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पानी, जमीन की सेहत और किसान की जेब सबका ध्यान रखती है बागवानी : डॉ चौहान

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रेडियो ग्रामोदय के जय हो कार्यक्रम में महाराणा प्रताप बागवानी विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. समर सिंह से विशेष बातचीत

करनाल । किसान की आय का निरंतर बढ़ना अत्यंत महत्वपूर्ण है । किसानी की लागत निरंतर बढ़ रही है, जिससे जोत का लाभ या प्रति एकड़ लाभ अपेक्षाकृत घट रहा है। यह चिंता का विषय है । बागवानी खेती से जुड़ा वह क्षेत्र है जिसमें अपार संभावनाएं मौजूद हैं। बागवानी न केवल भूमि की सेहत , पानी के स्तर आदि का ध्यान रखती है बल्कि किसान की जेब का भी पूरा पूरा ध्यान रखती है। यह तथ्य हरियाणा ग्रंथ अकादमी के उपाध्यक्ष और प्रदेश भाजपा प्रवक्ता डॉ. वीरेंद्र सिंह चौहान की रेडियो ग्रामोदय के जय हो कार्यक्रम में महाराणा प्रताप बागवानी विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. समर सिंह से हुई वार्ता में सामने आए।

विश्वविद्यालय और बागवानी से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर आधारित इस चर्चा में कुलपति डॉ. समर सिंह ने कहा कि हरियाणा में बागवानी विश्वविद्यालय की स्थापना मुख्यमंत्री मनोहर लाल व प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दूरगामी सोच का परिणाम है। चार क्षेत्रीय केंद्रों के माध्यम से महाराणा प्रताप बागवानी विश्वविद्यालय प्रदेश के सभी किसानों तक बागवानी के लाभ व शिक्षा को पहुंचाने के लिए तत्पर है। पाठ्यक्रम कक्षाओं और इंफ्रास्ट्रक्चर के बारे में डॉ. समर ने बताया कि विश्वविद्यालय कैंपस और विभिन्न क्षेत्रीय केंद्रों के कैंपस की बाउंड्री और पोली हाउस का कार्य लगभग पूरा हो चुका है। एमएससी हॉर्टिकल्चर और पीएचडी की कक्षाएं हिसार कृषि विश्वविद्यालय में चल रही हैं तथा पिछले सत्र से 4 वर्ष का बीएससी हॉर्टिकल्चर कार्यक्रम नीलोखेड़ी में प्रारंभ हो चुका है। जैसे ही विश्वविद्यालय कैंपस में चल रहे निर्माण कार्य पूरे होते जाएंगे यहां पर भी सभी चीजें प्रारंभ हो जाएंगी।

ड्रिप सिंचाई से जुड़े एक प्रश्न के उत्तर में डॉक्टर ने कहा की ड्रिप सिंचाई से ना केवल पानी का बचाव होता है बल्कि फसल की पैदावार और गुणवत्ता में भी 10 से 15% की वृद्धि होती है। किसानों को हर संभव प्रयास कर ड्रिप सिंचाई का लाभ उठाना चाहिए । ड्रिप सिंचाई पर हरियाणा सरकार द्वारा 80% सब्सिडी भी प्रदान की जाती है।

अकादमी उपाध्यक्ष डॉ वीरेंद्र सिंह चौहान द्वारा पानी के गिरते स्तर से जुड़े एक सवाल के उत्तर में डॉक्टर ने कहा की है अत्यंत चिंता का विषय है हमें ध्यान रखना होगा कि हर साल पानी का स्तर 1 लीटर नीचे जा रहा है। ऐसा ही जारी रहा तो सोचिए कि हम अपनी आने वाली पीढ़ी को क्या देंगे? जैसा बढ़िया पानी बहुतायत में हमने अपने बाप दादों से लिया था उसको बर्बाद कर हम आने वाली पीढ़ी के लिए पता नहीं कितनी विषम परिस्थितियों का निर्माण करेंगे? उन्होंने जल गिरते जल स्तर के साथ-साथ जमीन की बिगड़ती सेहत पर भी चिंता व्यक्त की ।

जैविक पदार्थ स्तर या ऑर्गेनिक मैटर या आम भाषा में जमीन का स्वास्थ्य फसल के अवशेष जलाने , यूरिया का बहुत जादा उपयोग करने और लगातार अनेकों वर्षों तक एक ही फसल को उगाते रहने से लगभग 4 गुणा कम हो गया है। इस संबंध में प्रशिक्षण और जागरूकता कार्यक्रमों की बहुत तेजी से आवश्यकता है। किसान को पानी की कमी और ऑर्गेनिक मैटर की बिगड़ती स्थिति को समझना होगा और इसके अनुसार ही फसल चक्र को अपनाना होगा। बागवानी को अपनाना इन समस्याओं के समाधान का एक बेहतरीन विकल्प है।

रोहतक निवासी प्रवीण धनखड़ की बागवानी संबंधी एक समस्या के उत्तर में डॉ. समर ने कहां की बागवानी के संबंध में सही निर्णय लेने के लिए सबसे ज्यादा मिट्टी की जांचआवश्यक है। बाग के लिए 2 या 3 मीटर तक की मिट्टी की जांच करानी आवश्यक है जबकि अन्य फसलों के लिए 15 सेंटीमीटर तक की मिट्टी की जांच कराई जानी चाहिए। मिट्टी की जांच के लिए किसान रोहतक , हिसार या करनाल में स्थित लैबोरेट्रीज जा सकता है और अब तो किसान के पास मोबाइल वैन का विकल्प भी मौजूद है।

पाठ्यक्रम से जुड़े पिंजौर के आशुतोष के प्रश्न के उत्तर में डॉक्टर समर ने बताया अति शीघ्र ही गैर साइंस विद्यार्थी अर्थात आर्ट्स और कॉमर्स के विद्यार्थियों के लिए भी डिप्लोमा कोर्स प्रारंभ किए जाएंगे। हरियाणा से बाहर के विद्यार्थियों के लिए भी कुछ सीटों की व्यवस्था है जिन पर टेस्ट के माध्यम से विद्यार्थी प्रवेश पा सकते हैं।

डॉ. वीरेंद्र सिंह चौहान के बागवानी में लोगों के रुझान और सफलता को लेकर पूछे गए सवाल के जवाब में डॉ. समर ने कहा कि करनाल और अंबाला से जुड़े क्षेत्र बागवानी के लिए अत्यंत उत्तम हैं । करनाल की जमीन अमरूद, आम , लीची और रसीले फलों के लिए अत्यंत उपयुक्त है। किसान बागवानी में आ रहे हैं और सफल भी हो रहे हैं । इस क्रम में उन्होंने जैनपुरा गांव के किसान साहिब सिंह और गोंदर के किसान केहर सिंह के एप्पल बेर के बाग का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि बागवानी का मन बनाने वाले किसान इन किसानों से मिल सकते हैं और घरौंडा व श्यामगढ़ में हरियाणा सरकार के बागवानी सेंटर में भी जा कर बागवानी तकनीकों को देख सकते हैं।

बागवानी के क्षेत्र के बारे में विस्तार से बताते हुए डॉ. समर ने कहा कि सभी फलदार पौधे , सभी सब्जियां, सभी चिकित्सीय पौधे, सभी प्रकार के फूलों की खेती, सजावट के पौधों की खेती, मशरूम तथा शहद की खेती भी बागवानी में शामिल है। उचित प्रशिक्षण प्राप्त कर बागवानी करने वाले एक किसान कि आय परंपरागत रूप से खाद्यान्नों की खेती करने वाले किसान की तुलना में अधिक होती है। इससे भी आगे अगर कोई किसान पढ़ा लिखा है तो अत्यंत आधुनिक तकनीक हाइड्रोगेमी और एरोगेमी का प्रशिक्षण ले सकता है। इसमें सीधे पानी और हवा के माध्यम से ही पौधे को पोषक तत्व दिए जाते हैं। खेती की इन नवीनतम तकनीकों का प्रयोग कर वह 10 गुना ज्यादा तक प्रोडक्शन प्राप्त कर सकता है । दोनों तकनीकों में पौधों में बीमारी बहुत कम होती है। प्रारंभिक स्तर पर तो ऐसा लगता है कि बहुत अधिक लागत लग रही है किंतु उत्पादन को देखते हुए निवेश तुलनात्मक रूप से ज्यादा नहीं होता। डॉ. समर ने कहा कि महाराणा प्रताप बगवानी विश्वविद्यालय इन अत्यंत आधुनिकतम तकनीकों से जुड़े शोध में विशेष ध्यान दे रहा है।

डॉ. चौहान द्वारा प्रोट्रैक्टेड फार्मिंग से जुड़े किसानों के बुरे अनुभव के बारे में पूछने पर डॉक्टर समर ने कहा की प्रोटेक्टिड फार्मिंग में वैज्ञानिक तकनीकों व उपकरणों के माध्यम से वातावरण के तापमान, नमी और अन्य कारकों को नियंत्रित कर खेती की जाती है। यह खेती सब्जियों और छोटे पौधों के लिए सर्वोत्तम है। इसके लिए पर्याप्त प्रशिक्षण और जानकारी की आवश्यकता है। पूरी जानकारी के बिना मात्र सब्सिडी का लाभ उठाने के उद्देश्य से अनेक किसानों ने बिना मिट्टी की जांच किए ढांचे खड़े किए और बाद में पता चला कि जमीन में सूत्र कृमि की समस्या है जिससे वह प्रोटेक्टेड फॉर्मिंग का लाभ पूरी तरीके से नहीं उठा पाए। वर्तमान में कांच का हाउस तैयार करने की बजाए सस्ते नेट हाउस का विकल्प भी मौजूद है।

आंगन में बगिया बनाने वाले पनोधी, घरौंडा के किसान ओमपाल के कलम से फल के पौधे बनाने की तकनीक से जुड़े प्रश्न के उत्तर में डॉक्टर समर ने कहा की महाराणा प्रताप बागवानी विश्वविद्यालय में ही शीघ्र ही एक प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया जाएगा।

आगामी 5 वर्षों में बागवानी विश्वविद्यालय के माध्यम से किस प्रकार का परिवर्तन होगा इस पर प्रकाश डालते हुए डॉक्टर समर ने कहा फिर निश्चित रूप से बागवानी का एरिया जो अभी सवा 500000 एकड़ है वह 900000 एकड़ हो जाएगा इसके साथ साथ विश्वविद्यालय उच्च क्वालिटी की नर्सरी बीज और हाइब्रिड पौधों आधी आधी की व्यवस्था भी करेगी तथा बागवानी से संबंधित विभिन्न तकनीकों को लेकर युवाओं को प्रशिक्षण प्रदान करने पर विशेष जोर रहेगा। विश्वविद्यालय विशेष रूप से साप्ताहिक, पाक्षिक और मासिक प्रशिक्षण कार्यक्रमों पर फोकस करेगा जिससे रिसर्च किसानों तक पहुंच सके और किसान ज्यादा जागरूक और प्रशिक्षित होकर पानी और जमीन की सेहत बिगाड़े बिना अधिक से अधिक लाभ कमाए।

वार्ता में ऑनलाइन माध्यम से मुकेश अग्रवाल, नरेंद्र गोंदर, अंकुश और तरसेम राणा ने भी वृक्षारोपण को ले अपने विचार व्यक्त किए।

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परिवार और समाज की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए सभी टीकाकरण के लिए आगे आएं

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कोरोना की महामारी को मात देने के लिए आवश्यक है कि 18 साल से ऊपर के प्रत्येक नागरिक का टीकाकरण हो। जो लोग किसी भ्रम अथवा भय के कारण पात्र होते हुए भी अब तक टीका लगवाने से रह गए हैं, उन्हें न केवल अपनी अपितु अपने परिवार और समाज की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए भी टीकाकरण के लिए आगे आना चाहिए। रेडियो ग्रामोदय के संस्थापक और हरियाणा ग्रंथ अकादमी के उपाध्यक्ष डॉ. वीरेंद्र सिंह चौहान ने रेडियो ग्रामोदय और यूनिसेफ द्वारा टीकाकरण जागरूकता के लिए चलाए जा रहे अभियान के अंतर्गत गोंदर के रणजीत नगर स्थित कॉलोनी में ग्राम वासियों को संबोधित करते हुए यह बात कही।

भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता डॉ. वीरेंद्र सिंह चौहान ने कहा कि भारत में कोरोना के टीके को लेकर कुछ लोग निहित स्वार्थ के कारण तमाम तरह की भ्रांतियां फैला रहे हैं किंतु ऐसे तत्वों की साजिशों को कामयाब होने नहीं दिया जाएगा। इस अवसर पर उन्होंने टीका लगवा चुके ग्रामवासियों से कोरोना के टीके को लेकर उनके अनुभव विस्तार से सुने। जो लोग टीका लगवा चुके उन्होंने टीका क्या सोचकर लगवाया है और टीका लगवाने के बाद किस का अनुभव कैसा रहा, कार्यक्रम में इस विषय पर विस्तार से चर्चा हुई। इसके साथ साथ जिन्होंने अब तक टीका नहीं लगाया है उन्होंने इस कार्यक्रम में टीका ना लगवाने की अपनी-अपनी वजह भी अभिव्यक्त की।

डॉ. चौहान ने कहा कि टीका लगने के बाद कुछ लोगों को हल्का फुल्का बुखार आता है जो सामान्य और स्वाभाविक बात है। उन्होंने कहा कि कोरोना से पहले अलग-अलग बीमा से बचाव के जोडी के स्वाभाविक रूप से हम सब अपने बच्चों को लगवादे रहे हैं, उनके मामले में भी इस तरह के लक्षण आते रहे है। डॉ. वीरेंद्र सिंह चौहान ने कहा कि भारत में उपलब्ध 3 कोरोना टीके अलग-अलग प्रक्रिया से अलग-अलग निर्माता कंपनियों ने बनाए हैं इसलिए उनके काम करने के तरीके भिन्न भिन्न है। कोवीशील्ड और कोवैक्सीन के दो टीके लगवाने पड़ते हैं। दोनों वैक्सीन के मामले में दो टीमों के बीच की अवधि अलग-अलग है। इनके विपरीत रूस से मंगाया गया स्पूतनिक टीका एक ही बार लगता है।

ग्रामवासियों को डॉ. वीरेंद्र सिंह चौहान ने स्पष्ट बताया की कोविड के टीकाकरण का सारा कार्य अब केंद्र सरकार द्वारा नियंत्रित व संचालित किया जा रहा है। सरकारी टीकाकरण केंद्रों पर टीका लगवाने के लिए किसी भी नागरिक को एक भी पैसा खर्च करने की आवश्यकता नहीं है। उन्होंने कहा कि देशभर में टीकाकरण अभियान दिनों दिन तेजी पकड़ रहा है। उन्होंने कहा टीकाकरण को लेकर यदि ग्रामवासियों के मनों में कोई संदेह अथवा सवाल हैं तो वे रेडियो ग्रामोदय की हेल्पलाइन 8816904904 पर कॉल कर सलाह ले सकते हैं। डॉ. चौहान ने कोरोना संबंधी जागरूकता और विशेषकर टीकाकरण के कार्यक्रम में मदद के लिए आगे आने वाले सामाजिक संगठनों प्रशंसा की और कहा कि समाज और देश पर जब-जब कोई आपदा आए तो सब लोगों को परस्पर मतभेदों को भुलाकर एकजुटता के साथ कार्य करना चाहिए।

इस अवसर पर भाजपा नेता वेद तनेजा, सुभाष कुमार, राम निवास, सुखबीर, नाथीराम, सतपाल, धरमपाल, वीरभान, बागड़ी, राजेश, जीतराम, शिव कुमार, काला, अंग्रेज, संजीव, नरेश, अशोक, भूरा व अन्य ग्रामीण उपस्थित रहे ।

शराब का सेवन कोरोना से नहीं बचाता

कार्यक्रम के दौरान एक श्रमिक ने कहा कि उसने कोरोना का टीका लगवाना इसलिए जरूरी नहीं समझा क्योंकि वह हर रोज शराब पी लेता है और उसकी मान्यता है कि शराब के सेवन से कोरोना का वायरस मर जाता है। श्रमिक का कहना था कि जब सैनिटाइजर में मौजूद शराब से वायरस मर जाता है शराब के सेवन से कोरोना से बचाव होना चाहिए।बहुत गंभीरता के साथ की गई ग्रामवासी की इस टिप्पणी पर कार्यक्रम में उपस्थित अधिकांश लोग खुलकर हंसे। डॉ. वीरेंद्र सिंह चौहान ने कहा कि शराब पीने वाले को कोरोना नहीं होगा, यह एक खतरनाक भ्रांति और मूर्खतापूर्ण सोच है। विश्व स्वास्थ्य संगठन और भारत के स्वास्थ्य मंत्रालय के विशेषज्ञ बारंबार इस बारे में स्पष्ट कर चुके हैं कि मदिरापान कोरोना से बचाव का कवच नहीं। डॉ. चौहान ने कहा कि शराब पीना वैसे भी सेहत के लिए घातक है और कोरोना से बचाव का मदिरापान से कोई संबंध नही।

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हिंसा किसी डॉक्टरी चूक का समाधान नहीं : डॉ चौहान

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रेडियो ग्रामोदय के कार्यक्रम जय हो में राष्ट्रीय चिकित्सक दिवस पर चिकित्सकों की समस्याओं पर चर्चा

करनाल। हर पेशे में कुछ खराब लोग हो सकते हैं। मेडिकल प्रोफेशन इससे अछूता नहीं है। कोई भी डॉक्टर अपने मरीज का नुकसान नहीं चाहता। मानवीय चूक उनसे भी संभव है, लेकिन हिंसा किसी डॉक्टरी चूक का समाधान नहीं है। डॉक्टर अपने मरीज को ठीक कर ही देगा, चिकित्सकों से ऐसे चमत्कार की उम्मीद नहीं करनी चाहिए। यह विचार हरियाणा ग्रंथ अकादमी के उपाध्यक्ष एवं भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता डॉ. वीरेंद्र सिंह चौहान ने रेडियो ग्रामोदय पर ‘जय हो’ कार्यक्रम में प्रसिद्ध बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. संदीप अब्रोल, वरिष्ठ नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. राजेंद्र चौहान और करनाल स्थित कल्पना चावला मेडिकल कॉलेज के वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. राजेश गर्ग के साथ चर्चा के दौरान व्यक्त किए। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि नियति मनुष्य को जिस रास्ते पर लेकर आ जाती है, वह अन्य रास्ते कभी बंद नहीं करती। डॉ. बिधान चंद्र रॉय भारतीय उपमहाद्वीप के एक ख्याति प्राप्त दुर्लभ चिकित्सक होने के साथ-साथ एक शानदार राजनेता भी थे। वह 14 वर्षों तक बंगाल के मुख्यमंत्री के पद पर रहे।

डॉ चौहान ने बताया कि डॉ. बी सी राय की जन्म एवं पुण्यतिथि दोनों 1 जुलाई ही है। बिहार में जन्मे डॉ. बी सी राय दो बार पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री बने। उन्हें कोलकाता का मेयर बनने का भी अवसर प्राप्त हुआ था। डॉ. रॉय एशियाई महाद्वीप के पहले मेडिकल कंसलटेंट थे।

डॉ.चौहान ने डॉ. संदीप अबरोल और डॉ. राजेश गर्ग से पूछा कि करोना काल में चिकित्सकों को किन- किन परेशानियों का सामना करना पड़ा? इस पर दोनों चिकित्सकों ने बताया कि कोरोना काल में उन्हें काफी कठिन चुनौतियों का सामना करना पड़ा। डॉ. अबरोल ने बताया कि 22 साल के करियर में इतना कठिन समय कभी देखने को नहीं मिला था। शुरू में अस्पताल में ऑक्सीजन की बहुत कमी थी, लेकिन 1 हफ्ते के अंदर ऑक्सीजन की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित कर दी गई।

आज चिकित्सक बनना कितना सरल है? डॉ चौहान के इस सवाल पर डॉ राजेश गर्ग ने कहा कि एक डॉक्टर की डिग्री लेना आज अत्यंत कठिन कार्य हो गया है। सरकारी और प्राइवेट संस्थानों में मेडिकल की पढ़ाई के खर्च में आसमान जमीन का अंतर है। सरकारी मेडिकल कॉलेजों में जहां इसकी पढ़ाई में प्रतिवर्ष 40 से ₹50000 खर्च करने पड़ते हैं, वही प्राइवेट मेडिकल कॉलेजों में इसकी पढ़ाई का खर्च प्रतिवर्ष 13 से 15 लाख रुपये तक है। पूरे एमबीबीएस कोर्स की पढ़ाई का खर्च 70 से 80 लाख रुपये के बीच बैठता है। यह आम लोगों की पहुंच से बाहर है। उन्होंने कहा कि यूपीएससी की तर्ज पर इंडियन मेडिकल सर्विसेज बनाने की मांग वर्ष 1966-67 से ही हो रही है।

डॉ. संदीप अबरोल ने कहा कि डॉक्टरी के पेशे में वह स्वेच्छा से आए। मरीजों को स्वस्थ होते देखकर लगता है कि उनकी मेहनत सफल हुई। यह उन्हें बहुत खुशी प्रदान करता है। उन्होंने कहा कि उनका डॉक्टरी का सफर काफी कठिन रहा और कई बार असफलताएं भी हाथ लगी।

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तालाबों, जोहड़ों का हो संरक्षण, अतिक्रमण खाली कराएं : डॉ. चौहान

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रेडियो ग्रामोदय के कार्यक्रम ‘म्हारे गाम की बात’ में गांव अरडाना पर चर्चा

असंध। हरियाणा सरकार गावों के सर्वांगीण विकास के लिए कृतसंकल्प है। तालाब – जोहड से लेकर गांव के स्कूलों तक — हर क्षेत्र में स्थिति को बेहतर बनाने के लिए सरकार की ओर से कई योजनाएं शुरू की गई हैं। तालाबों, जलाशयों को बचाने और उनके संरक्षण के लिए सरकार पहले ही तालाब प्राधिकरण का गठन कर चुकी है। इसके अलावा सरकार स्कूलों के अपग्रेडेशन पर भी ध्यान दे रही है। अपग्रेडेशन के लिए निर्धारित न्यूनतम मानकों को पूरा करने वाले स्कूलों को अपग्रेड कर उन्हें प्लस-टू तक किया जा रहा है।

यह जानकारी हरियाणा ग्रंथ अकादमी के उपाध्यक्ष एवं निदेशक डॉ. वीरेंद्र सिंह चौहान ने रेडियो ग्रामोदय के कार्यक्रम ‘म्हारे गाम की बात’ में गांव अरडाना पर चर्चा के दौरान दी। उन्होंने कहा कि पानी की व्यवस्था करना सरकार की पहली प्राथमिकता है। इसके लिए ‘मेरा पानी मेरी विरासत’ योजना शुरू की गई है। सुप्रीम कोर्ट का स्पष्ट निर्देश है कि जलाशयों की जमीन पर कब्जा नहीं किया जा सकता। तालाबों से अतिक्रमण हटाना ही होगा। तालाब बचेंगे, तभी गांव बचेगा। डॉ. चौहान ने कहा कि जो तालाब और जोहड गंदगी के स्रोत हैं। जिनमें गाद और कचरा भरा पड़ा है। उन्हें साफ कराना होगा।

चर्चा में जुड़े गांव अरडाना के सामाजिक कार्यकर्ता सुरेंद्र राणा ने बताया कि गांव में पानी की समस्या पहले अत्यंत गंभीर थी। इस समस्या को लेकर वह विभाग के एक्सईएन और एसपी से भी मिले थे। इसके बाद पेयजल की समस्या तो दूर हुई, लेकिन सिंचाई की समस्या अब भी बाकी है। गांव का परिचय देते हुए सुरेंद्र ने बताया कि गांव में करीब 5200 वोट हैं। इनमें करीब 1400 ब्राह्मण और 1200 राजपूत जाति के लोग भी शामिल हैं। गांव की कुल आबादी अब नौ हजार के करीब अनुमानित है। 2011 की जनगणना के अनुसार गांव की आबादी सात हजार के करीब थी। खूबी साबा, बल्लो पट्टी और मुसलमान पट्टी नाम से गांव में तीन पट्टियां हैं। इस गांव में अब मात्र एक मुस्लिम घर बचा है।

जमीन के मामले में गांव में सबसे संपन्न व्यक्ति कौन है? डॉ. चौहान के इस सवाल पर सुरेंद्र राणा ने बताया कि सुरेंद्र राजपूत के पास गांव में सबसे ज्यादा 120 किले जमीन है। सरकारी नौकरियों के मामले में गांव की स्थिति का जायजा लेते हुए डॉ. चौहान ने पूछा कि गांव में आज तक सबसे ऊंचा पद हासिल करने में कितने लोग कामयाब रहे? इस पर गांव में अटल सेवा केंद्र संचालित करने वाले शुभम राणा ने बताया कि आज की तारीख में गांव में सबसे ऊंची नौकरी हासिल करने का श्रेय चंद्रिका अत्री को है। वह आईएएस के पद पर कार्यरत है। उससे पहले ओ. पी. राणा को तहसीलदार बनने का अवसर प्राप्त हुआ था जो 5 साल पहले सेवानिवृत्त हो चुके हैं।

डॉ. चौहान ने पूछा कि गांव अरडाना में गौशालाओं का क्या हाल है? इस पर सुरेंद्र राणा ने बताया कि गांव में एक बड़ी गौशाला है जिसमें करीब 350 गोवंश हैं। इस गौशाला का संचालन नरेंद्र राणा और जगतराम मिलकर कर रहे हैं। उनके अलावा इस गौशाला के रखरखाव में गांव के अन्य लोगों का भी पूरा सहयोग मिल रहा है।

इस अवसर पर डॉ. चौहान ने बताया कि प्रदेश की मनोहर लाल सरकार गौशालाओं के रखरखाव के लिए अनुदान के तौर पर हर साल एक न्यूनतम राशि देती है। इसके अलावा सरकार प्रदेश के हर गांव में एक पुस्तकालय खोलने का भी प्रयास कर रही है। कांचवा में बिजली वितरण निगम की ओर से एक पुस्तकालय भवन का निर्माण कराया गया है। गांव गोंदर में भी एक पुस्तकालय बनने जा रहा है। पुस्तकालयों की सार्थकता तभी है जब गांव के लोग उससे जुड़ पाएं। उन्होंने कहा कि गांव में पुस्तकालय खोलने के लिए 21 लोगों की एक कमेटी बनाई जाए और चंदे की एक न्यूनतम राशि भी तय होनी चाहिए। विकास के इस कार्य में हरियाणा ग्रंथ अकादमी भी अपने योगदान के तौर पर 400 पुस्तकें मुफ्त देगी।

शुभम राणा ने बताया कि गांव में जलाशयों के तौर पर 5 तालाब और दो-तीन जोहड मौजूद हैं, लेकिन गांव में असंध से जाने वाली सड़क की हालत खराब है। उस पर दो-दो फीट के गड्ढे बने हुए हैं। सुरेंद्र राणा ने गांव के स्कूल को अपग्रेड करने का मुद्दा उठाते हुए कहा कि करीब 300 बच्चों वाले गांव के स्कूल को अपग्रेड करने और गांव में एक आईटीआई खोलने की भी जरूरत है। उन्होंने कहा कि गांव की पंचायत के पास 30 एकड़ जमीन होने के बावजूद गांव में कोई व्यायामशाला नहीं बन पाई है। इस पर डॉ. चौहान ने बताया कि हरियाणा के एक विधानसभा क्षेत्र में कम से कम दस व्यायामशालाओं के निर्माण का प्रावधान किया गया है। प्रदेश के ग्रामीण अंचल में पहले चरण के दौरान करीब 1000 व्यायामशालाओं का निर्माण होना है। इनमें से करीब 500 व्यायामशालाओं का निर्माण पूरा हो चुका है।

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रेडियो ग्रामोदय व यूनिसेफ द्वारा वैक्सीनेशन जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन

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अफवाहों से बचें, संदेह दूर करें और वैक्सीनेशन लगवाएं : डॉ चौहान

निसिंग। दो गज दूरी, मास्क और सैनिटाइजेशन के साथ कोविड रोधी वैक्सीन लगवा कर स्वयं को कोविड के विरुद्ध चल रहे इस महासमर में ज्यादा मजबूत बनाएं। विश्व स्तर पर हुए अध्ययन स्पष्ट रूप से बता रहे हैं कि वैक्सीन लगवाना कोविड की रोकथाम में अत्यंत कारगर सिद्ध हुआ है । कोरोना के विस्तार को रोकने में सैनिटाइजेशन , मास्क, दो गज दूरी और वैक्सीनेशन अत्यंत कारगर सिद्ध हुए हैं । रेडियो ग्रामोदय और यूनिसेफ के संयुक्त तत्वावधान में ग्रामोदय भवन, गोंदर में आयोजित कोविड रोधी जागरूकता कार्यक्रम के दौरान ग्रंथ अकादमी उपाध्यक्ष और प्रदेश भाजपा प्रवक्ता डॉ. वीरेंद्र सिंह चौहान ने यह टिप्पणी की।

कार्यक्रम में कोविड प्रोटोकॉल के अनुरूप मास्क और दूरी का अनुपालन करते हुए उपस्थित ग्रामीणों व गणमान्य व्यक्तियों को रेडियो ग्रामोदय की ओर से वैक्सीनेशन तथा कोविड रोधी विभिन्न उपायों के प्रति जानकारी प्रदान की गई। रेडियो ग्रामोदय के अधिकारियों ने ग्रामीणों द्वारा पूछे गए विभिन्न प्रश्नों का सरकार व यूनिसेफ द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के अनुरूप उत्तर दिया और सभी का आह्वान किया कि बिना किसी संदेह के वैक्सीन अवश्य लगवाएं। वैक्सीनेशन को लेकर मन में कोई संदेह ना पालें तथा एक जागरूक नागरिक की तरह कोविड रोधी प्रोटोकॉल का अनुपालन करें।

रेडियो ग्रामोदय के संयोजक शिवम राणा के ‘जागरूक हम, तो कोरोना खत्म’ के उद्घोष से कार्यक्रम संपन्न हुआ। इस अवसर पर हिसम सिंह, पोखर त्यागी, विशाल त्यागी, नानक, अशोक, राजकुमार, आयुष, अमन, दीपक, दीपेंद्र, संगम व अन्य ग्रामवासी मौजूद रहे।

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योग प्राचीनतम भारतीय विद्या : डॉ. चौहान

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असंध के नगरपालिका पार्क में चलने वाली महिला योग कक्षा में योगाभ्यासियों एवं योग शिक्षकों को संबोधन

असंध। योग प्राचीनतम भारतीय विद्या है जो पूर्णत: शरीर विज्ञान पर आधारित है। शरीर का सिर्फ व्याधियों से मुक्त होना ही संपूर्ण स्वास्थ्य नहीं है। शरीर के साथ-साथ मन-मस्तिष्क और आत्मा का भी स्वस्थ होना उतना ही जरूरी है। इन तीनों के स्वस्थ हुए बिना मनुष्य को पूर्णत: स्वस्थ नहीं कहा जा सकता। जीवन का यह गूढ़ ज्ञान हमारे ऋषि-मुनियों ने हजारों साल पहले दे दिया था। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने इसे अब जाकर माना है। भारतीय संस्कृति एवं जीवन दर्शन में छिपे ज्ञान के अनमोल भंडार को हमें फिर से ढूंढ कर उस पर अमल करना होगा। उपरोक्त विचार हरियाणा ग्रंथ अकादमी के उपाध्यक्ष एवं भाजपा प्रदेश प्रवक्ता डॉ. वीरेंद्र सिंह चौहान ने व्यक्त किए। वह असंध की पतंजलि योग समिति द्वारा नगरपालिका पार्क में चलाई जा रही महिला योग कक्षा के योगाभ्यासियों एवं योग शिक्षकों को संबोधित कर रहे थे।

डॉ. चौहान ने कहा कि आधुनिकता की होड़ और पाश्चात्य संस्कृति के अंधानुकरण में हम अपनी अनमोल प्राचीन भारतीय विद्या एवं सांस्कृतिक विरासत को भूल बैठे थे। राजनीति की संकीर्ण सोच ने भी प्राचीन भारतीय विद्या का निरादर करने में कोई कसर नहीं छोड़ी। लेकिन ऐसे माहौल में भी योग गुरु बाबा रामदेव जैसे लोग मौजूद हैं जिन्होंने लुप्त होती जा रही भारतीय विरासत को पुनर्जीवित कर योग को घर-घर और विश्व भर में पहुंचाया। योग को वैश्विक पहचान दिलाने में बाबा रामदेव का योगदान कभी भुलाया नहीं जा सकता।

ग्रंथ अकादमी उपाध्यक्ष डॉ. वीरेंद्र सिंह चौहान ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी योग को वैश्विक पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उन्होंने अपनी करिश्माई नेतृत्व क्षमता से पूरे विश्व को योग की परिधि में लाने का काम किया है। यह भारत की नए अंदाज की राजनीति की वैश्विक स्वीकार्यता का प्रतीक है कि संयुक्त राष्ट्र संघ के अधिकांश देश अब हर साल योग दिवस मनाते हैं । उन्होंने कहा की योग के नियमित अभ्यासी सिर्फ शारीरिक स्वास्थ्य को ही बढ़ावा नहीं दे रहे, बल्कि वह विभिन्न बीमारियों पर हर साल होने वाले अरबों रुपए के खर्च को भी बचा रहे हैं। कोरोना काल में योग के गुणकारी तत्वों को सबने देखा और महसूस किया है। इसकी महत्ता का अंदाजा इस बात से भी लगाया जा सकता है कि योग अब आधुनिक चिकित्सा पद्धति में भी शामिल होता जा रहा है। इस अवसर पर डॉ. चौहान ने महिलाओं के लिए योग कक्षा के संचालन के लिए पतंजलि योग समिति का आभार व्यक्त किया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता पतंजलि योग समिति की असंध इकाई के संरक्षक मायाराम शास्त्री एवं समिति के प्रभारी एडवोकेट नरेंद्र शर्मा ने की। इस अवसर पर महिला पतंजलि प्रभारी सुनीता गोयल, योग शिक्षिका किरण भी उपस्थित रहे ।

भारतीय कालगणना विश्व की प्राचीनतम कालगणना

डॉ. वीरेंद्र सिंह चौहान ने कहा कि भारतीय कालगणना संसार की सबसे प्राचीन वैज्ञानिक कालगणना है। कालगणना समेत भारतीय संस्कृति की अनेक ऐसी धरोहर हैं जो देश की मातृशक्ति की बदौलत आज भी जीवित हैं। डॉ. चौहान ने मातृशक्ति को नमन करते हुए उनका आह्वान किया कि वे भारतीय कालगणना पद्धति को कदापि ना भूलें। अपने घरों में देसी कैलेंडर अवश्य रखें और बच्चों के सामने देसी तिथियों की चर्चा अवश्य करें। आज के बच्चे ही कल के देश के कर्णधार हैं। उन्हें भारत की सांस्कृतिक विरासत से रूबरू कराना अत्यंत जरूरी है।

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प्रकृति से लेना ही नहीं देना भी सीखें : डॉ. चौहान

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सेवा ही संगठन कार्यक्रम के तहत पौधारोपण

बल्ला । प्रकृति का संरक्षण और संतुलित उपयोग का रास्ता ही मानव को अपनाना होगा । दोहन और उपभोग का रास्ता अंततः विभिन्न आपदाओं और महामारियों को ही आमंत्रित करता है । प्रकृति हमें निरंतर कुछ न कुछ प्रदान करती रहती है । वृक्षारोपण के माध्यम से हम भी प्राकृतिक संतुलन में अपना योगदान दें । हरियाणा ग्रन्थ अकादमी के उपाध्यक्ष और भाजपा प्रदेश प्रवक्ता डॉ. वीरेंद्र सिंह चौहान ने पार्टी के सेवा ही संगठन कार्यक्रम के तहत बल्ला मंड़ल के गाँव सालवन के काली माता मंदिर में पौधा रोपण करते हुए यह टिप्पणी की।

पार्टी के विभिन्न पदाधिकारियों के साथ मिलकर उन्होंने आह्वान किया कि प्रत्येक व्यक्ति को पौधारोपण के पुण्य कार्य में संलिप्त होना चाहिए । उन्होंने बताया कि पर्यावरण को शुद्ध रखने और हरियाली में वृद्धि के लिए भारतीय जनता पार्टी के प्रत्येक कार्यकर्ता को कम से कम एक पौधा अपने नाम से लगाने और उसका समुचित ढंग से पालन करने के लिए पार्टी नेतृत्व ने निर्देश दिया है।

इस अवसर पर पार्टी के विभिन्न पदाधिकारियों ने डॉ. वीरेंद्र सिंह चौहान को प्रदेश प्रवक्ता मनोनीत किये जाने पर माननीय मुख्यमंत्री मनोहर लाल और भाजपा प्रदेशाध्यक्ष ओ. पी. धनखड़ का आभार व्यक्त किया ।

इस अवसर पर मंडल अध्यक्ष संदीप सैनी गोल्ली, मंड़ल महामंत्री अमित राणा सालवन, किसान मोर्चा मंड़ल अध्यक्ष जय कुंवर राणा सालवन, बैकवर्ड मोर्चा अध्यक्ष जयभगवान जांगड़ा,मंड़ल सचिव जयमल पहलवान,शक्ति केंद्र प्रमुख नाथी राम, समाज सेवी जयबीर फ़ौजी सालवन , समाज सेवी गौरव राणा,समाज सेवी मास्टर जसबीर राणा, मंदिर महंत पवन व अन्य ग्रामीण मौजूद रहे।

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कबीर आज भी प्रासंगिक : डॉ. चौहान

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जयंती पर ग्रंथ अकादमी व रेडियो ग्रामोदय की ओर से दोहा पाठ का आयोजन

करनाल / पंचकुला । संत कबीर दास के कालखंड में विभिन्न सामाजिक विडंबनाएं मौजूद थीं। संत कबीर में अपनी रचनाओं के माध्यम से समकालीन सत्ता एवं व्यवस्थाओं को चुनौती देने का सामर्थ्य था और उन्होंने ऐसा ही किया। कबीर के कार्यों, चिंतन, व्यक्तित्व एवं उनकी रचनाओं में अध्यात्म की गहराई और ऊंचाई थी। उन्होंने निर्भीक होकर तत्कालीन सत्ताधीशों एवं शक्तिशाली वर्ग को चुनौती देने का काम किया। एक साहित्यकार से अपेक्षा भी यही होती है कि वह अपनी रचनाओं से सामाजिक विडंबनाओं एवं विकृतियों पर प्रहार करे। कवियों – साहित्यकारों पर अपने समाज को दिशा देने का भी दायित्व है। हर कवि के अंदर कबीर होने के तत्व मौजूद होते हैं। समाज को सचेत करने के लिए उस सामर्थ्य को जगाना होगा।

उपरोक्त विचार हरियाणा ग्रंथ अकादमी के उपाध्यक्ष डॉ वीरेंद्र सिंह चौहान ने संत कबीर दास की जयंती पर आयोजित दोहा पाठ के दौरान व्यक्त किए। उन्होंने इस आयोजन के सभी प्रतिभागियों को हरियाणा ग्रंथ अकादमी की ओर से आभार प्रकट करते हुए उनसे अपने-अपने दौर का कबीर बनने का आह्वान किया और कहा कि कबीर बनने पर कोई रोक नहीं है।

ग्रंथ अकादमी और रेडियो ग्रामोदय के संयुक्त तत्वावधान मैं आयोजित इस दोहा पाठ का संचालन कवियित्री नीलम त्रिखा ने किया। उन्होंने कार्यक्रम की कमान संभालते हुए अपने उद्बोधन में कहा कि कबीर दास एक बहुत बड़े समाज सुधारक और ईश्वर भक्त थे। उनके अंदर स्वाभिमान कूट- कूट कर भरा था। अपनी रचनाओं से उन्होंने मनुष्यों को सारे भेद मिटाकर मानव मात्र के लिए एकजुट हो जाने का संदेश दिया है। इस अवसर पर उन्होंने एक प्रेरक पंक्ति का भी उल्लेख किया — मात-पिता के हाथ ज्यूं, ज्यू बरगद की छांव
क्यों जन्नत को खोजता, जन्नत उनके पांव।

कार्यक्रम का शुभारम्भ श्री मद्भागवत गीता वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय के सातवीं कक्षा के छात्र यजुर कौशल के द्वारा संत कबीर के दोहों के सुमधुर सस्वर पाठ के साथ हुआ ।

दोहा पाठ की शुरुआत डॉ. अश्विनी शांडिल्य ने अपनी स्वरचित रचनाओं से की। उन्होंने गुरु की महिमा का वर्णन करते हुए कहा, —

अथाह समुद्र है ज्ञान का, माणिक छिपे अनेक
क्या है तेरे काम का, गुरु बतलाए एक।
गुरु प्रकाश स्तंभ है, पथ को करें प्रशस्त
ज्योति ज्ञान की जल उठे, अंधकार हो पस्त।

उनके बाद चंडीगढ़ से जुड़ी संगीता शर्मा ने अपने भावों को कुछ यूं व्यक्त किया, –

श्याम बजाए बांसुरी, मन का यह चितचोर
प्रेम लगन की धुन बजी, नाचे मन का मोर।

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वैकल्पिक फसलों की हो खेती : डॉ. चौहान

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वेक अप करनाल में ग्राउंड वाटर संरक्षण पर चर्चा

करनाल। पृथ्वी पर जीवन के अस्तित्व को बचाने के लिए भू-जल का संरक्षण बहुत जरूरी है। जमीन के नीचे स्थित इस जलसंपदा को बचाने के लिए हमें इसका दोहन सीमित करना होगा। भूजल का दोहन कम करने के अनेक उपायों में कृषि और बागवानी भी एक है। हमें अपनी खेती करने के अंदाज को बदलना होगा। धान की फसल उपजाने में ग्राउंड वाटर की बड़ी मात्रा का दोहन होता है। एक अनुमान के अनुसार 1 किलो धान के उत्पादन में 4000 लीटर पानी की आवश्यकता होती है। इसके कारण करनाल जिले के गांवों में भूजल का स्तर घटकर अब 100 से 120 फीट नीचे चला गया है। पहले या स्तर जमीन से सिर्फ 30 फीट नीचे हुआ करता था। यह घटता भूजल स्तर चिंता का विषय है। इसलिए किसानों को अब ध्यान से अन्य फसलों की ओर जाना होगा। इसी उद्देश्य को ध्यान में रखकर हरियाणा सरकार ने 3 साल पहले मेरा पानी मेरी विरासत योजना शुरू की थी जिसके तहत कई प्रावधान किए गए हैं।

उपरोक्त टिप्पणी हरियाणा ग्रंथ अकादमी के उपाध्यक्ष डॉ. वीरेंद्र सिंह चौहान ने रेडियो ग्रामोदय के कार्यक्रम वेकअप करनाल में असंध के कृषि विकास अधिकारी डॉ. राधेश्याम से चर्चा के दौरान की। मेरा पानी मेरी विरासत योजना को धरातल पर उतारने में पेश आ रही समस्याओं पर चर्चा करते हुए डॉ. राधेश्याम ने बताया कि पहले इस योजना को जलशक्ति अभियान के नाम से किसानों के बीच प्रचारित किया गया था। ब्लॉक एवं जिला स्तर पर किसान कैंप लगाकर किसानों को जागरूक किया गया कि एक किलो धान का उत्पादन करने में औसतन 4000 लीटर पानी खर्च होता है जबकि इसकी वैकल्पिक फसल मक्की के उत्पादन में मात्र 800 लीटर पानी की खपत होती है। इसलिए किसानों को वैकल्पिक फसलों की बिजाई पर ध्यान देना चाहिए। डॉ राधेश्याम ने बताया की वैकल्पिक फसलों में मक्की, बाजरा, कपास, मूंग, उड़द, तिल आदि शामिल हैं।

वेक अप करनाल

डॉ. चौहान ने बताया कि किसानों को जागरूक करने के सुपरिणाम सामने आए। इस योजना के तहत हरियाणा में करीब एक लाख एकड़ भूमि धान मुक्त हो गई। धान न बोने वाले किसानों के खाते में प्रदेश सरकार ने 52 करोड़ रुपए से ज्यादा की राशि डाली। अब सरकार का लक्ष्य दो लाख एकड़ भूमि को धान उत्पादन से मुक्त करने का है। उनकी बात को आगे बढ़ाते हुए डॉ राधेश्याम ने बताया कि पहले मक्की के खरीदारों का अभाव था। इसे दूर करने के लिए सरकार ने वैकल्पिक फसलों का न्यूनतम समर्थन मूल्य घोषित किया और फसलों के खरीदार भी तैयार किए। इसका नतीजा यह हुआ कि हरियाणा के 15 जिलों में करीब 15 सौ एकड़ भूमि में किसानों ने मक्की की फसल उपजाई। उन्होंने स्पष्ट किया कि मेरा पानी मेरी विरासत योजना के तहत सरकारी पोर्टल पर अपनी फसलों का पंजीकरण कराने वाले किसानों की ही फसल सरकार द्वारा खरीदी गई।

डॉ. राधेश्याम ने बताया कि धान के वैकल्पिक फसलों के उत्पादन के लिए विभाग को पूरे करनाल जिले के लिए 8700 एकड़ भूमि का लक्ष्य दिया गया है। फसलों का पंजीकरण कराने में उपलाना का स्थान सबसे ऊपर है। पंजीकरण की अंतिम तिथि 25 जून है। उन्होंने बताया की सरकार ने वैकल्पिक फसलों में चारे के उत्पादन को भी शामिल किया है। चारा उपजाने वाले किसानों को सरकार ₹7000 के हिसाब से पैसे देगी। इसके अलावा वैकल्पिक फसलों का बीमा कराने के लिए प्रीमियम का खर्चा भी सरकार की ओर से वहन किया जाएगा।

इस अवसर पर डॉ चौहान ने बताया की फसलों की चॉइस को बदलने के लिए हरियाणा सरकार ने वर्ष 2030 तक के लिए एक बागवानी विजन तैयार किया है। बागवानी विजन में भावांतर भरपाई योजना के तहत इस बार 23 फसलों को शामिल किया गया है जिनमें 14 सब्जियां भी शामिल हैं। इस योजना के तहत 21 फसलों के संरक्षित मूल्य निर्धारित किए गए हैं। साथ ही यह प्रावधान भी किया गया है कि यदि भावांतर भरपाई योजना में शामिल फल व सब्जियों की पूरी फसल प्राकृतिक आपदा के कारण नष्ट हो जाती है तो उसके पूरे खर्च की भरपाई मुख्यमंत्री बागवानी बीमा योजना के अंतर्गत की जाएगी। इसके तहत किसानों को ₹30000 प्रति एकड़ के हिसाब से क्लेम मिलेगा। फलों के मामले में भरपाई की यह दर ₹40000 प्रति एकड़ होगी। इस बीमा योजना का लाभ लेने के लिए किसानों को 2.5% राशि का भुगतान करना होगा।

डॉ चौहान ने बताया कि मनोहर लाल खट्टर की सरकार ने किसानों के लिए एक और योजना शुरू की है। इसके तहत यदि कोई किसान 1 एकड़ क्षेत्र में 400 पौधे लगाता है तो उसे अगले 3 साल तक प्रदेश सरकार प्रति एकड़ ₹10000 देगी। यह भी जल संरक्षण और हरियाली बढ़ाने के उद्देश्य से किया गया है। उन्होंने बताया कि इस बार वैकल्पिक फसलों की सूची से बाजरा को हटा लिया गया है।

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आचार्य अभिनवगुप्त से आमजन को अवगत कराना जरूरी

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विचार गोष्ठी में अभिनव गुप्त के व्यक्तित्व व शैव दर्शन पर चर्चा

करनाल । आचार्य अभिनवगुप्त जैसे विराट व्यक्तित्व वाले विद्वान एवं उनके अद्भुत शैव दर्शन के प्रति आज की युवा पीढ़ी का अनभिज्ञ होना अत्यंत दुख एवं चिंता का विषय है। आचार्य अभिनवगुप्त ही नहीं, उनके अलावा भी ऐसे कई विश्व स्तरीय मनीषी एवं विचारक हैं जिनके बारे में आज की युवा पीढ़ी को कोई जानकारी नहीं है। जनसाधारण और खासकर आज की युवा पीढ़ी को आचार्य अभिनवगुप्त के व्यक्तित्व एवं उनके जीवन दर्शन को समझना बहुत जरूरी है। ऐसे महापुरुषों की जीवनी पर छोटी पुस्तकों की एक श्रृंखला शुरू होनी चाहिए। मुख्यमंत्री श्री मनोहरलाल की अध्यक्षता में कार्य करने वाली हरियाणा ग्रंथ अकादमी ऐसे महापुरुषों के जीवन और दर्शन पर आधारित परिचयात्मक पुस्तकमाला प्रकाशित करने की योजना बनाएगी। इस शृंखला में पहली पुस्तक आचार्य अभिनव गुप्त के व्यक्तित्व और कार्यों को समर्पित होगी। यह टिप्पणी हरियाणा ग्रंथ अकादमी के उपाध्यक्ष डॉ.वीरेंद्र सिंह चौहान ने आचार्य अभिनवगुप्त की जयंती पर आयोजित राष्ट्रीय विचार गोष्ठी की अध्यक्षता करते हुए की।

गोष्ठी के दौरान कई वक्ताओं एवं कश्मीरी विद्वानों ने अपने विचार व्यक्त किए। गोष्ठी की शुरुआत करते हुए जवाहरलाल नेहरु विश्वविद्यालय के संस्कृत एवं प्राच्य विद्या अध्ययन संस्थान के डॉ. रजनीश मिश्रा ने कहा कि विश्व भर का शिक्षित समुदाय जिस देश को सबसे ज्यादा पसंद करता है, वह भारत देश ही है। यह भारत की ज्ञान मूलक संस्कृति की विशेषता है। यह संस्कृति आत्मा को अभिमुख करने एवं स्वयं को अपने आप से साक्षात्कार कराने का ज्ञान देती है। इस संस्कृति में कुछ ऐसे भी प्रश्न पूछे जाते रहेंगे जो अन्य संस्कृतियों में मिलना मुश्किल है। जिस ज्ञान की हमें निरंतर खोज है वह मोक्ष देने वाला ज्ञान है। निरंतर इस ज्ञान की खोज में लिप्त रहने के कारण ही इस देश का नाम भारत सार्थक होता है। डॉ. मिश्रा ने कहा कि आचार्य अभिनवगुप्त ने ज्ञान और साधना की सभी धाराओं में लेखन किया।

कश्मीरी विद्वान और नाद पत्रिका के मुख्य संपादक सुनील रैना ने आचार्य अभिनवगुप्त के जीवन पर प्रकाश डालते हुए कहा कि आचार्य की चर्चा कश्मीरी शैव दर्शन का उल्लेख किए बिना पूरी नहीं हो सकती। आचार्य अभिनव गुप्त 10 वीं शताब्दी के आसपास आए। विडंबना है कि अभिनवगुप्त के दर्शन को मात्र अकादमिक स्तर तक सीमित कर दिया गया है। उनके जीवन दर्शन को सरल भाषा में परिभाषित करने की जरूरत है ताकि आम लोग भी इसे समझ सकें। कश्मीर शिव शक्ति की भूमि रही है। निर्मल पुराण में कहा गया है कि कश्मीर की भूमि स्वयं पार्वती है। भगवान शिव उनके महेश्वर हैं।

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