथ अकादमी के उपाध्यक्ष डॉ. वीरेंद्र सिंह चौहान ने व्यक्त किए। डॉ. चौहान ने यह टिप्पणी सामाजिक कार्यकर्ता और कारोबारी नरेंद्र राणा के उस बयान पर की जिसमें उन्होंने राजनीति को गंदी चीज बताया था और इससे दूर रहने की बात कही थी।

डॉ. चौहान ने कहा कि गावों के विकास के लिए यह जरूरी है कि स्थानीय समस्याएं व आपसी विवाद आपस में ही मिल-बैठकर सुलझा लिए जाएं। आपसी विवाद का थाना-कचहरी तक जाना अच्छी बात नहीं। इससे आपसी सौहार्द और गांव की सामाजिक समरसता पर असर पड़ता है। चर्चा के एक प्रतिभागी शुभम राणा ने भी उनकी इस बात का समर्थन किया।

गांव राहडा की पृष्ठभूमि और वहां विकास की स्थिति पर चर्चा करते हुए नरेंद्र राणा ने कहा कि यह गांव कब बसा, इस संबंध में कोई प्रामाणिक जानकारी उपलब्ध नहीं है। इस गांव में तीन पट्टियां हैं और यहां कई जातियों के लोग निवास करते हैं। ग्राम पंचायत का पिछला कार्यकाल संतोषजनक कहा जा सकता है। इस दौरान गांव में विकास के कई कार्य हुए। पाइपलाइन बिछाई गई, पेयजल के लिए मोटर भी लगाया गया। यह मोटर पिछले साल तक तो ठीक कार्य कर रहा था, लेकिन इस साल इसका संचालन सुचारू रूप से नहीं हो पा रहा। गांव की कुछ गलियों के पुनर्निर्माण की जरूरत है।

गांव के कितने लोग सरकारी नौकरियों में हैं? डॉ. चौहान के इस सवाल पर टिंकू रोजड़ा ने बताया कि सरकारी नौकरियों में काम करने वाले उनके करीब 5-6 दोस्त पिछले पांच साल तक गांव में रहे। उन्होंने बताया कि गांव में 2 लोग ऐसे भी थे जो न्यायिक सेवा में जज के पद पर नियुक्त थे।

टिंकू रोजड़ा ने कहा कि गांव में पानी निकासी की समस्या है और सड़कें भी टूटी हुई हैं। इसके अलावा गांव का स्कूल भवन भी जर्जर अवस्था में है जिसका निर्माण करने की जरूरत है।

टिंकू ने बताया कि दो साल पहले गांव के एक युवा सॉफ्टवेयर इंजीनियर वीरेंद्र ने ग्रामवासियों का डेटाबेस तैयार करने की अभिनव पहल की थी और एक ऐप तैयार किया था जिसकी लॉन्चिंग खुद मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने की थी। इस डेटाबेस में गांववासियों के बारे में संपूर्ण जानकारी उपलब्ध थी। मसलन, गांव का कौन सा व्यक्ति क्या व्यवसाय करता है, कहां तक पढ़ा लिखा है और उसका मोबाइल नंबर क्या है, उसका फोटो आदि। इसके अलावा इस ऐप में यह भी जानकारी थी कि गांव में कितने स्कूल, पेट्रोल पंप, आटा चक्की और नागरिक सुविधा के अन्य साधन उपलब्ध हैं। लेकिन कतिपय कारणों से यह आईडिया सिरे नहीं चढ़ पाया।

डॉ. चौहान ने पूछा कि गांव राहडा में सामूहिक प्रयास से सर्वप्रथम कौन सा कार्य करने की जरूरत है? इस पर टिंकू ने कहा कि गांव में फिलहाल एक श्मशान घाट की सख्त जरूरत है। इसके अलावा गांव को हरा-भरा बनाने के लिए पौधरोपण करने की भी जरूरत है।

डॉ चौहान ने कहा कि गांवों को साफ-सुथरा और हरा-भरा बनाए रखने के लिए सबको मिलकर प्रयास करना होगा। उन्होंने किसानों की समस्याओं को देखते हुए गांव में एक फार्मर प्रोड्यूसर ऑर्गेनाइजेशन (एफपीओ) बनाने की सलाह दी ताकि कृषि उत्पादों के लिए विपणन की समस्या का समाधान हो सके।

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