कोरोना से जंग में सकारात्मक ऊर्जा जरूरी, संकट का यह अस्थायी दौर : डॉ. चौहान

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रेडियो ग्रामोदय के वेकअप करनाल कार्यक्रम में कोविड अस्पतालों के आंतरिक हालात पर चर्चा

करनाल। कोरोना से जंग में मनोदशा की भूमिका दवाओं से कम नहीं। अपनी सकारात्मक सोच और दृढ़ इच्छाशक्ति के कारण कोरोना के कई गंभीर मरीज स्वस्थ होकर घर लौट आए और कई अपेक्षाकृत कम गंभीर मरीज भी हौसला छोड़ देने के कारण जिंदगी की जंग हार बैठे। संकट का यह अस्थायी दौर है, शीघ्र टल जाएगा। इसलिए सकारात्मक रहें और नुकसान को न्यूनतम करने का प्रयास करें।

उपरोक्त विचार बिंदु रेडियो ग्रामोदय के वेकअप करनाल कार्यक्रम में हरियाणा ग्रंथ अकादमी के उपाध्यक्ष डॉ. वीरेंद्र सिंह चौहान और कोरोना से जंग जीतकर घर लौटे रोहतक निवासी शमशेर दहिया के बीच हुई चर्चा के दौरान उभरकर सामने आए। कार्यक्रम के दौरान वरिष्ठ पत्रकार एवं टीवी एंकर रोहित सरदाना की कोरोना से हुई मौत पर अपनी भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए डॉ. चौहान ने कहा कि कोरोना से दिनोंदिन विकराल हो रही स्थिति के मद्देनजर यह जरूरी है कि हर व्यक्ति इसके वैक्सीन का टीका अवश्य ले। इससे कम से कम इतना भरोसा तो किया ही जा सकता है कि वैक्सीनेशन के बाद यदि संक्रमण होता भी है तो यह जानलेवा नहीं होगा।

चर्चा के दौरान अस्पतालों में उपचार के हालात, वहां व्याप्त कमियों और मेडिकल स्टाफ पर पड़ रहे काम के अत्यधिक बोझ की भी चर्चा हुई। कोरोना से जंग जीतकर लौटे रोहतक के शमशेर दहिया ने अपना अनुभव साझा करते हुए कहा कि अपने उपचार के दौरान उन्होंने अस्पताल में कुछ व्यवस्थागत कमियों को महसूस किया जिन्हें मात्र थोड़े से प्रयास से दूर किया जा सकता है। रोहतक पीजीआई का जिक्र करते हुए दहिया ने कहा कि वहां डॉक्टरों ने उनका पूरा ध्यान रखा और उनकी मदद की। 1 अप्रैल को कोरोना पॉजिटिव होने की रिपोर्ट आने के बाद उन्हें अगले 12 दिन अस्पताल में भर्ती रहना पड़ा। इस दौरान काफी कमजोरी महसूस हुई और सांस उखड़ने लगी थी। ऑक्सीजन का स्तर 76 तक चला गया था। अचेत हो जाने पर उन्हें आईसीयू में ले जाया गया।

डॉ. चौहान ने जब पीजीआई रोहतक समेत तमाम अस्पतालों में व्यवस्था सुधार के लिए अपने अनुभव के आधार पर शमशेर दहिया से सुझाव मांगे तो उन्होंने बताया कि कोरोना से संघर्ष के दौरान अस्पताल में उन्हें कई असुविधाओं का भी सामना करना पड़ा। उन्होंने बताया कि मॉड्यूलर आईसीयू वार्ड में 16 मरीजों के लिए मात्र एक स्वीपर है जिसे 8 घंटे के दौरान सभी मरीजों की हर जरूरत का ध्यान रखना पड़ता है। स्वीपर कम होने के कारण डॉक्टरों पर भी काम का अतिरिक्त बोझ पड़ता है। डॉक्टर पहले से ही काम के बोझ से दबे हैं। स्टाफ कम होने के कारण एक-दो मरीजों को अपनी जान से हाथ धोना पड़ा जिन्हें बचाया जा सकता था। दहिया ने बताया कि स्वीपर की संख्या कम होने के कारण वार्ड का शौचालय अत्यंत गंदा रहता है और बदबू भी फैलती है। इसके अलावा आईसीयू वार्ड में मरीजों के पीने के लिए गर्म पानी का भी कोई प्रबंध नहीं है जो कि कोरोना के उपचार में अत्यंत सहायक है। इसके अलावा भोजन की पैकिंग की भी उचित व्यवस्था करने की जरूरत है ताकि यह मरीजों के खाने लायक और गर्म रह सके।

शमशेर दहिया ने बताया कि गर्म पानी के लिए उन्हें अपने घर से इलेक्ट्रिक केतली मंगवानी पड़ी। मरीजों के परिजन अस्पताल में अपने लोगों का हाल जानने के लिए अत्यंत चिंतित रहते हैं और इसे लेकर डॉक्टरों से अक्सर उनकी कहासुनी भी होती रहती है। उन्होंने सुझाव दिया कि मरीजों को अपने परिजनों से वीडियो कॉल करने की व्यवस्था करवाई जाए तो इन झगड़ों को टाला जा सकता है। दहिया ने कोरोना के मरीजों को नींद की दवा भूलकर भी न लेने की सलाह दी और अस्पताल में ऑक्सीजन के लिए ऐडऑन सिलिंडर मास्क स्टॉक में रखने की जरूरत बताई।

उनकी इस सलाह पर सकारात्मक प्रतिक्रिया देते हुए डॉ. चौहान ने कहा कि स्थानीय स्तर पर प्रशासन के लिए जिम्मेदार व्यक्ति की चूक से ही अव्यवस्था फैलती है। केंद्र और राज्य सरकार अस्पतालों में व्यवस्था सुधार के लिए गंभीर है। उन्होंने बताया कि कोरोना संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए हरियाणा सरकार ने राज्य के 9 जिलों में वीकेंड लॉकडाउन की घोषणा की है। सड़क पर लोगों के अनावश्यक विचरण को प्रतिबंधित किया गया है।

शमशेर दहिया ने बताया कि कुछ घरेलू उपाय कोरोना के उपचार में फायदेमंद साबित हो सकते हैं। गर्म पानी का सेवन तो जरूरी है ही, किवी, स्ट्रॉबेरी चुकंदर और तुलसी की चाय का सेवन भी अत्यंत लाभकारी है। इनमें भरपूर विटामिन सी पाया जाता है। पंसारी के यहां मिलने वाले कपूर को कपड़े में बांधकर सूंघने से ऑक्सीजन का स्तर बढ़ता है। कोरोना मरीजों को हमेशा करवट या पीठ के बल ही लेटना चाहिए। यह भी ऑक्सीजन का स्तर बढ़ाने में सहायक होता है।

वैक्सीन के कारण विजयी हुए पूर्व प्रधानमंत्री

वेकअप करनाल में चर्चा के दौरान वैक्सीनेशन की महत्ता को रेखांकित करते हुए डॉ. वीरेंद्र सिंह चौहान ने यह महत्वपूर्ण जानकारी दी कि देश के पूर्व प्रधानमंत्री डॉ मनमोहन सिंह कोरोना से स्वस्थ होकर घर लौट आए हैं। उन्होंने बताया कि वैक्सीनेशन के दोनों डोज लेने के बावजूद डॉ. मनमोहन सिंह कोरोना से संक्रमित हो गए थे और उन्हें दिल्ली के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान में भर्ती कराया गया था। वैक्सीनेशन के कारण उन्हें गंभीर प्रकार का संक्रमण नहीं हो पाया और वह उपचार के बाद शीघ्र स्वस्थ हो गए। ज्ञातव्य है कि डॉ. मनमोहन सिंह एक उम्रदराज व्यक्ति हैं, इसके बावजूद कोरोना उन्हें कुछ खास नुकसान नहीं पहुंचा पाया और वह सकुशल घर लौट आए।

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