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शिक्षण क्षेत्र में जाने के इच्छुक लोगों के लिए नया 4 वर्षीय पाठ्यक्रम सुनहरा मौका : डॉ. चौहान

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ग्रामोदय लाइव में ग्रंथ अकादमी उपाध्यक्ष ने शिक्षाविद ऋषि गोयल के साथ की चर्चा

करनाल। नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति में उच्च शिक्षा, स्कूली शिक्षा और तकनीकी शिक्षा तीनों शामिल हैं। इस शिक्षा नीति का अध्याय 5 और 15 पूर्ण रूप से शिक्षकों की शिक्षा पर ही केंद्रित है। नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति के निर्देशक सिद्धांतों के परिप्रेक्ष्य में हरियाणा सरकार ने दो नए शिक्षक प्रशिक्षण संस्थान खोलने को मंजूरी दी है। ये दो शिक्षक प्रशिक्षण संस्थान अन्य राज्यों के लिए भी रोल मॉडल साबित होंगे। यह जानकारी हरियाणा ग्रंथ अकादमी के उपाध्यक्ष एवं भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता डॉ वीरेंद्र सिंह चौहान ने रेडियो ग्रामोदय के लाइव कार्यक्रम में दी। वह प्रमुख शिक्षाविद एवं स्टेट इंस्टीट्यूट आफ एडवांस्ड स्टडीज इन टीचर्स एजुकेशन, झज्जर के निदेशक डॉ. ऋषि गोयल से चर्चा कर रहे थे।

डॉ. चौहान ने डॉ ऋषि गोयल से पूछा कि नये खुलने जा रहे दो शिक्षक प्रशिक्षण संस्थान अन्य संस्थानों से किस प्रकार अलग होंगे और इनकी विशेषताएं क्या होंगी? इस पर डॉ. ऋषि गोयल ने बताया कि इन नए शिक्षक प्रशिक्षण संस्थानों में पारंपरिक बीएड पाठ्यक्रम के मुकाबले 4 वर्षीय पाठ्यक्रम होगा जो 12वीं तक की संपूर्ण शिक्षा के लिए पात्रता प्रदान करने वाला होगा। इस कोर्स को पूरा करने पर अभ्यर्थियों का एक साल बचेगा। इस पाठ्यक्रम में प्रवेश 12वीं की परीक्षा के आधार पर मिलेगा और प्रारंभिक बैच में दाखिला लेने वाले विद्यार्थी भविष्य में लाभ की स्थिति में होंगे। उनकी इस बात का समर्थन करते हुए डॉ. चौहान ने भी कहा कि चार वर्षीय इस नए पाठ्यक्रम की डिग्री भविष्योन्मुखी है। देशभर में शिक्षकों के प्रशिक्षण के पाठ्यक्रम अब इसी पैटर्न पर आने वाले हैं। यह प्रक्रिया वर्ष 2030 तक पूरी कर लेने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

डॉ. ऋषि गोयल ने अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए कहा कि शिक्षा में कोई भी आमूलचूल परिवर्तन लाना शिक्षकों के माध्यम से ही संभव है। किसी भी स्तर पर शिक्षक होने की पात्रता हासिल करने के लिए पाठ्यक्रमों को गंभीरता से चलाए जाने की आवश्यकता है। पहले ऐसा होता था कि अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में उत्तीर्ण न हो पाने पर अभ्यर्थी काम चलाने के लिए शिक्षक बन जाते थे। इस स्थिति में बदलाव की आवश्यकता महसूस की गई। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति में अच्छे लोगों को टीचिंग क्षेत्र में लाने का रोडमैप प्रस्तुत किया गया है।

डॉ. चौहान ने कहा कि नई शिक्षा नीति दो वर्षीय बी.एड. पाठ्यक्रमों को बंद करने की संस्तुति करती है। उन्होंने पूछा कि क्या यह संस्तुति देश भर में एक साथ लागू होगी या चरणबद्ध ढंग से यह प्रक्रिया पूरी की जाएगी। इस पर डॉ. ऋषि गोयल ने बताया कि पुराने संस्थान चरणबद्ध ढंग से फेज आउट किए जाएंगे। वर्ष 2030 तक सभी संस्थान चार वर्षीय पाठ्यक्रम ही चलाएंगे और इन चरणों का निर्धारण केंद्र और राज्य सरकार मिलकर करेंगे। नए पाठ्यक्रम में प्रवेश के लिए ऑनलाइन आवेदन ही स्वीकार किए जाएंगे जिनकी अंतिम तिथि 19 अक्टूबर थी। 21 अक्टूबर को सूची प्रकाशित की जाएगी।

डॉ. चौहान ने पूछा कि क्या नई शिक्षा नीति में भारतीय भाषाओं के प्रति उतनी गंभीरता है जितनी विदेशों में उनकी अपनी भाषाओं के प्रति है? इस पर डॉ. ऋषि गोयल बताया कि नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति में बहुभाषी व्यक्तित्व पर जोर दिया गया है। उनकी बात का समर्थन करते हुए डॉ. वीरेंद्र सिंह चौहान ने भी कहा कि अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद ने इंजीनियरिंग की परीक्षा देने के इच्छुक छात्रों के लिए अधिकतर भारतीय भाषाओं के द्वार खोल दिए हैं और हरियाणा सरकार ने भी इस दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया है। उन्होंने बताया कि हरियाणा के तकनीकी शिक्षा मंत्री अनिल विज ने घोषणा की है कि हरियाणा के तीन विश्वविद्यालयों में तकनीकी शिक्षा के लिए हिंदी के पाठ्यक्रम प्रारंभ करने की पहल की गई है। इसके अलावा तकनीकी शिक्षा की पुस्तकों का हिंदी में भी प्रकाशन शुरू किया गया है। यह एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है और इसके लिए तकनीकी शिक्षा मंत्री बधाई के पात्र हैं।

डॉ. चौहान ने बताया कि हरियाणा ग्रंथ अकादमी ने भी एआईसीटीई के साथ एक करार किया है जिसके अनुसार यह संस्था तकनीकी शिक्षा की ऐसी पुस्तकों का प्रकाशन और विपणन का कार्य करेगी। उन्होंने बताया कि पॉलिटेक्निक की पुस्तकें हिंदी में लिखवाने की परियोजना पर भी काम चल रहा है। कुछ महीनों में यह पुस्तकें उपलब्ध हो जाएंगी। अपनी भाषा, अपनी संस्कृति और अपनी परंपराओं पर काम शुरू करने की जरूरत है।

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हिंदी व अन्य भारतीय भाषाओं का सम्मान बहाल करना हमारी प्राथमिकता : विज

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अंबाला छावनी/चंडीगढ़ / पंचकूला । गृह, स्वास्थ्य और तकनीकी शिक्षा मंत्री अनिल विज ने कहा है प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कुशल नेतृत्व में भाजपा सरकार हिंदी सहित सभी भारतीय भाषाओं के मान-सम्मान की बहाली के लिए कृत संकल्प है। प्रदेश के तीन विश्वविद्यालयों में हिंदी में तकनीकी शिक्षा के पाठ्यक्रम शुरू किए जाने की पहल के लिए तकनीकी शिक्षा मंत्री का आभार व्यक्त करने पहुँचे हरियाणा ग्रंथ अकादमी के उपाध्यक्ष डॉ. वीरेंद्र सिंह चौहान के साथ विमर्श में उन्होंने यह टिप्पणी की।डॉ.चौहान ने इस अवसर पर राज्य सरकार की इस महत्वपूर्ण पहल के लिए तकनीकी शिक्षा मंत्री के प्रयासों की सराहना की और हरियाणा ग्रंथ अकादमी द्वारा तकनीकी शिक्षा की पाठ्यपुस्तक तैयार करने के लिए किए चलायी जा रही योजनाओं का विवरण दिया।

गृह मंत्री अनिल विज ने कहा कि विश्व के सब स्वाभिमानीऔर समर्थ देश अपनी-अपनी भाषाओं में ज्ञान विज्ञान और तकनीकी विषयों की शिक्षा बरसों से दे रहे हैं। भारत में पूर्ववर्ती सरकारों ने हिंदी और अन्य भारतीय भाषाओं की दशकों तक उपेक्षा कर उन्हें पीछे धकेलने का अपराध किया। भारतीय जनता पार्टी की सरकार द्वारा नई शिक्षा नीति में भारतीय भाषाओं के मान-सम्मान की बहाली के प्रभावी प्रावधान कर उन पर काम करना शुरू कर दिया है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार के कार्यालयों में अधिकतम कार्य हिंदी में करने के लिए विभाग अध्यक्षों को लिखित निर्देश दिए गए हैं। आने वाले दिनों में इन निर्देशों के अनुपालन की समीक्षा भी की जाएगी।

हरियाणा ग्रंथ अकादमी उपाध्यक्ष और भारतीय जनता पार्टी के प्रवक्ता डॉ. वीरेंद्र सिंह चौहान ने इस अवसर पर बताया कि हरियाणा ग्रंथ अकादमी केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय के अंतर्गत चलने वाले पारिभाषिक शब्दावली आयोग के आर्थिक सहयोग से हिंदी में पॉलिटेक्निक की पुस्तकें तैयार करवा रही है। इसके अलावा अकादमी ने अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद के साथ भी हिंदी में परिषद द्वारा तैयार की गई इंजीनियरिंग की किताबों के प्रकाशन और विपणन के संबंध में एक समझौता पत्र पर हस्ताक्षर कर उसके अनुसार कार्य करना प्रारंभ कर दिया है। उन्होंने कहा कि अकादमी द्वारा तकनीकी शिक्षा से जुड़ी पाठ्य पुस्तकों के लेखन से जुड़े विभिन्न आयामों पर मंथन के लिए एक राष्ट्रीय संगोष्ठी व कार्यशाला आयोजित करने की तैयारी की जा रही है।

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काछवा के युवाओं को सशक्त कर रहा सरदार पटेल पुस्तकालय : डॉ. चौहान

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ग्रंथ अकादमी उपाध्यक्ष ने पुस्तकालय का दौरा कर लिया व्यवस्थाओं का जायजा

करनाल। करनाल विधानसभा क्षेत्र के काछवा गांव में उत्तर हरियाणा बिजली वितरण निगम द्वारा स्थापित और संचालित सरदार पटेल पुस्तकालय काछवा सहित आसपास के ग्रामीण अंचल के युवाओं के लिए वरदान साबित हो रहा है। पुस्तकालय के रूप में ग्रामीण अंचल के युवाओं को अपने स्वाध्याय के लिए एक ऐसा बेहतर स्थान मिल गया है जहां प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी, कंप्यूटर सीखने एवं विभिन्न विषयों पर विस्तृत ज्ञान हासिल करने के लिए महत्वपूर्ण पुस्तकें उपलब्ध हैं। यह टिप्पणी हरियाणा ग्रंथ अकादमी के उपाध्यक्ष एवं भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता डॉ. वीरेंद्र सिंह चौहान ने की। वह सरदार वल्लभभाई पटेल पुस्तकालय का दौरा कर उसकी कार्यप्रणाली एवं व्यवस्थाओं का जायजा ले रहे थे। इस क्रम में ग्राम वासियों से मुलाकात के दौरान उन्होंने पुस्तकालय की लंबित समस्याओं पर भी विस्तार से चर्चा की।

इस अवसर पर डॉ. वीरेंद्र सिंह चौहान ने कहा कि इस वातानुकूलित पुस्तकालय में पढ़ाई के लिए इतनी अच्छी सुविधाएं उपलब्ध हैं जो आमतौर पर कई अच्छे निजी स्कूलों में भी उपलब्ध नहीं हैं। काछवा गांव मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर के विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत आता है। प्रदेश सरकार ने उत्तर हरियाणा बिजली निगम के माध्यम से प्रदेश के अलग-अलग गांवों में पुस्तकालयों के निर्माण का फैसला किया है। इस क्रम में वैसे गांवों को प्राथमिकता दी जा रही है, जहां के ग्रामीणों ने जगमग योजना में अच्छी भागीदारी की है और जहां बिजली के बिल कायदे से भरे जा रहे हैं। काछवा में सरदार पटेल पुस्तकालय इसी दिशा में उठाया गया एक कदम है। इसके लिए मुख्यमंत्री मनोहर लाल और उत्तर हरियाणा बिजली वितरण निगम दोनों बधाई के पात्र हैं। ऐसा ही एक पुस्तकालय नीलोखेड़ी विधानसभा के गोंदर गाँव में बनकर तैयार हो चुका है।

डॉ. चौहान ने कहा कि पुस्तकें, एयर कंडीशनर, कंप्यूटर एवं बैठने का बेहतर स्थान मात्र साधन हैं। इनका मकसद ज्ञान प्राप्ति की साधना को और अनुकूल एवं सुगम बनाना है। यह साधना परिश्रम, अभ्यास और स्वाध्याय के बिना संभव नहीं है। हरियाणा ग्रंथ अकादमी सरकार का संस्थान है जो पुस्तकों के प्रकाशन का काम करता है। मुख्यमंत्री इसके अध्यक्ष हैं। पुस्तक प्रेमियों एवं पुस्तकालयों को अच्छी पुस्तकें प्रदान करना ग्रंथ अकादमी का दायित्व है। हमें पढ़ाई के साथ साथ अपनी बातों को मजबूत तरीके से रखने की कला भी आनी चाहिए।

डॉ. वीरेंद्र सिंह चौहान ने कहा कि किताबों के ज्ञान को अपने अंदर उतार कर इसे जीवन में आगे बढ़ने का यदि माध्यम बना लिया जाए तो साधना सफल समझी जाएगी। यह पुस्तकालय जिज्ञासु एवं जागरूक युवाओं को पढ़ने लिखने के लिए बहुत शांत एवं सुंदर माहौल प्रदान करता है। उम्मीद है कि आने वाले दिनों में यहां ज्ञान प्राप्ति के साधन और बढ़ेंगे जिनसे युवाओं की ज्ञान प्राप्ति की राह और सुगम हो सकेगी। उन्होंने विद्यार्थियों का आह्वान किया कि वे केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय द्वारा संचालित नेशनल डिजिटल लाइब्रेरी ऑफ़ इंडिया के ऑनलाइन संसाधनों का उपयोग भी करना प्रारम्भ करें। इस अवसर पर भाजपा नेता सुरेश भारद्वाज ने डॉ. वीरेन्द्र सिंह चौहान का काछवा पुस्तकालय पहुँचने पर स्वागत किया ।

इस अवसर पर लाइब्रेरियन शालू, पूनम और संचालक एसडीओ संदीप सिकरी के अलावा छात्र सुमित, वैभव, शुभम, विशाल, पूजा और अथर्व भी मौजूद रहे।

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कबीर आज भी प्रासंगिक : डॉ. चौहान

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जयंती पर ग्रंथ अकादमी व रेडियो ग्रामोदय की ओर से दोहा पाठ का आयोजन

करनाल / पंचकुला । संत कबीर दास के कालखंड में विभिन्न सामाजिक विडंबनाएं मौजूद थीं। संत कबीर में अपनी रचनाओं के माध्यम से समकालीन सत्ता एवं व्यवस्थाओं को चुनौती देने का सामर्थ्य था और उन्होंने ऐसा ही किया। कबीर के कार्यों, चिंतन, व्यक्तित्व एवं उनकी रचनाओं में अध्यात्म की गहराई और ऊंचाई थी। उन्होंने निर्भीक होकर तत्कालीन सत्ताधीशों एवं शक्तिशाली वर्ग को चुनौती देने का काम किया। एक साहित्यकार से अपेक्षा भी यही होती है कि वह अपनी रचनाओं से सामाजिक विडंबनाओं एवं विकृतियों पर प्रहार करे। कवियों – साहित्यकारों पर अपने समाज को दिशा देने का भी दायित्व है। हर कवि के अंदर कबीर होने के तत्व मौजूद होते हैं। समाज को सचेत करने के लिए उस सामर्थ्य को जगाना होगा।

उपरोक्त विचार हरियाणा ग्रंथ अकादमी के उपाध्यक्ष डॉ वीरेंद्र सिंह चौहान ने संत कबीर दास की जयंती पर आयोजित दोहा पाठ के दौरान व्यक्त किए। उन्होंने इस आयोजन के सभी प्रतिभागियों को हरियाणा ग्रंथ अकादमी की ओर से आभार प्रकट करते हुए उनसे अपने-अपने दौर का कबीर बनने का आह्वान किया और कहा कि कबीर बनने पर कोई रोक नहीं है।

ग्रंथ अकादमी और रेडियो ग्रामोदय के संयुक्त तत्वावधान मैं आयोजित इस दोहा पाठ का संचालन कवियित्री नीलम त्रिखा ने किया। उन्होंने कार्यक्रम की कमान संभालते हुए अपने उद्बोधन में कहा कि कबीर दास एक बहुत बड़े समाज सुधारक और ईश्वर भक्त थे। उनके अंदर स्वाभिमान कूट- कूट कर भरा था। अपनी रचनाओं से उन्होंने मनुष्यों को सारे भेद मिटाकर मानव मात्र के लिए एकजुट हो जाने का संदेश दिया है। इस अवसर पर उन्होंने एक प्रेरक पंक्ति का भी उल्लेख किया — मात-पिता के हाथ ज्यूं, ज्यू बरगद की छांव
क्यों जन्नत को खोजता, जन्नत उनके पांव।

कार्यक्रम का शुभारम्भ श्री मद्भागवत गीता वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय के सातवीं कक्षा के छात्र यजुर कौशल के द्वारा संत कबीर के दोहों के सुमधुर सस्वर पाठ के साथ हुआ ।

दोहा पाठ की शुरुआत डॉ. अश्विनी शांडिल्य ने अपनी स्वरचित रचनाओं से की। उन्होंने गुरु की महिमा का वर्णन करते हुए कहा, —

अथाह समुद्र है ज्ञान का, माणिक छिपे अनेक
क्या है तेरे काम का, गुरु बतलाए एक।
गुरु प्रकाश स्तंभ है, पथ को करें प्रशस्त
ज्योति ज्ञान की जल उठे, अंधकार हो पस्त।

उनके बाद चंडीगढ़ से जुड़ी संगीता शर्मा ने अपने भावों को कुछ यूं व्यक्त किया, –

श्याम बजाए बांसुरी, मन का यह चितचोर
प्रेम लगन की धुन बजी, नाचे मन का मोर।

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आचार्य अभिनवगुप्त से आमजन को अवगत कराना जरूरी

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विचार गोष्ठी में अभिनव गुप्त के व्यक्तित्व व शैव दर्शन पर चर्चा

करनाल । आचार्य अभिनवगुप्त जैसे विराट व्यक्तित्व वाले विद्वान एवं उनके अद्भुत शैव दर्शन के प्रति आज की युवा पीढ़ी का अनभिज्ञ होना अत्यंत दुख एवं चिंता का विषय है। आचार्य अभिनवगुप्त ही नहीं, उनके अलावा भी ऐसे कई विश्व स्तरीय मनीषी एवं विचारक हैं जिनके बारे में आज की युवा पीढ़ी को कोई जानकारी नहीं है। जनसाधारण और खासकर आज की युवा पीढ़ी को आचार्य अभिनवगुप्त के व्यक्तित्व एवं उनके जीवन दर्शन को समझना बहुत जरूरी है। ऐसे महापुरुषों की जीवनी पर छोटी पुस्तकों की एक श्रृंखला शुरू होनी चाहिए। मुख्यमंत्री श्री मनोहरलाल की अध्यक्षता में कार्य करने वाली हरियाणा ग्रंथ अकादमी ऐसे महापुरुषों के जीवन और दर्शन पर आधारित परिचयात्मक पुस्तकमाला प्रकाशित करने की योजना बनाएगी। इस शृंखला में पहली पुस्तक आचार्य अभिनव गुप्त के व्यक्तित्व और कार्यों को समर्पित होगी। यह टिप्पणी हरियाणा ग्रंथ अकादमी के उपाध्यक्ष डॉ.वीरेंद्र सिंह चौहान ने आचार्य अभिनवगुप्त की जयंती पर आयोजित राष्ट्रीय विचार गोष्ठी की अध्यक्षता करते हुए की।

गोष्ठी के दौरान कई वक्ताओं एवं कश्मीरी विद्वानों ने अपने विचार व्यक्त किए। गोष्ठी की शुरुआत करते हुए जवाहरलाल नेहरु विश्वविद्यालय के संस्कृत एवं प्राच्य विद्या अध्ययन संस्थान के डॉ. रजनीश मिश्रा ने कहा कि विश्व भर का शिक्षित समुदाय जिस देश को सबसे ज्यादा पसंद करता है, वह भारत देश ही है। यह भारत की ज्ञान मूलक संस्कृति की विशेषता है। यह संस्कृति आत्मा को अभिमुख करने एवं स्वयं को अपने आप से साक्षात्कार कराने का ज्ञान देती है। इस संस्कृति में कुछ ऐसे भी प्रश्न पूछे जाते रहेंगे जो अन्य संस्कृतियों में मिलना मुश्किल है। जिस ज्ञान की हमें निरंतर खोज है वह मोक्ष देने वाला ज्ञान है। निरंतर इस ज्ञान की खोज में लिप्त रहने के कारण ही इस देश का नाम भारत सार्थक होता है। डॉ. मिश्रा ने कहा कि आचार्य अभिनवगुप्त ने ज्ञान और साधना की सभी धाराओं में लेखन किया।

कश्मीरी विद्वान और नाद पत्रिका के मुख्य संपादक सुनील रैना ने आचार्य अभिनवगुप्त के जीवन पर प्रकाश डालते हुए कहा कि आचार्य की चर्चा कश्मीरी शैव दर्शन का उल्लेख किए बिना पूरी नहीं हो सकती। आचार्य अभिनव गुप्त 10 वीं शताब्दी के आसपास आए। विडंबना है कि अभिनवगुप्त के दर्शन को मात्र अकादमिक स्तर तक सीमित कर दिया गया है। उनके जीवन दर्शन को सरल भाषा में परिभाषित करने की जरूरत है ताकि आम लोग भी इसे समझ सकें। कश्मीर शिव शक्ति की भूमि रही है। निर्मल पुराण में कहा गया है कि कश्मीर की भूमि स्वयं पार्वती है। भगवान शिव उनके महेश्वर हैं।

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पब्लिक स्कूलों की तर्ज पर होगी सरकारी स्कूलों में पढ़ाई, बच्चों को मिलेंगे टेबलेट

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वेकअप करनाल में शिक्षा जगत को कोरोना से मिलने वाली चुनौतियों पर चर्चा

करनाल। स्कूली शिक्षा की गुणवत्ता को सुधारने के लिए हरियाणा के सरकारी विद्यालयों को पब्लिक स्कूलों की तर्ज पर विकसित किया जाएगा। मनोहर लाल खट्टर की सरकार ने प्रदेश के एक हजार से ज्यादा सरकारी स्कूलों को संस्कृति मॉडल स्कूल बनाने का फैसला किया है। सरकारी स्कूलों को संस्कृति मॉडल स्कूलों में परिवर्तित करने के लिए गुणवत्ता के कड़े मानदंड निर्धारित किए गए हैं। इन स्कूलों में पारंपरिक कक्षाओं के साथ-साथ स्मार्ट क्लासरूम भी होंगे। एक कक्षा में अधिकतम 25 से 30 विद्यार्थी ही रखे जाएंगे और प्रत्येक 25 विद्यार्थी के लिए एक शिक्षक तैनात होगा। संस्कृति मॉडल स्कूलों को सीबीएसई से संबद्ध किया गया है और इनमें अंग्रेजी माध्यम में पढ़ाई होगी। इन मॉडल स्कूलों में बुनियादी संसाधन भी अत्याधुनिक एवं उन्नत किस्म के होंगे जिनके लिए बड़े-बड़े स्क्रीन वाले एलईडी मॉनिटर खरीदे गए हैं।

रेडियो ग्रामोदय के वेकअप करनाल कार्यक्रम के दौरान कोरोना से स्कूली शिक्षा को मिलने वाली चुनौतियों पर हरियाणा ग्रंथ अकादमी के उपाध्यक्ष डॉ. वीरेंद्र सिंह चौहान और राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित शिक्षक मनोज कुमार लाकड़ा के बीच चर्चा के दौरान यह जानकारी उभरकर सामने आई। डॉ. चौहान ने कहा कि कोरोना महामारी ने सामाजिक आचार-व्यवहार से लेकर व्यक्तिगत जीवन शैली तक जीवन के लगभग हर पक्ष को प्रभावित कर दिया है। इससे न सिर्फ मिलने-जुलने का तरीका बदला है, बल्कि पठन-पाठन की व्यवस्था भी बदल गई है। महामारी ने शिक्षा जगत के सामने नई चुनौतियां पेश की हैं। मनोज लाकड़ा ने भी कहा कि कोरोना से शिक्षा का पूरा परिदृश्य ही बदल गया है। शिक्षण व्यवस्था अब तकनीक पर निर्भर हो गई है। बच्चे अब दिनभर कंप्यूटर और मोबाइल के सामने बैठे रहते हैं। पढ़ाई ऑनलाइन होने लगी है। यह बदलाव जरूरी और अपेक्षित भी था, हालांकि इसके कुछ स्याह पक्ष भी हैं।

मनोज ने बताया कि स्मार्ट क्लास के तहत आठवीं से 12वीं तक के विद्यार्थियों को टेबलेट देने की योजना है जिनमें पाठ्यक्रम (करिकुलम) डाला जाएगा। उन टेबलेट की खरीद हो चुकी है और उनमें सॉफ्टवेयर डालने का काम अभी बाकी है। बच्चों को एक आईडी और पासवर्ड दिया जाएगा जिसके माध्यम से उन्हें होमवर्क दिया जाएगा और उनके काम का मूल्यांकन भी ऑनलाइन ही होगा।

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दशम गुरु गोबिंद सिंह ने क्षत्रिय तेज को फिर से जगाया : डॉ. चौहान

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करनाल। खालसा पंथ की स्थापना करते हुए दशमेश पिता श्री गुरु गोविंद सिंह जी ने एक साथ कई सामाजिक रूढ़ियों पर आघात किया था। उनका मक़सद भारतीय समाज में कमज़ोर पड़ गए संघर्ष के सामर्थ्य अर्थात क्षात्र तेज़ को नए सिरे से प्रबल कर समाज को उस दौर के कट्टर और धर्मांध शासकों का मुक़ाबला करने में सक्षम बनाना था। हरियाणा ग्रंथ अकादमी के उपाध्यक्ष और निदेशक डॉ. वीरेंद्र सिंह चौहान ने भारतीय नूतन वर्ष व खालसा पंथ के स्थापना दिवस पर आयोजित कार्यक्रम में यह टिप्पणी की।

रेडियो ग्रामोदय के इस विशेष कार्यक्रम में अतिथियों व श्रोताओं से रूबरू डॉ. चौहान ने कहा कि खालसा बनने के लिए जो लोग आगे आए उसमें समाज की विभिन्न जातियों और देश के विभिन्न हिस्सों के लोग थे। हम यह कह सकते हैं कि ख़ालसा सजाने की प्रक्रिया में श्री गुरु गोबिंद सिंह ने सब को साथ लिया। गुरु नानक खालसा कॉलेज करनाल के प्राचार्य डॉ. मेजर सिंह और राजकीय महाविद्यालय अम्बाला कैंट में इतिहास के प्राध्यापक डॉ. अतुल यादव ने इस कार्यक्रम में बतौर विशेषज्ञ खालसा पंथ की स्थापना और जलियांवाला बाग़ नरसंहार के समय की परिस्थितियों पर विस्तार से चर्चा की।

डॉ. मेजर सिंह ने कहा कि ख़ालसा का अर्थ है सब प्रकार से शुद्ध आचरण करने वाला व्यक्ति। उन्होंने कहा कि श्री गुरु गोबिंद सिंह जो अपने अनुयाइयों से करवाना चाहते थे उसे स्वयं करके अपने आचरण से सिद्ध करते थे। उन्होंने कहा कि गुरु गोबिंद सिंह अद्भुत शस्त्रधारी थे तो शास्त्र और साहित्य के निष्णात विद्वान भी थे। एक ही शख़्सियत के भीतर यह सारे गुण विरले ही मिला करते हैं।

बक़ौल डॉ. अतुल यादव जलियांवाला बाग़ में अंग्रेजों ने जिस जघन्य नरसंहार को अंजाम दिया उसने भारतीय स्वतंत्रता संग्राम की दिशा बदल डाली। अनेक युवा क्रांतिकारी इस घटना के बाद क्रांति की राह पर निकले और उन्होंने आज़ादी की लड़ाई में अहम भूमिका निभाई। उन्होंने कहा कि स्वाधीनता संग्राम में क्रांतिकारियों की भूमिका को कम करके नहीं आंका जा सकता।

पाठ्यक्रमों में भारतीय महापुरुषों की बलिदान गाथा शामिल हो

रेडियो ग्रामोदय के कार्यक्रम में शामिल तीनों शिक्षाशास्त्री इस बात पर सहमत थे कि हमारे स्कूल और कॉलेज के पाठ्यक्रमों में भारतीय महापुरुषों के संघर्ष और बलिदान के किस्से कायदे से नहीं पढ़ाए जा रहे। उन्होंने माना कि इस दृष्टि से पाठ्यक्रम में बदलाव समय की आवश्यकता है। हरियाणा ग्रंथ अकादमी उपाध्यक्ष डॉ. वीरेंद्र सिंह चौहान ने इस संबंध में कहा कि नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति शिक्षा और पाठ्यक्रम को भारत केंद्रित बनाने की वकालत करती है। पाठ्यक्रम में परिवर्तन का रास्ता इसी नीति परिवर्तन से निकलेगा और यह कार्य आने वाले कुछ वर्षों में देश के शैक्षिक नेतृत्व को संजीदगी और सावधानी के साथ करना पड़ेगा।

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केवल प्राचीनतम ही नहीं अपितु सबसे वैज्ञानिक राष्ट्र के नागरिक होने पर गर्व करें : डॉ. चौहान

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गीता सीनियर सेकेंडरी स्कूल, राहडा में गणतंत्र दिवस का आयोजन

असंध । गणतंत्र दिवस पर होने वाले प्रत्येक ध्वजारोहण प्रत्येक आयोजन प्रत्येक ताली प्रत्येक गीत पर सबसे पहला अधिकार बलिदानी वीरों का है जिन्होंने अपना सर्वस्व इस देश पर न्योछावर कर दिया। राणा स्थित गीता सीनियर सेकेंडरी स्कूल में गणतंत्र दिवस पर आयोजित कार्यक्रम में हरियाणा ग्रंथ अकादमी के उपाध्यक्ष डॉ वीरेंद्र सिंह चौहान ने यह टिप्पणी की।
विद्यालय चेयरमैन सुरेंद्र राणा की अध्यक्षता में संचालित कार्यक्रम में डॉ चौहान ने मातृभूमि पर न्योछावर सभी वीरों को श्रद्धांजलि दी। क्रांति के नायकों का स्मरण करते हुए डॉ चौहान ने सभी विद्यार्थियों व शिक्षकों से उनके अनुसरण का आवाहन किया।
विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए अकादमी उपाध्यक्ष ने कहा कि हमें इस बात पर गर्व करना चाहिए कि जब विश्व के अन्य देशों का राष्ट्र की परिकल्पना से परिचय भी नहीं था , उससे बहुत पहले से भारत एक राष्ट्र के रूप में अस्तित्व में था। विश्व के विभिन्न स्थानों से लोग ज्ञान प्राप्ति व चरित्र निर्माण हेतु भारत के तक्षशिला और नालंदा स्थित विश्वविद्यालय में आते थे।
उन्होंने बताया कि विश्व में हुए अनेक वर्तमान शोध प्रक्रिया ने वृहद स्तर पर सिद्ध किया है कि भारतीय मनीषी पृथ्वी के आकार, सूर्य से उसकी दूरी व अन्य विभिन्न खगोलीय घटनाओं तथा गणनाओं के बारे में पहले से जानते थे। भाषा से जुड़े विभिन्न शोध संस्कृत को विश्व की सबसे अधिक वैज्ञानिक और कंप्यूटर के अनुकूल भाषा के रूप में प्रतिपादित कर चुके हैं।

कार्यक्रम में विद्यार्थी अमृता, मुस्कान, स्नेहा, काजल, अंजली, नेहा, अनु और साहिल में रंगारंग प्रस्तुतियां दी। कार्यक्रम का संचालन शिक्षिका टीना ने किया।

कार्यक्रम के अंत में प्रबंधक रणदीप राणा ने सभी शिक्षकों व विद्यार्थियों का धन्यवाद किया। इस अवसर पर विद्यालय के शिक्षकों, विद्यार्थियों के साथ नीटू राणा, पंच सुरेंद्र व पंच संदीप उपस्थित थे।

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