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शिक्षण क्षेत्र में जाने के इच्छुक लोगों के लिए नया 4 वर्षीय पाठ्यक्रम सुनहरा मौका : डॉ. चौहान

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ग्रामोदय लाइव में ग्रंथ अकादमी उपाध्यक्ष ने शिक्षाविद ऋषि गोयल के साथ की चर्चा

करनाल। नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति में उच्च शिक्षा, स्कूली शिक्षा और तकनीकी शिक्षा तीनों शामिल हैं। इस शिक्षा नीति का अध्याय 5 और 15 पूर्ण रूप से शिक्षकों की शिक्षा पर ही केंद्रित है। नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति के निर्देशक सिद्धांतों के परिप्रेक्ष्य में हरियाणा सरकार ने दो नए शिक्षक प्रशिक्षण संस्थान खोलने को मंजूरी दी है। ये दो शिक्षक प्रशिक्षण संस्थान अन्य राज्यों के लिए भी रोल मॉडल साबित होंगे। यह जानकारी हरियाणा ग्रंथ अकादमी के उपाध्यक्ष एवं भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता डॉ वीरेंद्र सिंह चौहान ने रेडियो ग्रामोदय के लाइव कार्यक्रम में दी। वह प्रमुख शिक्षाविद एवं स्टेट इंस्टीट्यूट आफ एडवांस्ड स्टडीज इन टीचर्स एजुकेशन, झज्जर के निदेशक डॉ. ऋषि गोयल से चर्चा कर रहे थे।

डॉ. चौहान ने डॉ ऋषि गोयल से पूछा कि नये खुलने जा रहे दो शिक्षक प्रशिक्षण संस्थान अन्य संस्थानों से किस प्रकार अलग होंगे और इनकी विशेषताएं क्या होंगी? इस पर डॉ. ऋषि गोयल ने बताया कि इन नए शिक्षक प्रशिक्षण संस्थानों में पारंपरिक बीएड पाठ्यक्रम के मुकाबले 4 वर्षीय पाठ्यक्रम होगा जो 12वीं तक की संपूर्ण शिक्षा के लिए पात्रता प्रदान करने वाला होगा। इस कोर्स को पूरा करने पर अभ्यर्थियों का एक साल बचेगा। इस पाठ्यक्रम में प्रवेश 12वीं की परीक्षा के आधार पर मिलेगा और प्रारंभिक बैच में दाखिला लेने वाले विद्यार्थी भविष्य में लाभ की स्थिति में होंगे। उनकी इस बात का समर्थन करते हुए डॉ. चौहान ने भी कहा कि चार वर्षीय इस नए पाठ्यक्रम की डिग्री भविष्योन्मुखी है। देशभर में शिक्षकों के प्रशिक्षण के पाठ्यक्रम अब इसी पैटर्न पर आने वाले हैं। यह प्रक्रिया वर्ष 2030 तक पूरी कर लेने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

डॉ. ऋषि गोयल ने अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए कहा कि शिक्षा में कोई भी आमूलचूल परिवर्तन लाना शिक्षकों के माध्यम से ही संभव है। किसी भी स्तर पर शिक्षक होने की पात्रता हासिल करने के लिए पाठ्यक्रमों को गंभीरता से चलाए जाने की आवश्यकता है। पहले ऐसा होता था कि अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में उत्तीर्ण न हो पाने पर अभ्यर्थी काम चलाने के लिए शिक्षक बन जाते थे। इस स्थिति में बदलाव की आवश्यकता महसूस की गई। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति में अच्छे लोगों को टीचिंग क्षेत्र में लाने का रोडमैप प्रस्तुत किया गया है।

डॉ. चौहान ने कहा कि नई शिक्षा नीति दो वर्षीय बी.एड. पाठ्यक्रमों को बंद करने की संस्तुति करती है। उन्होंने पूछा कि क्या यह संस्तुति देश भर में एक साथ लागू होगी या चरणबद्ध ढंग से यह प्रक्रिया पूरी की जाएगी। इस पर डॉ. ऋषि गोयल ने बताया कि पुराने संस्थान चरणबद्ध ढंग से फेज आउट किए जाएंगे। वर्ष 2030 तक सभी संस्थान चार वर्षीय पाठ्यक्रम ही चलाएंगे और इन चरणों का निर्धारण केंद्र और राज्य सरकार मिलकर करेंगे। नए पाठ्यक्रम में प्रवेश के लिए ऑनलाइन आवेदन ही स्वीकार किए जाएंगे जिनकी अंतिम तिथि 19 अक्टूबर थी। 21 अक्टूबर को सूची प्रकाशित की जाएगी।

डॉ. चौहान ने पूछा कि क्या नई शिक्षा नीति में भारतीय भाषाओं के प्रति उतनी गंभीरता है जितनी विदेशों में उनकी अपनी भाषाओं के प्रति है? इस पर डॉ. ऋषि गोयल बताया कि नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति में बहुभाषी व्यक्तित्व पर जोर दिया गया है। उनकी बात का समर्थन करते हुए डॉ. वीरेंद्र सिंह चौहान ने भी कहा कि अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद ने इंजीनियरिंग की परीक्षा देने के इच्छुक छात्रों के लिए अधिकतर भारतीय भाषाओं के द्वार खोल दिए हैं और हरियाणा सरकार ने भी इस दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया है। उन्होंने बताया कि हरियाणा के तकनीकी शिक्षा मंत्री अनिल विज ने घोषणा की है कि हरियाणा के तीन विश्वविद्यालयों में तकनीकी शिक्षा के लिए हिंदी के पाठ्यक्रम प्रारंभ करने की पहल की गई है। इसके अलावा तकनीकी शिक्षा की पुस्तकों का हिंदी में भी प्रकाशन शुरू किया गया है। यह एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है और इसके लिए तकनीकी शिक्षा मंत्री बधाई के पात्र हैं।

डॉ. चौहान ने बताया कि हरियाणा ग्रंथ अकादमी ने भी एआईसीटीई के साथ एक करार किया है जिसके अनुसार यह संस्था तकनीकी शिक्षा की ऐसी पुस्तकों का प्रकाशन और विपणन का कार्य करेगी। उन्होंने बताया कि पॉलिटेक्निक की पुस्तकें हिंदी में लिखवाने की परियोजना पर भी काम चल रहा है। कुछ महीनों में यह पुस्तकें उपलब्ध हो जाएंगी। अपनी भाषा, अपनी संस्कृति और अपनी परंपराओं पर काम शुरू करने की जरूरत है।

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तरावड़ी में सम्राट पृथ्वीराज चौहान को समर्पित शोध संस्थान व स्मारक की स्थापना आवश्यक : डॉ. चौहान

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करनाल। तरावड़ी स्थित सम्राट पृथ्वीराज चौहान के किले के अवशेष ऐतिहासिक, पुरातत्विक और भावनात्मक महत्व रखते हैं। इस स्थल का पुरातत्व की दृष्टि से संरक्षण और जीर्णोद्धार जल्द से जल्द प्रारंभ होना चाहिए। साथ ही तरावड़ी में सम्राट पृथ्वीराज चौहान को समर्पित शोध संस्थान व स्मारक की स्थापना का बरसों से लंबित कार्य भी बगैर देरी के प्रारंभ होना आवश्यक है। हरियाणा ग्रंथ अकादमी के उपाध्यक्ष और भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता डॉ. वीरेंद्र सिंह चौहान ने तरावड़ी किला परिसर का दौरा करने के बाद यहां जारी एक विज्ञप्ति में यह बात कही।
भाजपा प्रदेश प्रवक्ता ने कहा कि प्रस्तावित स्मारक व शोध केंद्र के संबंध में मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर की घोषणा को अमल में लाने के मार्ग की बाधाओं को जल्द से जल्द दूर करने के प्रयास किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि इस संबंध में जिला प्रशासन आला अधिकारियों के साथ विमर्श के बाद वह स्वयं मुख्यमंत्री को तथ्यों से अवगत कराते हुए उनसे हस्तक्षेप के लिए अनुरोध करेंगे। किला परिसर के दौरे के दौरान राजपूत सभा करनाल के प्रेस सचिव डॉ. एन. पी. सिंह भी मौजूद थे।

डॉ. वीरेंद्र सिंह चौहान ने कहा कि तरावड़ी के ऐतिहासिक महत्व को रेखांकित करने, किले के संरक्षण की दिशा में क्षेत्र के लोगों को जागरूक करने और स्मारक निर्माण की अवधारणा को धरातल पर उतारने के कार्य में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के तत्कालीन प्रांत-संघचालक, पद्म भूषण से अलंकृत स्वर्गीय दर्शन लाल जैन की अहम भूमिका रही। उन्होंने योद्धा स्मारक समिति के माध्यम से इस विषय को अनेक अवसरों पर प्रभावी ढंग से उठाया। डॉ. चौहान ने कहा कि तरावड़ी में स्मारक का निर्माण सम्राट पृथ्वीराज चौहान समेत देश के योद्धाओं को सच्ची श्रद्धांजलि होगा और यह कार्य कर राज्य सरकार सरस्वती नदी शोध संस्थान की स्थापना सहित अनेक महत्वपूर्ण कार्य करने वाले स्व. दर्शन लाल जैन का अधूरा सपना भी साकार करेगी।

डॉ. वीरेंद्र सिंह चौहान ने कहा कि वह स्वयं योद्धा स्मारक समिति और जनाधिकार चेतना मंच के माध्यम से ऐतिहासिक स्थल की और तरावड़ी नगर की गरिमा बहाल करने के संघर्ष के साथ बरसों से जुड़े हैं। उन्होंने विश्वास जताया कि इलाके के लोगों का यह अधूरा सपना राज्य सरकार जल्द साकार करेगी और यहां बनने वाला स्मारक व शोध केंद्र आने वाली पीढ़ियों के लिए ही नहीं अपितु वर्तमान युवा शक्ति के लिए भी रचनात्मक ऊर्जा का केंद्र बनकर उभरेगा।

काटजू नगर की समस्याओं का भी होगा समाधान

सम्राट पृथ्वीराज चौहान के किले के देशों का अवलोकन करने पहुंचे भाजपा प्रवक्ता किले में बसने वाले काटजू नगर के स्थानीय निवासियों से भी बातचीत की। इस अवसर पर बुजुर्ग निहालचंद ने बताया कि सभी किलावासियों को नगर पालिका की ओर से संपत्ति कर के किस भेजे गए हैं उनमें ₹600 यूजर चार्ज के नाम से जोड़े गए हैं। स्थानीय निवासी काफी पड़ताल करने के बाद भी इस नए कर का अर्थ समझ नहीं पाए हैं। इस पर डॉ वीरेंद्र सिंह चौहान ने कहा कि वे स्थानीय प्रशासन के अधिकारियों से विमर्श कर इस मामले की तह में जाने का प्रयास करेंगे। उन्होंने पूर्व विधायक भगवान दास कबीरपंथी से भी इस मामले में हस्तक्षेप के लिए अनुरोध किया।

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हिंदी व अन्य भारतीय भाषाओं का सम्मान बहाल करना हमारी प्राथमिकता : विज

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अंबाला छावनी/चंडीगढ़ / पंचकूला । गृह, स्वास्थ्य और तकनीकी शिक्षा मंत्री अनिल विज ने कहा है प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कुशल नेतृत्व में भाजपा सरकार हिंदी सहित सभी भारतीय भाषाओं के मान-सम्मान की बहाली के लिए कृत संकल्प है। प्रदेश के तीन विश्वविद्यालयों में हिंदी में तकनीकी शिक्षा के पाठ्यक्रम शुरू किए जाने की पहल के लिए तकनीकी शिक्षा मंत्री का आभार व्यक्त करने पहुँचे हरियाणा ग्रंथ अकादमी के उपाध्यक्ष डॉ. वीरेंद्र सिंह चौहान के साथ विमर्श में उन्होंने यह टिप्पणी की।डॉ.चौहान ने इस अवसर पर राज्य सरकार की इस महत्वपूर्ण पहल के लिए तकनीकी शिक्षा मंत्री के प्रयासों की सराहना की और हरियाणा ग्रंथ अकादमी द्वारा तकनीकी शिक्षा की पाठ्यपुस्तक तैयार करने के लिए किए चलायी जा रही योजनाओं का विवरण दिया।

गृह मंत्री अनिल विज ने कहा कि विश्व के सब स्वाभिमानीऔर समर्थ देश अपनी-अपनी भाषाओं में ज्ञान विज्ञान और तकनीकी विषयों की शिक्षा बरसों से दे रहे हैं। भारत में पूर्ववर्ती सरकारों ने हिंदी और अन्य भारतीय भाषाओं की दशकों तक उपेक्षा कर उन्हें पीछे धकेलने का अपराध किया। भारतीय जनता पार्टी की सरकार द्वारा नई शिक्षा नीति में भारतीय भाषाओं के मान-सम्मान की बहाली के प्रभावी प्रावधान कर उन पर काम करना शुरू कर दिया है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार के कार्यालयों में अधिकतम कार्य हिंदी में करने के लिए विभाग अध्यक्षों को लिखित निर्देश दिए गए हैं। आने वाले दिनों में इन निर्देशों के अनुपालन की समीक्षा भी की जाएगी।

हरियाणा ग्रंथ अकादमी उपाध्यक्ष और भारतीय जनता पार्टी के प्रवक्ता डॉ. वीरेंद्र सिंह चौहान ने इस अवसर पर बताया कि हरियाणा ग्रंथ अकादमी केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय के अंतर्गत चलने वाले पारिभाषिक शब्दावली आयोग के आर्थिक सहयोग से हिंदी में पॉलिटेक्निक की पुस्तकें तैयार करवा रही है। इसके अलावा अकादमी ने अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद के साथ भी हिंदी में परिषद द्वारा तैयार की गई इंजीनियरिंग की किताबों के प्रकाशन और विपणन के संबंध में एक समझौता पत्र पर हस्ताक्षर कर उसके अनुसार कार्य करना प्रारंभ कर दिया है। उन्होंने कहा कि अकादमी द्वारा तकनीकी शिक्षा से जुड़ी पाठ्य पुस्तकों के लेखन से जुड़े विभिन्न आयामों पर मंथन के लिए एक राष्ट्रीय संगोष्ठी व कार्यशाला आयोजित करने की तैयारी की जा रही है।

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काछवा के युवाओं को सशक्त कर रहा सरदार पटेल पुस्तकालय : डॉ. चौहान

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ग्रंथ अकादमी उपाध्यक्ष ने पुस्तकालय का दौरा कर लिया व्यवस्थाओं का जायजा

करनाल। करनाल विधानसभा क्षेत्र के काछवा गांव में उत्तर हरियाणा बिजली वितरण निगम द्वारा स्थापित और संचालित सरदार पटेल पुस्तकालय काछवा सहित आसपास के ग्रामीण अंचल के युवाओं के लिए वरदान साबित हो रहा है। पुस्तकालय के रूप में ग्रामीण अंचल के युवाओं को अपने स्वाध्याय के लिए एक ऐसा बेहतर स्थान मिल गया है जहां प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी, कंप्यूटर सीखने एवं विभिन्न विषयों पर विस्तृत ज्ञान हासिल करने के लिए महत्वपूर्ण पुस्तकें उपलब्ध हैं। यह टिप्पणी हरियाणा ग्रंथ अकादमी के उपाध्यक्ष एवं भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता डॉ. वीरेंद्र सिंह चौहान ने की। वह सरदार वल्लभभाई पटेल पुस्तकालय का दौरा कर उसकी कार्यप्रणाली एवं व्यवस्थाओं का जायजा ले रहे थे। इस क्रम में ग्राम वासियों से मुलाकात के दौरान उन्होंने पुस्तकालय की लंबित समस्याओं पर भी विस्तार से चर्चा की।

इस अवसर पर डॉ. वीरेंद्र सिंह चौहान ने कहा कि इस वातानुकूलित पुस्तकालय में पढ़ाई के लिए इतनी अच्छी सुविधाएं उपलब्ध हैं जो आमतौर पर कई अच्छे निजी स्कूलों में भी उपलब्ध नहीं हैं। काछवा गांव मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर के विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत आता है। प्रदेश सरकार ने उत्तर हरियाणा बिजली निगम के माध्यम से प्रदेश के अलग-अलग गांवों में पुस्तकालयों के निर्माण का फैसला किया है। इस क्रम में वैसे गांवों को प्राथमिकता दी जा रही है, जहां के ग्रामीणों ने जगमग योजना में अच्छी भागीदारी की है और जहां बिजली के बिल कायदे से भरे जा रहे हैं। काछवा में सरदार पटेल पुस्तकालय इसी दिशा में उठाया गया एक कदम है। इसके लिए मुख्यमंत्री मनोहर लाल और उत्तर हरियाणा बिजली वितरण निगम दोनों बधाई के पात्र हैं। ऐसा ही एक पुस्तकालय नीलोखेड़ी विधानसभा के गोंदर गाँव में बनकर तैयार हो चुका है।

डॉ. चौहान ने कहा कि पुस्तकें, एयर कंडीशनर, कंप्यूटर एवं बैठने का बेहतर स्थान मात्र साधन हैं। इनका मकसद ज्ञान प्राप्ति की साधना को और अनुकूल एवं सुगम बनाना है। यह साधना परिश्रम, अभ्यास और स्वाध्याय के बिना संभव नहीं है। हरियाणा ग्रंथ अकादमी सरकार का संस्थान है जो पुस्तकों के प्रकाशन का काम करता है। मुख्यमंत्री इसके अध्यक्ष हैं। पुस्तक प्रेमियों एवं पुस्तकालयों को अच्छी पुस्तकें प्रदान करना ग्रंथ अकादमी का दायित्व है। हमें पढ़ाई के साथ साथ अपनी बातों को मजबूत तरीके से रखने की कला भी आनी चाहिए।

डॉ. वीरेंद्र सिंह चौहान ने कहा कि किताबों के ज्ञान को अपने अंदर उतार कर इसे जीवन में आगे बढ़ने का यदि माध्यम बना लिया जाए तो साधना सफल समझी जाएगी। यह पुस्तकालय जिज्ञासु एवं जागरूक युवाओं को पढ़ने लिखने के लिए बहुत शांत एवं सुंदर माहौल प्रदान करता है। उम्मीद है कि आने वाले दिनों में यहां ज्ञान प्राप्ति के साधन और बढ़ेंगे जिनसे युवाओं की ज्ञान प्राप्ति की राह और सुगम हो सकेगी। उन्होंने विद्यार्थियों का आह्वान किया कि वे केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय द्वारा संचालित नेशनल डिजिटल लाइब्रेरी ऑफ़ इंडिया के ऑनलाइन संसाधनों का उपयोग भी करना प्रारम्भ करें। इस अवसर पर भाजपा नेता सुरेश भारद्वाज ने डॉ. वीरेन्द्र सिंह चौहान का काछवा पुस्तकालय पहुँचने पर स्वागत किया ।

इस अवसर पर लाइब्रेरियन शालू, पूनम और संचालक एसडीओ संदीप सिकरी के अलावा छात्र सुमित, वैभव, शुभम, विशाल, पूजा और अथर्व भी मौजूद रहे।

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गांव की खुशहाली सक्रिय ग्राम सभा से ही संभव: डॉ चौहान

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उपलानी ग्राम सभा में विभिन्न विषयों पर संवाद का आयोजन

असंध । देश के संचालन में जो महत्व संसद का है वही महत्व गांव के लिए ग्राम सभा का है। ग्रामसभा गांव की संसद है, सरपंच गाँव का प्रधानमंत्री और पंचायत मंत्रिमंडल की भांति है। सक्रिय ग्रामसभा गांव की तस्वीर बदल सकती है। उपलानी गांव में आयोजित ग्राम सभा में बतौर मुख्य अतिथि पधारे हरियाणा ग्रंथ अकादमी के उपाध्यक्ष और प्रदेश भाजपा प्रवक्ता डॉ वीरेंद्र सिंह चौहान ने यह टिप्पणी की।

विभिन्न महिला स्वयंसेवी समूह को संबोधित करते हुए डॉ चौहान ने आत्मनिर्भर भारत में आत्मनिर्भर महिलाओं की भूमिका पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि महिलाओं के भीतर छिपी उद्यमिता गांव के आर्थिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका अदा कर सकती है । भारत सरकार महिला स्वयंसेवी संगठनों के माध्यम से गांव आधारित अर्थ तंत्र के विकास और महिला सशक्तिकरण के प्रति कृत संकल्प है तथा विभिन्न योजनाओं व अनुदान के माध्यम से इस कार्य को कर रही है।

भाजपा जिला सचिव गुरबख़्शीश सिंह लाडी ने ग्रामवासियों से कहा कि ग्राम विकास को लेकर सरकार अनेक उपयोगी और बेहतरीन योजनाएं चला रही है हम सबका दायित्व है कि उन योजनाओं को जानें, समझें का क्रियान्वन अपनी ग्राम सभा के माध्यम से अपने गाँव में करवाएं।

खंड कृषि अधिकारी डॉ राधेश्याम ने पराली प्रबंधन को प्रत्येक गांव और प्रत्येक किसान के लिए आवश्यक बताया। उन्होंने कहा कि उचित पराली प्रबंधन गांव की जलवायु, भूमि की उत्पादकता और आर्थिक लाभ तीनों में सहयोगी है सरकार द्वारा पराली के गट्ठर तैयार करने पर हजार रुपए प्रति एकड़ का अनुदान भी दिया जा रहा है।

पंचायत सेक्रेट्री प्रेम ने ग्राम वासियों से जल के उचित प्रबंधन को लेकर अनेक तकनीक एवं तथ्य साझा किए। उन्होंने कहा कि भूजल स्तर को उच्च रखने के लिए आवश्यक है कि हम जल प्रबंधन की ओर विशेष ध्यान दें। अगर अब भी हमने ऐसा नहीं किया तो आने वाली पीढ़ी के सामने गिरते जलस्तर के कारण विषम परिस्थितियां पैदा हो जाएंगी।

ग्राम सभा द्वारा आयोजित इस संवाद कार्यक्रम में ग्राम वासियों ने बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया और विभिन्न चर्चाओं के माध्यम से गांव के विकास के लिए आवश्यक अनेक जानकारियां प्राप्त की। इस अवसर पर ग्राम सचिव रजनीश, , पूर्व सरपंच सुरेंद्र उपलानी, बी. डी. ओ. सहायक सुरेंदर उपस्थित रहे।

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स्वच्छता व स्वच्छता कर्मी जीवन का आवश्यक अंग, अवहेलना अनुचित : डॉ चौहान

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गांधी व शास्त्री जयंती के अवसर पर सेवा समर्पण अभियान के अंतर्गत सफाई कर्मियों का सम्मान

निसिंग । स्वच्छ वातावरण हमारा अधिकार ही नहीं अपितु हमारा दायित्व भी है। स्वच्छता की शुरुआत इधर उधर गंदगी न फैलाने के विचार और आचरण से प्रारंभ होती है। स्वच्छता का जिम्मा मात्र सरकारी संस्थाओं और स्वच्छता कर्मियों का नहीं है । हमें खुद भी अनुशासित आचरण से स्वच्छता को बढ़ावा देना होगा।
माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिवस 17 सितंबर से प्रारंभ सेवा समर्पण अभियान के अंतर्गत महात्मा गांधी व लाल बहादुर शास्त्री की जयंती के अवसर पर राजकीय कन्या वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय, गोंदर में सफाई कर्मियों के सम्मान में भारतीय जनता पार्टी द्वारा आयोजित कार्यक्रम में हरियाणा ग्रंथ अकादमी के उपाध्यक्ष व प्रदेश भाजपा प्रवक्ता डॉ. वीरेंद्र सिंह चौहान ने यह टिप्पणी की।

भारतीय जनता पार्टी के मंडल महामंत्री वेद तनेजा ने उपस्थित सभी लोगों का स्वागत किया और कहा कि सफाई कर्मियों को कमतर आंकना गलत है अगर यह अपना कार्य उचित प्रकार से ना करें तो सभी व्यवस्थाएं चरमरा जाएंगी।

अकादमी उपाध्यक्ष डॉ. चौहान ने कहा कि महात्मा गांधी के स्वच्छता के भाव से प्रेरित हो माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी द्वारा प्रारंभ किए गए स्वच्छ भारत अभियान को सफल बनाने में योगदान देते हुए देश के प्रत्येक मार्ग, गली एवं सड़क को सुंदर और स्वच्छ बनाने के लक्ष्य को प्राप्त करना ही महात्मा गांधी को सच्ची श्रद्धांजलि होगी। अपनी इमानदारी से स्वच्छ राजनीतिक जीवन का आदर्श प्रस्तुत करने वाले हमारे प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री जी के आदर्शों को जीवन में उतार कर वैचारिक स्वच्छता के लक्ष्य को प्राप्त करना भी अत्यंत आवश्यक है।

डॉ. चौहान ने गांधी व शास्त्री दोनों महापुरुषों के विचारों को स्मरण कर उन्हें श्रद्धांजलि दी और कहा की महापुरुषों को सच्ची श्रद्धांजलि उनके द्वारा स्थापित आदर्शों को जीवन में उतार कर ही दी जा सकती है। सेवा समर्पण अभियान एक प्रयास है जिसमें हम अपने जीवन व व्यवहार में इन आदर्शों को स्थापित करते हुए समाज के विभिन्न पक्षों का उत्थान करने का प्रयास करते हैं। सफाई कर्मियों को सम्मानित करना मात्र व्यक्ति का सम्मान नहीं है अभी तो सेवा के उस भाग को नमन करना है जो सफाई कर्मियों को दूसरों द्वारा फैलाई गई गंदगी से घिन्न ना करते हुए उसे दूर करने को प्रेरित करता है।

मंडल उपाध्यक्ष शमशेर राणा ने महात्मा गांधी और लाल बहादुर शास्त्री को नमन किया तथा उनके जीवन से जुड़े विभिन्न संस्मरण सभी के साथ साझा किए।

जिला सचिव किसान मोर्चा राजकुमार राणा ने कहा कि स्वच्छता का अभ्यास घर से प्रारंभ होता है घर पर वस्तुएं उचित स्थान पर रखना, कूड़ा कूड़ेदान में डालना कुछ ऐसी आदतें हैं जो सामाजिक जीवन में भी गंदगी न फैलाने के अभ्यास को विकसित करती हैं । देश की स्वच्छता का अभियान स्वयं व आसपास को अनुशासित व स्वच्छ रखने से प्रारंभ होता है।

युवा मोर्चा मंडल अध्यक्ष मुकेश कुमार ने सेवा को जीवन का अभिन्न अंग बताया और उपस्थित सभी लोगों का आह्वान किया कि वह स्वयं को किसी ना किसी सेवा कार्य से अवश्य जोड़ें जिससे समाज उनकी योग्यताओं और क्षमताओं से लाभान्वित हो सके।

जिला कार्यकारिणी सदस्य सौरभ राणा ने माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिवस से प्रारंभ सेवा समर्पण अभियान के अंतर्गत आयोजित किए जा रहे कार्यक्रमों का ब्यौरा सबके सम्मुख रखा।

शक्ति केंद्र सह प्रमुख नरेंद्र राणा ने कहा कि स्वच्छता हेतु कम से कम हम आज यह संकल्प लें कि हम कूड़ा कूड़ेदान में ही डालेंगे इस प्रकार हर महा एक नया संकल्प लें हम स्वच्छता के लक्ष्य को प्राप्त कर सकते हैं।

इस अवसर पर शक्ति केंद्र प्रमुख महिपाल लांगियान, बूथ अध्यक्ष रामकिशन जांगड़ा, सतीश पहलवान, जितेंद्र कुमार, गौरव त्यागी, सतिंदर कुमार, आई टी सेल प्रमुख सोनू राणा व शिव कुमार जांगड़ा, प्रदीप कुमार, कुलदीप पांचाल तथा गौरव अरोड़ा उपस्थित रहे।

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मास्क कोरोना से बचने का सबसे प्रभावशाली तरीका : डॉ. चौहान

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रेडियो ग्रामोदय और युनिसेफ़ के कोविड रोधी जागरूकता अभियान के अंतर्गत हरियाणा ग्रंथ अकादमी उपाध्यक्ष ने जलमाना में विद्यार्थियों से किया संवाद

असंध । कोरोना अब भी गया नहीं है। इसकी तीसरी लहर का खतरा अब भी बरकरार है। कोरोना से बचने के लिए कोविड अनुकूल व्यवहार आवश्यक है। फेस मास्क कोरोना से बचने के सबसे प्रभावशाली तरीकों में से एक है। इसलिए, मास्क को सही तरीके से लगाया जाना चाहिए। मास्क को गलत तरीके से लगाने या लगाने के बाद भी नाक को अच्छी तरह न ढकने से मास्क लगाने का उद्देश्य पूरा नहीं हो पाता। यह टिप्पणी हरियाणा ग्रंथ अकादमी के उपाध्यक्ष एवं भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता डॉ. वीरेंद्र सिंह चौहान ने जलमाना में कोविड जागरूकता को लेकर आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान की। वह स्कूली छात्रों व स्टाफ से रेडियो ग्रामोदय और युनिसेफ़ कोविड रोधी जागरूकता अभियान के अंतर्गत कोविड अनुकूल व्यवहार के सिलसिले में बातचीत कर रहे थे।

डॉ. चौहान ने कहा कि कोई भी कोरोना संक्रमित व्यक्ति जब बोलता या खांसता है, तो हवा में असंख्य विषाणु तैरने लगते हैं जो सामने वाले व्यक्ति के शरीर में नाक, मुंह और आंखों के जरिए प्रवेश कर जाते हैं। यदि आपने फेस मास्क नहीं पहना है, तो आप आसानी से संक्रमित हो सकते हैं। मास्क संक्रमण के खतरे को काफी कम करता है। उन्होंने कहा कि मास्क को लगाने के बाद उसे सही तरीके से उतारना भी उतना ही जरूरी है। मास्क के अगले हिस्से को बार-बार छूना खतरनाक साबित हो सकता है। कोरोना के विषाणु हाथ के जरिए भी शरीर में प्रवेश कर सकते हैं। इसलिए, हाथों को बार-बार धोते रहना और सैनिटाइज करना भी बहुत जरूरी है। सार्वजनिक स्थलों पर बिना मास्क लगाए कदापि नहीं जाना चाहिए।

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संस्कृति मॉडल प्राइमरी विद्यालय के प्रधानाचार्य महिंदर सिंह ने डॉ. चौहान ने कोविड अनुकूल व्यवहार को सभी के लिए आवश्यक बताया और कहा कि शिक्षकों को अपने व्यवहार से विद्यार्थियों और अभिवावकों के समक्ष उदाहरण प्रस्तुत करना होगा जिससे विद्यार्थी खुद तो मास्क लगाएं ही, दूसरों को भी इसके लिए प्रेरित करें। कोविड अनुकूल व्यवहार न करने वाले लोगों को टोकना भी चाहिए। इसी में सबका बचाव है। रेडियो ग्रामोदय और युनिसेफ़ के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम में विद्यालय के अन्य शिक्षक सुरेन्द्र पाल, सरिता, सुमन, गुरजीत कौर, कंचन, जसबीर सिंह, नरेंदर सिंह सुभाष चंद, चरण सिंह और वीरेंदर सिंह आदि ने भी कोविड अनुकूल व्यवहार पर विचार रखे और टीकाकरण हेतु सबका आह्वान किया ।

राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय के प्राचार्य डॉ. विक्रम चौहान ने कोरोना से न डरने का सन्देश दिया और कहा कि कोविड अनुकूल व्यवहार को अपनाकर ही कोरोना के भय को कम किया जा सकता है । उन्होंने कोविड अनुकूल व्यवहार को लोगों को समझाने में युवाओं के योगदान पर विशेष जोर दिया और समाज में कोविड अनुकूल व्यवहार के प्रति जागरूकता फैलाने के लिए अपने विद्यालय के छात्रों की सक्रियता की प्रशंसा की ।

रेडियो ग्रामोदय और यूनिसेफ के अभियान यंग वारियर्स (#YoungWarriors) से जुड़ें और आप भी जागरूक बने....

इस अवसर पर विद्यालय के अमन, शुभम, अंकुश, भगत सिंह, गौरव, राहुल, अमरपाल, राहुल राठी, रोहित, रिंकू, अमन और सन्नी आदि विभिन्न विद्यार्थियों ने भी कोविड अनुकूल व्यवहार के प्रति यंग वारियर्स के रूप में अपने विचार रखे ।

रेडियो ग्रामोदय और यूनिसेफ के अभियान यंग वारियर्स (#YoungWarriors) से जुड़ें और आप भी जागरूक बने..
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पानी, जमीन की सेहत और किसान की जेब सबका ध्यान रखती है बागवानी : डॉ चौहान

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रेडियो ग्रामोदय के जय हो कार्यक्रम में महाराणा प्रताप बागवानी विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. समर सिंह से विशेष बातचीत

करनाल । किसान की आय का निरंतर बढ़ना अत्यंत महत्वपूर्ण है । किसानी की लागत निरंतर बढ़ रही है, जिससे जोत का लाभ या प्रति एकड़ लाभ अपेक्षाकृत घट रहा है। यह चिंता का विषय है । बागवानी खेती से जुड़ा वह क्षेत्र है जिसमें अपार संभावनाएं मौजूद हैं। बागवानी न केवल भूमि की सेहत , पानी के स्तर आदि का ध्यान रखती है बल्कि किसान की जेब का भी पूरा पूरा ध्यान रखती है। यह तथ्य हरियाणा ग्रंथ अकादमी के उपाध्यक्ष और प्रदेश भाजपा प्रवक्ता डॉ. वीरेंद्र सिंह चौहान की रेडियो ग्रामोदय के जय हो कार्यक्रम में महाराणा प्रताप बागवानी विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. समर सिंह से हुई वार्ता में सामने आए।

विश्वविद्यालय और बागवानी से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर आधारित इस चर्चा में कुलपति डॉ. समर सिंह ने कहा कि हरियाणा में बागवानी विश्वविद्यालय की स्थापना मुख्यमंत्री मनोहर लाल व प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दूरगामी सोच का परिणाम है। चार क्षेत्रीय केंद्रों के माध्यम से महाराणा प्रताप बागवानी विश्वविद्यालय प्रदेश के सभी किसानों तक बागवानी के लाभ व शिक्षा को पहुंचाने के लिए तत्पर है। पाठ्यक्रम कक्षाओं और इंफ्रास्ट्रक्चर के बारे में डॉ. समर ने बताया कि विश्वविद्यालय कैंपस और विभिन्न क्षेत्रीय केंद्रों के कैंपस की बाउंड्री और पोली हाउस का कार्य लगभग पूरा हो चुका है। एमएससी हॉर्टिकल्चर और पीएचडी की कक्षाएं हिसार कृषि विश्वविद्यालय में चल रही हैं तथा पिछले सत्र से 4 वर्ष का बीएससी हॉर्टिकल्चर कार्यक्रम नीलोखेड़ी में प्रारंभ हो चुका है। जैसे ही विश्वविद्यालय कैंपस में चल रहे निर्माण कार्य पूरे होते जाएंगे यहां पर भी सभी चीजें प्रारंभ हो जाएंगी।

ड्रिप सिंचाई से जुड़े एक प्रश्न के उत्तर में डॉक्टर ने कहा की ड्रिप सिंचाई से ना केवल पानी का बचाव होता है बल्कि फसल की पैदावार और गुणवत्ता में भी 10 से 15% की वृद्धि होती है। किसानों को हर संभव प्रयास कर ड्रिप सिंचाई का लाभ उठाना चाहिए । ड्रिप सिंचाई पर हरियाणा सरकार द्वारा 80% सब्सिडी भी प्रदान की जाती है।

अकादमी उपाध्यक्ष डॉ वीरेंद्र सिंह चौहान द्वारा पानी के गिरते स्तर से जुड़े एक सवाल के उत्तर में डॉक्टर ने कहा की है अत्यंत चिंता का विषय है हमें ध्यान रखना होगा कि हर साल पानी का स्तर 1 लीटर नीचे जा रहा है। ऐसा ही जारी रहा तो सोचिए कि हम अपनी आने वाली पीढ़ी को क्या देंगे? जैसा बढ़िया पानी बहुतायत में हमने अपने बाप दादों से लिया था उसको बर्बाद कर हम आने वाली पीढ़ी के लिए पता नहीं कितनी विषम परिस्थितियों का निर्माण करेंगे? उन्होंने जल गिरते जल स्तर के साथ-साथ जमीन की बिगड़ती सेहत पर भी चिंता व्यक्त की ।

जैविक पदार्थ स्तर या ऑर्गेनिक मैटर या आम भाषा में जमीन का स्वास्थ्य फसल के अवशेष जलाने , यूरिया का बहुत जादा उपयोग करने और लगातार अनेकों वर्षों तक एक ही फसल को उगाते रहने से लगभग 4 गुणा कम हो गया है। इस संबंध में प्रशिक्षण और जागरूकता कार्यक्रमों की बहुत तेजी से आवश्यकता है। किसान को पानी की कमी और ऑर्गेनिक मैटर की बिगड़ती स्थिति को समझना होगा और इसके अनुसार ही फसल चक्र को अपनाना होगा। बागवानी को अपनाना इन समस्याओं के समाधान का एक बेहतरीन विकल्प है।

रोहतक निवासी प्रवीण धनखड़ की बागवानी संबंधी एक समस्या के उत्तर में डॉ. समर ने कहां की बागवानी के संबंध में सही निर्णय लेने के लिए सबसे ज्यादा मिट्टी की जांचआवश्यक है। बाग के लिए 2 या 3 मीटर तक की मिट्टी की जांच करानी आवश्यक है जबकि अन्य फसलों के लिए 15 सेंटीमीटर तक की मिट्टी की जांच कराई जानी चाहिए। मिट्टी की जांच के लिए किसान रोहतक , हिसार या करनाल में स्थित लैबोरेट्रीज जा सकता है और अब तो किसान के पास मोबाइल वैन का विकल्प भी मौजूद है।

पाठ्यक्रम से जुड़े पिंजौर के आशुतोष के प्रश्न के उत्तर में डॉक्टर समर ने बताया अति शीघ्र ही गैर साइंस विद्यार्थी अर्थात आर्ट्स और कॉमर्स के विद्यार्थियों के लिए भी डिप्लोमा कोर्स प्रारंभ किए जाएंगे। हरियाणा से बाहर के विद्यार्थियों के लिए भी कुछ सीटों की व्यवस्था है जिन पर टेस्ट के माध्यम से विद्यार्थी प्रवेश पा सकते हैं।

डॉ. वीरेंद्र सिंह चौहान के बागवानी में लोगों के रुझान और सफलता को लेकर पूछे गए सवाल के जवाब में डॉ. समर ने कहा कि करनाल और अंबाला से जुड़े क्षेत्र बागवानी के लिए अत्यंत उत्तम हैं । करनाल की जमीन अमरूद, आम , लीची और रसीले फलों के लिए अत्यंत उपयुक्त है। किसान बागवानी में आ रहे हैं और सफल भी हो रहे हैं । इस क्रम में उन्होंने जैनपुरा गांव के किसान साहिब सिंह और गोंदर के किसान केहर सिंह के एप्पल बेर के बाग का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि बागवानी का मन बनाने वाले किसान इन किसानों से मिल सकते हैं और घरौंडा व श्यामगढ़ में हरियाणा सरकार के बागवानी सेंटर में भी जा कर बागवानी तकनीकों को देख सकते हैं।

बागवानी के क्षेत्र के बारे में विस्तार से बताते हुए डॉ. समर ने कहा कि सभी फलदार पौधे , सभी सब्जियां, सभी चिकित्सीय पौधे, सभी प्रकार के फूलों की खेती, सजावट के पौधों की खेती, मशरूम तथा शहद की खेती भी बागवानी में शामिल है। उचित प्रशिक्षण प्राप्त कर बागवानी करने वाले एक किसान कि आय परंपरागत रूप से खाद्यान्नों की खेती करने वाले किसान की तुलना में अधिक होती है। इससे भी आगे अगर कोई किसान पढ़ा लिखा है तो अत्यंत आधुनिक तकनीक हाइड्रोगेमी और एरोगेमी का प्रशिक्षण ले सकता है। इसमें सीधे पानी और हवा के माध्यम से ही पौधे को पोषक तत्व दिए जाते हैं। खेती की इन नवीनतम तकनीकों का प्रयोग कर वह 10 गुना ज्यादा तक प्रोडक्शन प्राप्त कर सकता है । दोनों तकनीकों में पौधों में बीमारी बहुत कम होती है। प्रारंभिक स्तर पर तो ऐसा लगता है कि बहुत अधिक लागत लग रही है किंतु उत्पादन को देखते हुए निवेश तुलनात्मक रूप से ज्यादा नहीं होता। डॉ. समर ने कहा कि महाराणा प्रताप बगवानी विश्वविद्यालय इन अत्यंत आधुनिकतम तकनीकों से जुड़े शोध में विशेष ध्यान दे रहा है।

डॉ. चौहान द्वारा प्रोट्रैक्टेड फार्मिंग से जुड़े किसानों के बुरे अनुभव के बारे में पूछने पर डॉक्टर समर ने कहा की प्रोटेक्टिड फार्मिंग में वैज्ञानिक तकनीकों व उपकरणों के माध्यम से वातावरण के तापमान, नमी और अन्य कारकों को नियंत्रित कर खेती की जाती है। यह खेती सब्जियों और छोटे पौधों के लिए सर्वोत्तम है। इसके लिए पर्याप्त प्रशिक्षण और जानकारी की आवश्यकता है। पूरी जानकारी के बिना मात्र सब्सिडी का लाभ उठाने के उद्देश्य से अनेक किसानों ने बिना मिट्टी की जांच किए ढांचे खड़े किए और बाद में पता चला कि जमीन में सूत्र कृमि की समस्या है जिससे वह प्रोटेक्टेड फॉर्मिंग का लाभ पूरी तरीके से नहीं उठा पाए। वर्तमान में कांच का हाउस तैयार करने की बजाए सस्ते नेट हाउस का विकल्प भी मौजूद है।

आंगन में बगिया बनाने वाले पनोधी, घरौंडा के किसान ओमपाल के कलम से फल के पौधे बनाने की तकनीक से जुड़े प्रश्न के उत्तर में डॉक्टर समर ने कहा की महाराणा प्रताप बागवानी विश्वविद्यालय में ही शीघ्र ही एक प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया जाएगा।

आगामी 5 वर्षों में बागवानी विश्वविद्यालय के माध्यम से किस प्रकार का परिवर्तन होगा इस पर प्रकाश डालते हुए डॉक्टर समर ने कहा फिर निश्चित रूप से बागवानी का एरिया जो अभी सवा 500000 एकड़ है वह 900000 एकड़ हो जाएगा इसके साथ साथ विश्वविद्यालय उच्च क्वालिटी की नर्सरी बीज और हाइब्रिड पौधों आधी आधी की व्यवस्था भी करेगी तथा बागवानी से संबंधित विभिन्न तकनीकों को लेकर युवाओं को प्रशिक्षण प्रदान करने पर विशेष जोर रहेगा। विश्वविद्यालय विशेष रूप से साप्ताहिक, पाक्षिक और मासिक प्रशिक्षण कार्यक्रमों पर फोकस करेगा जिससे रिसर्च किसानों तक पहुंच सके और किसान ज्यादा जागरूक और प्रशिक्षित होकर पानी और जमीन की सेहत बिगाड़े बिना अधिक से अधिक लाभ कमाए।

वार्ता में ऑनलाइन माध्यम से मुकेश अग्रवाल, नरेंद्र गोंदर, अंकुश और तरसेम राणा ने भी वृक्षारोपण को ले अपने विचार व्यक्त किए।

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परिवार और समाज की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए सभी टीकाकरण के लिए आगे आएं

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कोरोना की महामारी को मात देने के लिए आवश्यक है कि 18 साल से ऊपर के प्रत्येक नागरिक का टीकाकरण हो। जो लोग किसी भ्रम अथवा भय के कारण पात्र होते हुए भी अब तक टीका लगवाने से रह गए हैं, उन्हें न केवल अपनी अपितु अपने परिवार और समाज की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए भी टीकाकरण के लिए आगे आना चाहिए। रेडियो ग्रामोदय के संस्थापक और हरियाणा ग्रंथ अकादमी के उपाध्यक्ष डॉ. वीरेंद्र सिंह चौहान ने रेडियो ग्रामोदय और यूनिसेफ द्वारा टीकाकरण जागरूकता के लिए चलाए जा रहे अभियान के अंतर्गत गोंदर के रणजीत नगर स्थित कॉलोनी में ग्राम वासियों को संबोधित करते हुए यह बात कही।

भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता डॉ. वीरेंद्र सिंह चौहान ने कहा कि भारत में कोरोना के टीके को लेकर कुछ लोग निहित स्वार्थ के कारण तमाम तरह की भ्रांतियां फैला रहे हैं किंतु ऐसे तत्वों की साजिशों को कामयाब होने नहीं दिया जाएगा। इस अवसर पर उन्होंने टीका लगवा चुके ग्रामवासियों से कोरोना के टीके को लेकर उनके अनुभव विस्तार से सुने। जो लोग टीका लगवा चुके उन्होंने टीका क्या सोचकर लगवाया है और टीका लगवाने के बाद किस का अनुभव कैसा रहा, कार्यक्रम में इस विषय पर विस्तार से चर्चा हुई। इसके साथ साथ जिन्होंने अब तक टीका नहीं लगाया है उन्होंने इस कार्यक्रम में टीका ना लगवाने की अपनी-अपनी वजह भी अभिव्यक्त की।

डॉ. चौहान ने कहा कि टीका लगने के बाद कुछ लोगों को हल्का फुल्का बुखार आता है जो सामान्य और स्वाभाविक बात है। उन्होंने कहा कि कोरोना से पहले अलग-अलग बीमा से बचाव के जोडी के स्वाभाविक रूप से हम सब अपने बच्चों को लगवादे रहे हैं, उनके मामले में भी इस तरह के लक्षण आते रहे है। डॉ. वीरेंद्र सिंह चौहान ने कहा कि भारत में उपलब्ध 3 कोरोना टीके अलग-अलग प्रक्रिया से अलग-अलग निर्माता कंपनियों ने बनाए हैं इसलिए उनके काम करने के तरीके भिन्न भिन्न है। कोवीशील्ड और कोवैक्सीन के दो टीके लगवाने पड़ते हैं। दोनों वैक्सीन के मामले में दो टीमों के बीच की अवधि अलग-अलग है। इनके विपरीत रूस से मंगाया गया स्पूतनिक टीका एक ही बार लगता है।

ग्रामवासियों को डॉ. वीरेंद्र सिंह चौहान ने स्पष्ट बताया की कोविड के टीकाकरण का सारा कार्य अब केंद्र सरकार द्वारा नियंत्रित व संचालित किया जा रहा है। सरकारी टीकाकरण केंद्रों पर टीका लगवाने के लिए किसी भी नागरिक को एक भी पैसा खर्च करने की आवश्यकता नहीं है। उन्होंने कहा कि देशभर में टीकाकरण अभियान दिनों दिन तेजी पकड़ रहा है। उन्होंने कहा टीकाकरण को लेकर यदि ग्रामवासियों के मनों में कोई संदेह अथवा सवाल हैं तो वे रेडियो ग्रामोदय की हेल्पलाइन 8816904904 पर कॉल कर सलाह ले सकते हैं। डॉ. चौहान ने कोरोना संबंधी जागरूकता और विशेषकर टीकाकरण के कार्यक्रम में मदद के लिए आगे आने वाले सामाजिक संगठनों प्रशंसा की और कहा कि समाज और देश पर जब-जब कोई आपदा आए तो सब लोगों को परस्पर मतभेदों को भुलाकर एकजुटता के साथ कार्य करना चाहिए।

इस अवसर पर भाजपा नेता वेद तनेजा, सुभाष कुमार, राम निवास, सुखबीर, नाथीराम, सतपाल, धरमपाल, वीरभान, बागड़ी, राजेश, जीतराम, शिव कुमार, काला, अंग्रेज, संजीव, नरेश, अशोक, भूरा व अन्य ग्रामीण उपस्थित रहे ।

शराब का सेवन कोरोना से नहीं बचाता

कार्यक्रम के दौरान एक श्रमिक ने कहा कि उसने कोरोना का टीका लगवाना इसलिए जरूरी नहीं समझा क्योंकि वह हर रोज शराब पी लेता है और उसकी मान्यता है कि शराब के सेवन से कोरोना का वायरस मर जाता है। श्रमिक का कहना था कि जब सैनिटाइजर में मौजूद शराब से वायरस मर जाता है शराब के सेवन से कोरोना से बचाव होना चाहिए।बहुत गंभीरता के साथ की गई ग्रामवासी की इस टिप्पणी पर कार्यक्रम में उपस्थित अधिकांश लोग खुलकर हंसे। डॉ. वीरेंद्र सिंह चौहान ने कहा कि शराब पीने वाले को कोरोना नहीं होगा, यह एक खतरनाक भ्रांति और मूर्खतापूर्ण सोच है। विश्व स्वास्थ्य संगठन और भारत के स्वास्थ्य मंत्रालय के विशेषज्ञ बारंबार इस बारे में स्पष्ट कर चुके हैं कि मदिरापान कोरोना से बचाव का कवच नहीं। डॉ. चौहान ने कहा कि शराब पीना वैसे भी सेहत के लिए घातक है और कोरोना से बचाव का मदिरापान से कोई संबंध नही।

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हिंसा किसी डॉक्टरी चूक का समाधान नहीं : डॉ चौहान

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रेडियो ग्रामोदय के कार्यक्रम जय हो में राष्ट्रीय चिकित्सक दिवस पर चिकित्सकों की समस्याओं पर चर्चा

करनाल। हर पेशे में कुछ खराब लोग हो सकते हैं। मेडिकल प्रोफेशन इससे अछूता नहीं है। कोई भी डॉक्टर अपने मरीज का नुकसान नहीं चाहता। मानवीय चूक उनसे भी संभव है, लेकिन हिंसा किसी डॉक्टरी चूक का समाधान नहीं है। डॉक्टर अपने मरीज को ठीक कर ही देगा, चिकित्सकों से ऐसे चमत्कार की उम्मीद नहीं करनी चाहिए। यह विचार हरियाणा ग्रंथ अकादमी के उपाध्यक्ष एवं भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता डॉ. वीरेंद्र सिंह चौहान ने रेडियो ग्रामोदय पर ‘जय हो’ कार्यक्रम में प्रसिद्ध बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. संदीप अब्रोल, वरिष्ठ नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. राजेंद्र चौहान और करनाल स्थित कल्पना चावला मेडिकल कॉलेज के वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. राजेश गर्ग के साथ चर्चा के दौरान व्यक्त किए। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि नियति मनुष्य को जिस रास्ते पर लेकर आ जाती है, वह अन्य रास्ते कभी बंद नहीं करती। डॉ. बिधान चंद्र रॉय भारतीय उपमहाद्वीप के एक ख्याति प्राप्त दुर्लभ चिकित्सक होने के साथ-साथ एक शानदार राजनेता भी थे। वह 14 वर्षों तक बंगाल के मुख्यमंत्री के पद पर रहे।

डॉ चौहान ने बताया कि डॉ. बी सी राय की जन्म एवं पुण्यतिथि दोनों 1 जुलाई ही है। बिहार में जन्मे डॉ. बी सी राय दो बार पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री बने। उन्हें कोलकाता का मेयर बनने का भी अवसर प्राप्त हुआ था। डॉ. रॉय एशियाई महाद्वीप के पहले मेडिकल कंसलटेंट थे।

डॉ.चौहान ने डॉ. संदीप अबरोल और डॉ. राजेश गर्ग से पूछा कि करोना काल में चिकित्सकों को किन- किन परेशानियों का सामना करना पड़ा? इस पर दोनों चिकित्सकों ने बताया कि कोरोना काल में उन्हें काफी कठिन चुनौतियों का सामना करना पड़ा। डॉ. अबरोल ने बताया कि 22 साल के करियर में इतना कठिन समय कभी देखने को नहीं मिला था। शुरू में अस्पताल में ऑक्सीजन की बहुत कमी थी, लेकिन 1 हफ्ते के अंदर ऑक्सीजन की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित कर दी गई।

आज चिकित्सक बनना कितना सरल है? डॉ चौहान के इस सवाल पर डॉ राजेश गर्ग ने कहा कि एक डॉक्टर की डिग्री लेना आज अत्यंत कठिन कार्य हो गया है। सरकारी और प्राइवेट संस्थानों में मेडिकल की पढ़ाई के खर्च में आसमान जमीन का अंतर है। सरकारी मेडिकल कॉलेजों में जहां इसकी पढ़ाई में प्रतिवर्ष 40 से ₹50000 खर्च करने पड़ते हैं, वही प्राइवेट मेडिकल कॉलेजों में इसकी पढ़ाई का खर्च प्रतिवर्ष 13 से 15 लाख रुपये तक है। पूरे एमबीबीएस कोर्स की पढ़ाई का खर्च 70 से 80 लाख रुपये के बीच बैठता है। यह आम लोगों की पहुंच से बाहर है। उन्होंने कहा कि यूपीएससी की तर्ज पर इंडियन मेडिकल सर्विसेज बनाने की मांग वर्ष 1966-67 से ही हो रही है।

डॉ. संदीप अबरोल ने कहा कि डॉक्टरी के पेशे में वह स्वेच्छा से आए। मरीजों को स्वस्थ होते देखकर लगता है कि उनकी मेहनत सफल हुई। यह उन्हें बहुत खुशी प्रदान करता है। उन्होंने कहा कि उनका डॉक्टरी का सफर काफी कठिन रहा और कई बार असफलताएं भी हाथ लगी।

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