ग्रामोदय

Month: May 2021

म्यूकोरमाइकोसिस से निपटने के लिए सरकार ने कसी कमर: डॉ. चौहान

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डॉ. भार्गव के अनुसार मधुमेह से ग्रस्त कोरोना रोगी फंगस के निशाने पर

वेक अप करनाल में वरिष्ठ प्रोफ़ेसर डॉक्टर आदित्य भार्गव के साथ...

करनाल। काले कवक या म्यूकोरमाइकोसिस मधुमेह के मरीज़ों को सर्वाधिक निशाना बना रहा है। पीजीआईएम रोहतक में उपचाराधीन ब्लैक फंगस के अब तक आए कुल संक्रमितों में 95 फ़ीसदी से ज्यादा मरीज़ डायबिटीज ये से ग्रस्त थे। हालांकि यह नहीं कहा जा सकता कि जिन लोगों को मधुमेह न हो उनमें यह संक्रमण नहीं हो सकता। यह दुर्लभ बीमारी नहीं है और इसका शत-प्रतिशत उपचार संभव है। यह छुआछूत से फैलने वाली बीमारी भी नहीं है, इसलिए इसके रोगियों को कोरोना मरीजों की तरह आइसोलेट करने की जरूरत नहीं है।

यह जानकारी रेडियो ग्रामोदय के वेकअप करनाल कार्यक्रम में पीजीआई रोहतक में ईएनटी विभाग के अध्यक्ष डॉ. आदित्य भार्गव ने दी। ब्लैक फंगस पर आयोजित चर्चा में हरियाणा ग्रंथ अकादमी के उपाध्यक्ष डॉ. वीरेंद्र सिंह चौहान ने कहा कि राज्य सरकार ने न केवल इस बीमारी को अधिसूचित कर इससे निपटने के प्रति गंभीरता दिखाई है अपितु के विभिन्न मेडिकल कॉलेजों में इसके उपचार के लिए आरक्षित बेड तैयार रखे हैं। डॉ. भार्गव ने बताया कि यह संक्रमण नाइग्रा प्रजाति के फफूंद से फैलता है जो काले रंग का होता है। तेजी से फैलने वाला यह फंगस हवा में हर जगह मौजूद होता है और नाक की चमड़ी को संक्रमित कर उसे काला कर देता है। किसी भी व्यक्ति के नाक और गले में जीवाणुओं की संख्या सबसे ज्यादा होती है, इसलिए यह अमूमन नाक के रास्ते से ही शरीर में प्रवेश करता है।

डॉ. चौहान ने पूछा कि जब यह फंगस हवा में हर जगह मौजूद होता है तो इसकी चर्चा कोरोना काल में ही क्यों होने लगी है ? डॉ. भार्गव ने बताया कि यह संक्रमण पहले भी होता था लेकिन इसके अत्यंत कम मामले सामने आते थे, जो नगण्य के बराबर थे। यह असामान्य बीमारी है और सिर्फ उन्ही लोगों को होती है जिनकी रोग अवरोधक क्षमता कम हो जाती है। कोरोना से ठीक हुए लोगों और डायबिटीज के मरीजों में संक्रमण अवरोधक क्षमता कम हो जाती है, इसलिए अब इसके ज्यादा मामले सामने आने लगे हैं। स्टेरॉइड का अनियंत्रित प्रयोग भी रोग प्रतिरोधक क्षमता को कम करता है।

कार्यक्रम का संचालन करते हुए प्रवीण धनखड़ ने पूछा कि आम लोग इस संक्रमण के हो जाने पर इसके लक्षणों को कैसे पहचानें? इस पर डॉ. भार्गव ने बताया कि कोरोना से ठीक होने के बाद मरीज जब घर लौटे और उसे दोबारा बुखार आने लगे, नाक से गाढ़ा तरल पदार्थ बहने लगे, सिर में दर्द हो, दांत में संक्रमण हो जाए, तालू के ऊपर काला-काला सा पदार्थ जमने लगे और चेहरे में भी दर्द हो, तो इसे खतरे की घंटी समझना चाहिए और अपने डॉक्टर से तुरंत संपर्क करना चाहिए।

इस संक्रमण को रोकने के उपायों पर डॉ. भार्गव ने कहा कि ब्लैक फंगस का संक्रमण रोकने के लिए नाक और मुंह की नियमित सफाई बहुत जरूरी है। इसके अलावा रात को सोते समय पानी में बीटाडीन दवा डालकर या गर्म पानी में नमक डालकर कुल्ला करना भी फायदेमंद साबित होगा। इसके साथ ही भाप भी लेना जरूरी है। इस संक्रमण से बचने के लिए सबसे ज्यादा जरूरी है कि डायबिटीज को हमेशा नियंत्रण में रखें और समय-समय पर इसकी जांच करवाते रहें।

ब्लैक फंगस से संक्रमित होने वाले लोगों के बचने की संभावना कितनी होती है और इसका उपचार किस प्रकार किया जाता है? इस सवाल पर डॉ. आदित्य भार्गव ने बताया कि इस बीमारी का शत-प्रतिशत इलाज संभव है, लेकिन नाक से फैल कर यह संक्रमण यदि आंख और मस्तिष्क तक पहुंच गया तो परेशानी बढ़ सकती है। नेजल एंडोस्कोपी के माध्यम से इस बीमारी का पता लगाया जाता है और मास फंगस को हटाने के लिए एंडोस्कोपिक सर्जरी की जाती है।

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हिंदी भाषी देश भारत की अदालतों में अंग्रेजी का दबदबा क्यों ? : डॉ. चौहान

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रेडियो ग्रामोदय के वेकअप करनाल कार्यक्रम में कोरोना के अदालती कामकाज पर पड़ने वाले असर पर चर्चा

करनाल। भारत एक हिंदी भाषी देश है और यहां की राजभाषा भी हिंदी है। इसके बावजूद देश की अदालतों में कामकाज की भाषा ब्रिटिश उपनिवेशवाद के काल से लेकर आज तक अंग्रेजी क्यों बनी हुई है? वह दिन कब आएगा जब देश की ऊपरी और निचली सभी अदालतों में हिंदी में कामकाज होना शुरू होगा? इसकी राह में अड़चनें क्या हैं और क्यों हैं?

अदालती कामकाज की भाषा पर यह गंभीर सवाल भारतीय जनमानस में हमेशा से कौंधते रहे हैं। हरियाणा ग्रंथ अकादमी के उपाध्यक्ष डॉ. वीरेंद्र सिंह चौहान ने भी रेडियो ग्रामोदय के वेकअप करनाल कार्यक्रम में चर्चा के दौरान यह महत्वपूर्ण सवाल उठाए। कोरोना के अदालती कामकाज पर पड़ने वाले प्रभावों पर हुई चर्चा में उनके साथ शामिल थे करनाल जिला अदालत के वरिष्ठ वकील सुरेश गोयल। एडवोकेट सुरेश गोयल ने भी यह मुद्दा उठाते हुए कहा कि अदालतों में सुनवाई भले हिंदी में हो, लेकिन बाकी सभी प्रक्रियाएं अंग्रेजी में ही पूरी होती हैं।

जिला अदालतों में हिंदी में कितना काम होता है और अंग्रेजी का दबदबा कितना है? डॉ. चौहान के इस सवाल पर एडवोकेट गोयल ने बताया कि अदालतों में ड्राफ्टिंग और बहस का 95% काम अंग्रेजी में ही होता है। जिला अदालतों में कम से कम इतनी छूट है कि कुछ पीठासीन पदाधिकारी हिंदी में बहस करने की अनुमति दे देते हैं, लेकिन उस बहस की ड्राफ्टिंग और अन्य दस्तावेजी प्रक्रिया का अंग्रेजी में ही अनुवाद होता है। जहां तक अड़चनों का सवाल है, इसके लिए जनमानस की सोच बदलनी होगी। हमें अपनी राजभाषा पर गर्व करना होगा और हिंदी के प्रचार-प्रसार को बढ़ावा देना होगा। यह सोचने वाली बात है कि जिस देश की एक बड़ी आबादी गांवों के उन इलाकों में निवास करती हो जहां साक्षरता दर कम है, वहां की अदालतों में अंग्रेजी में न्याय दिया जाता है।

एडवोकेट गोयल ने बताया कि अदालतों में हिंदी में कामकाज को बढ़ावा देने के लिए उनका संगठन कार्य कर रहा है। इस दिशा में उनके संगठन भारत भाषा अभियान की ओर से हाल में एक बैठक भी बुलाई गई थी जिसमें बार एसोसिएशन के कई पदाधिकारी शामिल हुए थे। गोयल ने यह भी बताया कि उत्तर प्रदेश की निचली अदालतों में हिंदी में कामकाज होता है और वह कुछ मामलों में शामिल भी हो चुके हैं।

ग्रंथ अकादमी उपाध्यक्ष डॉ. चौहान ने कहा कि कोरोना से सबका जीवन प्रभावित हुआ है। अदालत भी उनमें से एक हैं। अदालतों में इन दिनों क्या-क्या काम हो रहे हैं और कौन-कौन से काम बंद पड़े हैं? उनके इस सवाल पर गोयल ने बताया कि कोरोना का न्यायिक प्रक्रिया पर भी बहुत घातक प्रभाव पड़ा है। माननीय हाईकोर्ट के आदेश पर अदालतों में फरियादियों, वकीलों और न्यायिक अधिकारियों का आना सीमित कर दिया गया है। केवल आपात मामलों की ही सुनवाई की जा रही है, जैसे जमानत और स्टे मामले। अर्जेंट मामलों में सिर्फ जमानत और सुपरदारी आदि के मामले ही सुने जा रहे हैं।

पिछले साल लॉकडाउन खुलने के बाद न्यायिक प्रक्रिया से जुड़े लोगों को यह आदेश दिए गए थे कि मामलों की सुनवाई में स्थगन आदेश से यथासंभव बचा जाए और मामलों को जल्द से जल्द निपटाया जाए। अदालतों में पहले से ही लंबित मामलों की एक लंबी लिस्ट है। कोरोना से उत्पन्न स्थिति के कारण अदालतों में मामलों का बैकलॉग बढ़ना तय है।

चर्चा के दौरान डॉ. चौहान ने बताया कि गांव में कोरोना की स्थिति चिंताजनक है। गांव सालवन में चार और राहडा में तीन लोगों के कोरोना से मरने की खबर है जबकि गांव गोंदर में कई दिनों से मौत का सिलसिला जारी है। इस पर एडवोकेट गोयल ने भी कहा कि गांवों मैं करोना गाइडलाइंस का सही तरीके से पालन नहीं किया जा रहा है। ना लोग मास्क लगा रहे हैं, न ही अपने घरों में रुक रहे हैं। वे सामाजिक दूरी भी नहीं बरत रहे। संक्रमण का यह फैलाव इसी का नतीजा है।

चर्चा में भाग लेते हुए पत्रकार हरविंदर यादव ने रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया में कुछ समस्याओं की ओर ध्यान दिलाया। उन्होंने कहा कि वैक्सीनेशन को लेकर कुछ समस्याएं पेश आ रही हैं। रजिस्ट्रेशन कराने के वक्त लोगों को शेड्यूल नहीं मिल पा रहे। मैनुअल मोड पर रखने से परेशानी हो रही है और लोगों को लंबा इंतजार करना पड़ रहा है।

डॉ. चौहान ने कहा कि कोरोना के इस दौर में एक नई खतरनाक बीमारी ब्लैक फंगस का पता चला है। समय पर अगर इस फंगस का इलाज ना हो तो यह व्यक्ति की मौत का कारण भी बन सकता है। संतोष की बात यह है कि ब्लैक फंगस का इलाज संभव है। हरियाणा सरकार ने कोरोना को एक अधिसूचित बीमारी घोषित किया है। स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज की अधिसूचना के बाद अब हरियाणा के सभी डॉक्टरों व स्वास्थ्य कर्मचारियों के लिए यह अनिवार्य हो गया है कि ब्लैक फंगस का कोई भी मामला सामने आए तो उन्हें इसकी सूचना स्थानीय अस्पताल एवं सिविल सर्जन को देनी होगी।

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बदलते मौसम के अनुसार पशुधन का ध्यान रखना ज़रूरी: डॉ. तरसेम

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रेडियो ग्रामोदय के वेकअप करनाल में कोरोना से बचाव और पशुओं की देखभाल पर चर्चा

करनाल। कोरोना संकट के इस काल में पशु पालक अपने पशुधन का भी चौकसी के साथ ख़याल रखें। उन्हें घर में ही मौजूद पोषक आहार दें और वर्तमान मौसम को ध्यान में रखते हुए ख़ूब पानी पिलाते रहें। वरिष्ठ पशु चिकित्सक और निसिंग पशु चिकित्सालय के प्रभारी डॉक्टर तरसेम राणा ने यह टिप्पणी हरियाणा ग्रंथ अकादमी के उपाध्यक्ष डॉ. वीरेंद्र सिंह चौहान के साथ रेडियो ग्रामोदय के वेकअप करनाल में चर्चा के दौरान की। महामारी के दौर में कोरोना से खुद को बचाने और पशुओं की भी उचित देखभाल के उपायों पर चर्चा करते हुए डॉ. चौहान ने कहा कि कोरोना गांवों में भी कहर ढा रहा है।

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पशु चिकित्सक डॉ. तरसेम राणा ने कहा कि ऐसे मौसम में अपनी देखभाल करने के साथ-साथ मवेशियों का भी ध्यान रखना जरूरी है। इस मौसम में हरे चारे का अभाव हो जाने से पशुओं को कई परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
हरा चारा उपलब्ध न हो तो पशुओं को क्या खिलाना चाहिए? डॉ. चौहान के इस सवाल पर डॉ. तरसेम राणा ने कहा कि घर और खेत में जो उपलब्ध हो उसी से काम चलाया जाए। पशुओं को खूब पानी पिलाएं और सूखे चारे के साथ तेल या घी के साथ आटे का पेड़ा बनाकर दो-तीन दिन के अंतराल पर दिया जाए। यह पशुओं का पेट ठीक रखने में मदद करेगा। डॉक्टर तरसेम ने कहा कि जिस मौसम में हरा चारा अधिक होता है उस समय किसानों को उसे कम चारे वाले दिनों के लिए अचार बनाकर रख लेना चाहिए। क्षेत्र में अनेक प्रोग्रेसिव किसान अब अपने स्तर पर आचार तैयार करने लगे हैं और यह अचार बाज़ार में भी उपलब्ध है। उन्होंने कहा कि इसे बनाने की विधि बहुत जटिल नहीं है और अधिक से अधिक किसानों को इसे सीखना चाहिए।
डॉ. तरसेम ने मवेशियों का बीमा कराने पर जोर देते हुए कहा कि सभी किसानों को अपने पशुधन का बीमा अवश्य करवाना चाहिए।

पशु बीमा का प्रीमियम कितना होता है और इसमें कितने तक का बीमा होता है? इस सवाल पर डॉ. राणा ने कहा कि पशु बीमा का प्रीमियम मात्र ₹100 होता है। दूध की उपलब्धता के अनुसार पशुओं के बीमे की राशि तय होती है। उदाहरण के तौर पर यदि 20 लीटर तक दूध देने वाला पशु हो तो ₹80000 तक का बीमा हो सकता है। बीमा हो जाने पर इसकी एक प्रति किसानों को भी दे दी जाती है। उन्होंने पशुओं का पेट ठीक रखने के लिए ज्वार का अचार बनाने की सलाह दी।

कार्यक्रम में कोरोना से जंग जीतकर सकुशल घर लौटे कुरुक्षेत्र निवासी बोधेश्वर दयाल सिंह कौशल ने कोरोना को कतई हल्के में ना लेने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि सर्दी-खांसी और जुकाम होने पर इसे सामान्य फ्लू समझने की भूल ना करें और तुरंत डॉक्टर के पास जाएं। उन्होंने डॉक्टरी उपचार के साथ-साथ घरेलू उपचार भी जारी रखने की सलाह दी। बोधेश्वर ने बताया कि हल्दी वाला दूध, लॉन्ग और इलायची इम्यूनिटी बढ़ाने में मदद करता है। इसके साथ ही बड़े पीपल का चूर्ण भी शहद के साथ लेना स्वास प्रक्रिया के लिए अच्छा है। उन्होंने कहा कि कोरोना से लड़ने के लिए दवाओं के साथ-साथ मजबूत इच्छाशक्ति और अपनों का भावनात्मक समर्थन भी बहुत जरूरी है।

ग्रामीण आइसोलेशन केंद्र चालू

कोरोना का वायरस निरंतर अपना रूप बदल रहा है। बड़े से बड़ा विशेषज्ञ भी आज कोरोना के स्वभाव के बारे में दावे के साथ कुछ भी कहने की स्थिति में नहीं है। इतना तो तय है कि कमजोर प्रतिरोधक क्षमता वालों को यह वायरस सबसे ज्यादा प्रभावित करता है। इसलिए कोरोना से बचाव के लिए अपनी इम्यूनिटी को मजबूत करना बहुत जरूरी है। डबल मास्क लगाएं और पूरी सावधानी बरतें। डॉ. वीरेंद्र सिंह चौहान ने बताया कि ग्रामीण अंचल में मरीज़ों की सुविधा के लिए आइसोलेशन केंद्र बनाए जा रहे हैं। निसिंग, गोंदर, मजूरा, राहड़ा सहित विभिन्न स्थानों पर ऐसे केंद्रों का लोकार्पण हो चुका है।

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टीकाकरण के लिए सिर्फ रजिस्ट्रेशन ही नहीं, बुकिंग भी करवाएं : डॉ. गर्ग

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रेडियो ग्रामोदय के वेकअप करनाल कार्यक्रम में वैक्सीनेशन से जुड़े महत्वपूर्ण पहलुओं पर चर्चा

चर्चा के दौरान महत्वपूर्ण जानकारी देते हुए ग्रंथ अकादमी उपाध्यक्ष डॉ. चौहान ने बताया कि हरियाणा सरकार ने कोविड के खिलाफ एक व्यापक अभियान छेड़ने का फैसला किया है। इसके तहत अगले 10 दिनों के भीतर प्रदेश के सभी गांवों के सभी लोगों की कोविड स्क्रीनिंग की जाएगी। इस स्क्रीनिंग के लिए प्रदेश भर में स्वास्थ्य विभाग के करीब आठ हजार कर्मियों की टीमें रवाना होंगी जो गांवों में कोविड संक्रमण की स्थिति का जायजा लेंगी। इसी रिपोर्ट के आधार पर रोकथाम के लिए कदम उठाए जाएंगे।

असंध। 18 से 44 वर्ष की आयु के लोगों को वैक्सीनेशन के लिए कोविन ऐप पर अपना रजिस्ट्रेशन कराने के साथ-साथ बुकिंग भी करानी होगी। रजिस्ट्रेशन से उल्लिखित साइट पर सिर्फ लोगों का व्यक्तिगत विवरण दर्ज होता है और उन्हें आईडी एवं पासवर्ड जारी किया जाता है, लेकिन बुकिंग कराने से वैक्सीनेशन के लिए उपलब्ध सबसे निकटवर्ती केंद्र और संबंधित व्यक्ति के लिए इस उद्देश्य से निर्धारित की गई अवधि की सटीक जानकारी मिलती है। इसका मकसद एक केंद्र पर भीड़ को इकट्ठा होने से रोकना है।

यह जानकारी रेडियो ग्रामोदय के वेकअप करनाल कार्यक्रम में करनाल के कल्पना चावला मेडिकल कॉलेज के वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. राजेश गर्ग ने हरियाणा ग्रंथ अकादमी के उपाध्यक्ष डॉ. वीरेंद्र सिंह चौहान के साथ वैक्सीनेशन से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर चर्चा के दौरान दी। उन्होंने कहा कि 45 वर्ष से कम आयु के लोगों को बुकिंग कराने पर ही यह जानकारी मिल सकेगी कि किस केंद्र पर उन्हें कितने बजे वैक्सीनेशन के लिए जाना है। ऐसा न करने पर उन्हें केंद्र से लौटना भी पड़ सकता है।

डॉ. राजेश गर्ग ने बताया कि कोविशिल्ड और कोवैक्सीन दोनों स्वदेशी वैक्सीन हैं जो पूरी तरह सुरक्षित हैं। टीका लगने के बाद आने वाला बुखार या हरारत सामान्य लक्षण हैं जिनसे घबराने की कतई जरूरत नहीं है। टीके के प्रभाव हर व्यक्ति पर अलग-अलग देखने को मिल सकते हैं। कोवीशील्ड की दो खुराकों के बीच अंतर बढ़ाकर अब 12 से 16 हफ्ते इसलिए किया गया है क्योंकि विदेशों में इसके बेहतर परिणाम देखे गए हैं। कोवैक्सीन की दो खुराकों के बीच का अंतर अब भी 4 हफ्ते ही है। 18 से 44 वर्ष के लोगों के लिए एक मोबाइल फोन से एक ही व्यक्ति का रजिस्ट्रेशन होगा। वैक्सीन की दूसरी खुराक के लिए उन्हें उसी मोबाइल से दोबारा रजिस्टर कराना होगा।

डॉ. चौहान ने बताया कि मरीजों को डोर-टू-डोर ऑक्सीजन उपलब्ध कराने के लिए सरकार संकल्पबद्ध है। मनोहर लाल खट्टर की सरकार ने ग्लोबल टेंडर आमंत्रित कर वैक्सीन का विदेशों से आयात करने का फैसला किया है। इससे प्रदेश में वैक्सीन का संकट दूर हो जाने की उम्मीद है। उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा निर्धारित शुल्क से अधिक फीस लेने वाले अस्पतालों के खिलाफ सरकार कड़ी कार्रवाई करेगी। इसके अलावा गांवों में लोगों की अनियंत्रित आवाजाही को रोकने के लिए मुख्यमंत्री ने फिर से ठीकरी पहरा लगाने के आदेश जारी किए हैं।

टीकाकरण के दूसरे-तीसरे चरण में लोगों की प्रतिक्रिया पहले से बेहतर दिखती है, लेकिन अब भी कुछ लोगों में भ्रम बाकी है। इस संबंध में आम भ्रांतियां क्या हैं और उन्हें कैसे दूर किया जा सकता है? डॉ. चौहान के इस सवाल पर डॉ. राजेश गर्ग ने बताया कि टीकाकरण की शुरुआत में लोगों में काफी उदासीनता का भाव था। लोग टीकों को संदेह की नजरों से देख रहे थे, लेकिन अब इसके प्रति लोगों का नजरिया बदला है। लोग टीकाकरण के प्रति गंभीर हुए हैं और 18 से 44 आयु वर्ग के लोग बढ़-चढ़कर टीकाकरण में भाग ले रहे हैं। कल्पना चावला अस्पताल में तो टीका लगवाने वालों का एक दिन में 284 का आंकड़ा भी दर्ज किया गया। अस्पताल में आईसीयू बेड की संख्या भी बढ़कर 90 के करीब हो गई है और आइसोलेशन बेड की संख्या अब 190 है।

चर्चा में असंध से सामाजिक कार्यकर्ता नरेंद्र शर्मा, पधाना से लाभ सिंह, चोरकारसा से बलबीर और सिरसा से देवेंद्र टुटेजा ने भी भाग लिया। नरेंद्र शर्मा ने संक्रमण पर चिंता जताते हुए कहा कि असंध में रोज एक-दो मरीजों की मौत हो रही है। उन्होंने ठीकरी पहरा लगाने की जरूरत बताई। देवेंद्र टुटेजा ने जानना चाहा कि वैक्सीन की एफीकेसी रेट बढ़ाना संभव है या नहीं। इस पर डॉक्टर गर्ग ने बताया कि हर वैक्सीन की अलग संरचना होती है और उसके बनाने का तरीका भी अलग होता है। इसलिए किसी भी वैक्सीन की एफीकेसी रेट को नहीं बढ़ाया जा सकता। असंध से लाभ सिंह ने बुकिंग में तकनीकी समस्या पेश आने का जिक्र किया।


सम्बंधित क्षेत्र में वक्सिनेशन के लिए रजिस्ट्रेशन हेतु स्लॉट उपलब्ध है या नहीं, यह जानना चाहते हैं तो उस क्षेत्र का पिन कोड नंबर 9013151515 नंबर पर व्हाट्सएप करें। स्लॉट की उपलब्धता व्हाट्सएप पर पता चल जाएगी।

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गुरु नानक देव के दिखाए मार्ग में सांप्रदायिक कट्टरता के लिए कोई जगह नहीं : ज्ञानी सूरत सिंह

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प्रकाशोत्सव पर गुरु अंगद देव जी के जीवन एवं कार्यों पर रेडियो ग्रामोदय पर चर्चा आयोजित

करनाल। गुरु नानक देव जी के बाद गुरु गद्दी संभालने वाले गुरु अंगद देव जी ने गुरुमुखी लिपि को उसका वर्तमान स्वरूप प्रदान करने में ऐतिहासिक भूमिका निभाई है। एक तरफ़ जहां उन्होंने अपने अनुयाइयों की शिक्षा की तरफ़ ध्यान देते हुए पाठशालाएँ खोलने की पहल की तो वहीं दूसरी ओर उन्हें अखाड़ों में व्यायाम करने के लिए भी प्रेरित किया। दूसरे पातशाह गुरु अंगद देव जी के प्रकाशोत्सव पर रेडियो ग्रामोदय द्वारा आयोजित की गई चर्चा में ये बिंदु उभरकर सामने आए।

रेडियो ग्रामोदय के संस्थापक व ग्रंथ अकादमी उपाध्यक्ष डॉ. वीरेंद्र सिंह चौहान ने इस अवसर पर ज्ञानी सूरत सिंह के साथ गुरु अंगद देव जी के जीवन और कार्यों पर बातचीत की। अनेक वर्षों तक गुरुद्वारा गुरु सिंह सभा घरौंडा के ग्रंथी रहे ज्ञानी सूरत सिंह ने गुरु अंगद देव के जीवन दर्शन पर विस्तार से प्रकाश डाला।

डॉ. वीरेंद्र सिंह चौहान ने कहा कि नई पीढ़ी अपने महापुरुषों से जुड़ी रहे, इसके लिए महापुरुषों की जयंतियों अथवा उनसे जुड़े अन्य अवसरों पर विभिन्न प्रकार के कार्यक्रमों के माध्यम से उनके जीवन पर बातचीत होनी चाहिए। ओमान से पंकज शर्मा द्वारा पूछे गए एक सवाल के जवाब में ज्ञानी सूरत सिंह ने कहा कि गुरु नानक देव जी के दिखाए रास्ते में जातीय या सांप्रदायिक कट्टरता के लिए कोई जगह नहीं है। गुरु साहिब ने तो खुलकर ऐलान किया था कि मनुष्य की एक ही जाति होती है। जब सब एक ही नूर से उपजे हैं तो फिर भेदभाव की गुंजाइश कहाँ बचती है?

ज्ञानी सूरत सिंह और डॉ. चौहान ने कार्यक्रम के प्रतिभागियों से रूबरू होते हुए कहा कि गुरु नानक देव जी ने ‘गुरू का लंगर’ की जो प्रथा प्रारंभ की थी, गुरु अंगद देव जी ने उसे मज़बूती प्रदान की। वह लंगर प्रथा आज विश्वभर में सिख पंथ की अनूठी पहचान बनी हुई है। आयोजन में गोंदर निवासी गुरविंदर कौर, चोरकारसा से बलबीर सिंह, पानीपत से केदार दत्त व राजेश रावल और भूना से विकास बंसल ने भी अपने विचार व्यक्त किए। गुरु नानक खालसा कॉलेज करनाल के सहायक प्रोफ़ेसर जुझार सिंह ने आयोजन में तकनीकी सहयोग प्रदान किया। कार्यक्रम के अंत में संकल्प लिया गया कि महापुरुषों के जीवन पर चर्चा का यह सिलसिला बदस्तूर जारी रखा जाए।

बेटों के बजाय शिष्य को दी गुरु गद्दी

गुरु अंगद देव जी आध्यात्मिक रूप से पहुँचे हुए शख़्स तो थे ही, उन्होने गुरु के प्रति अपने सेवा भाव और समर्पण के बल पर गुरु नानक देव जी के उत्तराधिकारी के रूप में भी स्वयं को स्थापित किया। कहते हैं कि गुरु नानक देव जी ने कम से कम 19 बार भाई लेहणा नाम के अपने इस शिष्य की परीक्षा ली। इन परीक्षाओं में गुरु नानक देव जी के अपने बेटे भाई लेहणा की समझ-बूझ और समर्पण के सामने अपेक्षाकृत छोटे साबित हुए। गुरु नानक देव जी ने उन्हें गुरु की गद्दी सौंपी और अंगद देव कहकर पुकारा।

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सेल्फ़ ऑडिट करें माताएँ, बच्चों को महापुरुषों के बारे में बताना आवश्यक: चौहान

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महाराणा प्रताप जयंती और अंतर्राष्ट्रीय मातृ दिवस पर ऑनलाइन कवि गोष्ठी

पंचकूला । वो माँ ही है जो अपनी परवरिश से एक बालक को महाराणा प्रताप या छत्रपति शिवाजी जैसा गुणवान और राष्ट्रभक्त बना देती है। हरियाणा ग्रन्थ अकादमी और रेडियो ग्रामोदय के संयुक्त तत्वावधान में महाराणा प्रताप जयंती और अंतर्राष्ट्रीय मातृ दिवस के उपलक्ष्य में आयोजित कवि गोष्ठी में अकादमी उपाध्यक्ष डॉ. वीरेंद्र सिंह चौहान ने यह विचार प्रकट किए । डॉक्टर चौहान ने कहा कि महाराणा प्रताप जयंती पर सब माताएँ संकल्प लें कि वे अपने अपने घर आंगन का ‘सेल्फ़ ऑडिट’ या आत्म समीक्षा करके यह जानने का प्रयास करेंगी कि क्या उनके द्वारा अपने बच्चों को महाराणा प्रताप, गुरु गोविंद सिंह, छत्रपति शिवाजी और शहीद भगत सिंह आदि के जीवन के बारे में बताया और समझाया जा रहा है।

ऑनलाइन कवि गोष्ठी का संचालन कवयित्री नीलम त्रिखा ने किया। कवि गोष्ठी में नीरजा शर्मा, मणि शर्मा “मनु”, अलका शर्मा, नीरू मित्तल, निशा वर्मा आदि रचनाकारों ने भाग लिया। शक्ति और प्रेमस्वरूप माँ और महाराणा प्रताप को याद करते हुए सभी ने अपनी रचनाओं को प्रस्तुत किया ।

महाराणा प्रताप के जीवन से प्रेरणा लेने और राष्ट्र धर्म के अनुपालन के संकल्प को ग्रंथ अकादमी उपाध्यक्ष डॉ. वीरेंद्र सिंह चौहान ने कुछ यूँ अभिव्यक्त किया –
“हल्दी घाटी के पीताम्बर पर जिस ने लोहित रंग भरा
जिसकी केसरी छटा देख काँपा करता मुग़लिया हरा
जिसकी मुट्ठी में सदा रहा स्वातंत्र्य सूत्र का एक सिरा
मेरा आशय प्रताप से है, जो घिरा बहुत पर नहीं गिरा
जिसने स्वराज के बदले में अपना सुख वैभव नहीं वरा
हम उस प्रताप के वंशज हैं जो पराक्रमी था निरा खरा
जिसने परकीय दासता को, बोला हम से हट दूर ज़रा
राणा प्रताप के जन्मदिवस पर गर्वित है यह आर्य धरा “

कवियत्री नीलम त्रिखा ने माँ बनकर गौरवान्वित होने के भाव को अपनी रचना के माध्यम से सबके ह्रदय तक पहुंचाया :
“नसीबो वाली मां, मैं नसीबों वाली
मैंने बेटी का धन पाया है
करी कृपा मेरे प्रभु ने, भेज दिया मेरा साया है”

शिक्षक और कवियत्री नीरजा शर्मा ने माँ की महत्ता को अपने शब्दों में कुछ इस प्रकार अभिव्यक्त किया :
“माँ, माँ ……
शब्द छोटा सा, उपमाएँ इतनी
गिनती न हो जितनी”

कवियत्री मणि शर्मा “मनु” ने माँ की तस्वीर अपनी शब्द तूलिका से कुछ इस प्रकार उकेरी –
“मां तू मातृत्व है, व्यक्तित्व है ,अस्तित्व है
मां तू ममता है ,छाया है ,साया है”

कवियत्री अलका शर्मा माँ के व्यक्तित्व की जीवटता को प्रस्तुत करते हुए अपनी रचना में कहा :
“जिंदगी की विपरीत परिस्थिति में हौसले को बढ़ाते हुए,
जो निडरता से पग रखती है, वह “माँ” होती है।”

माँ को शब्द बंधन में बांधना संभव नहीं. यह कहते हुए कवियत्री निशा वर्मा ने बहुत मार्मिक रचना प्रस्तुत की :
“पर माँ किसी परिभाषा में बांधी नहीं जा सकती
माँ को पूरा वर्णित कर सके ,ऐसा तो आखर ही कोई नहीं।”

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गरीबों को निजी अस्पतालों में इलाज के लिए सरकार देगी आर्थिक सहायता : डॉ. चौहान

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वेकअप करनाल कार्यक्रम में कोरोना के संकट काल में सामाजिक संगठनों की भूमिका पर चर्चा

करनाल। कोरोना महामारी से जूझ रहे प्रदेश के बीपीएल परिवार भी अपना उपचार ठीक से करवा सकें इसके लिए मनोहर लाल खट्टर की सरकार ने आर्थिक सहायता देने की घोषणा की है। गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन कर रहे परिवार के लोगों को निजी अस्पतालों में भर्ती होने पर इलाज के लिए सात दिनों तक ₹5000 प्रतिदिन के हिसाब से दिए जायेंगे। इसके अलावा सरकार ने निजी अस्पतालों में मरीजों से लूट-खसोट को रोकने के लिए उपचार की दरें या पैकेज तय कर दिए हैं ताकि अस्पतालों की मनमानी पर अंकुश लग सके। नई व्यवस्था के तहत कोरोना पॉजिटिव मरीजों के आइसोलेशन बेड का शुल्क ₹8000 प्रति दिन होगा। ऑक्सीजन की जरूरत वाले मरीजों के लिए नॉन आईसीयू ऑक्सीजन बेड का शुल्क ₹13000 प्रति दिन होगा। इसी प्रकार गंभीर मरीजों के लिए ऑक्सीजन सुविधा से युक्त आईसीयू बेड की फीस ₹15000 प्रतिदिन होगी। नकद भुगतान करने वाले मरीजों के लिए इस पैकेज में टेस्ट, दवाएं, बेडसाइड डायलिसिस, डॉक्टर की फीस आदि शामिल हैं। रेम डे सिविर जैसी दवाओं का भुगतान मरीज को इस पैकेज के अतिरिक्त करना होगा। इन दरों को अस्पताल के डिस्चार्ज काउंटरों पर लगाने की व्यवस्था सुनिश्चित की गई है।

उपरोक्त जानकारी रेडियो ग्रामोदय के वेकअप करनाल कार्यक्रम में कोरोना काल में सामाजिक संगठनों की भूमिका पर हरियाणा ग्रंथ अकादमी के उपाध्यक्ष डॉ. वीरेंद्र सिंह चौहान और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के जिला सेवा प्रमुख दिनेश गर्ग तथा विभाग संपर्क प्रमुख कपिल अत्रेजा के बीच चर्चा के दौरान उभरकर सामने आई। डॉ चौहान ने कहा कि समाज का एक-एक जीवन कीमती है। इसलिए कोशिश यही होनी चाहिए कि बीमारी से एक भी प्राण न जाए।
इस संकट काल में सामाजिक संगठन किस प्रकार अपनी भूमिका निभा रहे हैं ? डॉ. चौहान के इस सवाल पर संघ के विभाग संपर्क प्रमुख कपिल अत्रेजा ने बताया कि आरएसएस की कोशिश है कि बीमारी से परेशान होकर अस्पताल आने वाला कोई भी मरीज बिना उपचार के वापस ना जाए। यदि संबंधित अस्पताल में बेड उपलब्ध न भी हो तो जब तक अन्य अस्पतालों में उसके लिए बेड का इंतजाम नहीं हो जाता, तब तक उसे इस अस्पताल में प्राथमिक उपचार मिलता रहे। उन्होंने बताया कि कोरोना मरीजों को अस्पतालों में बेड व अन्य आवश्यक सुविधाएं सुनिश्चित कराने के लिए संगठन ने एक टीम बनाकर 18 अस्पतालों को चिन्हित किया है। इनमें सबसे प्रमुख नाम कल्पना चावला अस्पताल का है।

अस्पतालों में रोज-रोज बदलती स्थितियों पर संघ के कार्यकर्ता किस प्रकार निगरानी रखते हैं? डॉ. चौहान के इस सवाल पर कपिल अत्रेजा ने बताया कि प्रत्येक अस्पताल के लिए एक वरिष्ठ कार्यकर्ता तैनात किया गया है जिसके अंतर्गत 3-4 अन्य कार्यकर्ताओं की टीम अस्पताल में बारी-बारी ड्यूटी देती है। पारदर्शिता बरतने के उद्देश्य से अस्पताल प्रबंधन की ओर से सुबह और शाम बिस्तरों की उपलब्धता की अद्यतन सूची जारी की जाती है जिसमें यह भी बताया जाता है कि उपलब्ध बेड किन-किन सुविधाओं से युक्त है। संघ के कार्यकर्ता अस्पताल के उन बिस्तरों का भी पूरा ब्यौरा मांगते हैं जो खाली नहीं हैं।

संघ के जिला सेवा प्रमुख दिनेश गर्ग ने बताया कि कार्यकर्ताओं की टीमों का जिले के सभी अस्पतालों में संपर्क है और किसी न किसी माध्यम से उन्हें यह सूचना मिल जाती है। उन्होंने बताया कि अस्पताल में बेड के लिए मरीजों के फोन आते ही उन्हें चिकित्सकों की काउंसलिंग टीम के पास भेज दिया जाता है जो उन्हें उचित सलाह देती है। इस टीम में 15 से 20 डॉक्टर शामिल हैं। मरीजों के लिए यह नि:शुल्क परामर्श सेवा संघ की सहयोगी संस्था सेवा भारती के प्रयासों से संभव हो पाया है।

उन्होंने बताया कि सिर्फ ऑक्सीजन की जरूरत वाले मरीजों के लिए अलग से आइसोलेशन सेंटर बनाए गए हैं जिसका मुख्यमंत्री के हाथों लोकार्पण किया गया है। दिनेश गर्ग ने बताया कि कंसल्टेंसी टीम का यह प्रयास है कि यदि बहुत आवश्यक न हो तो मरीजों का घर पर ही उपचार सुनिश्चित किया जा सके। चर्चा के दौरान डॉ. चौहान ने वैक्सीनेशन पर जोर देते हुए कहा कि वैक्सीन लगवाना सबके लिए अत्यंत आवश्यक है। टीका लगने के बाद भी कोरोना हो सकता है, लेकिन तब यह संक्रमण जानलेवा नहीं रहता।

करनाल को मिल रहा 15 टन ऑक्सीजन

कपिल अत्रेजा ने बताया कि ऑक्सीजन सप्लाई की स्थिति में अब सुधार आया है। करनाल जिले को 15 टन ऑक्सीजन की सप्लाई की जा रही है, जिसमें कल्पना चावला अस्पताल को 8 टन और बाकी के 17 अस्पतालों को 7 टन ऑक्सीजन की आपूर्ति की जा रही है। उन्होंने इसे करनाल जिले के लिए पर्याप्त बताया। उन्होंने कहा कि अब ज़िले में ज़रूरतमंद मरीज़ों को उनके घर पर ही ऑक्सीजन की आपूर्ति का सिलसिला भी शुरू हो चुका है।

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ऑनलाइन काव्य संध्या

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मातृ दिवस तथा महाराणा प्रताप जयन्ती के अवसर पर काव्य संध्या

दिनांक – 9 मई 2021 , रविवार
समय – सायं 6 बजे से

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पर्यावरण के महत्व को समझें, गांवों में चले जागरूकता अभियान : डॉ. चौहान

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रेडियो ग्रामोदय के वेकअप करनाल में धरती को हरा-भरा बनाने के उपायों पर चर्चा

करनाल। धरती से मनुष्य का संबंध माता और पुत्र जैसा है। धरती बचेगी, तभी इस पर मौजूद जीवन बचेगा। पर्यावरण को बचाए बिना पृथ्वी को बचाना संभव नहीं है। आज धरती संकट में है, इसीलिए मानव जीवन पर भी बड़ा खतरा मंडरा रहा है। कोरोना समेत विभिन्न कालखंड में उत्पन्न होने वाली महामारी संभवत: पर्यावरण प्रदूषण का ही दुष्परिणाम है। अपनी धरती को हरा-भरा और खुशहाल रखने के लिए हमें हरसंभव प्रयास करने होंगे। पौधरोपण उनमें से एक है।

यह विचार रेडियो ग्रामोदय के वेकअप करनाल कार्यक्रम में पृथ्वी और पर्यावरण संरक्षण के विषय पर करनाल के मंडलीय वन अधिकारी (डीएफओ) नरेश रंगा से चर्चा के दौरान हरियाणा ग्रंथ अकादमी के उपाध्यक्ष डॉ. वीरेंद्र सिंह चौहान ने व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि हमारे पूर्वज पर्यावरण के प्रति अत्यंत सजग एवं दूरदर्शी थे जबकि उस वक्त पृथ्वी पर पर्यावरण का कोई संकट नहीं था। हमारी संपूर्ण जीवन शैली और परंपराएं इस प्रकार निर्धारित की गई कि पृथ्वी और पर्यावरण को कोई नुकसान न पहुंचे और इस पर मौजूद संपूर्ण जीवन सुरक्षित रहे।

डीएफओ नरेश रंगा ने इस अवसर पर कहा कि शुद्ध जल और शुद्ध वायु जीवन का आधार हैं और हर व्यक्ति का मौलिक अधिकार भी। भावी पीढ़ी को शुद्ध जल और शुद्ध वायु देना हम सबका दायित्व है। इसलिए आने वाले कल के लिए हमें अपने वर्तमान को दुरुस्त करना होगा। पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता आज समय की जरूरत है। वन विभाग इस दिशा में कार्य कर रहा है और करनाल के गांवों में बढ़े स्तर पर पौधारोपण किया गया है ।

करनाल जिले में वन क्षेत्र के विस्तार के लिए विभाग ने और क्या-क्या कार्य किए हैं? डॉ. चौहान के इस सवाल पर नरेश रंगा ने बताया कि गांव की जमीन और सड़कों पर पेड़-पौधे लगाने के लिए एक ग्रीन बैंक तैयार किया गया है। करनाल शहर में प्रवेश से लेकर अंदर काफी दूरी तक सड़क के दोनों तरफ पेड़ और फूल वाले पौधे लगाए गए हैं। यहाँ पर पौधारोपण के एक सेगमेंट से दूसरे सेगमेंट की बीच की दूरी जो समान्यत: 4x 4 मीटर होती है उसे घटाकर 2×2 मीटर किया गया है, जिससे अपेक्षाकृत अधिक पेड़-पौधे लगाए जा सके। उन्होंने कहा कि पौधरोपण के लिए पर्याप्त जमीन नहीं मिलती। जमीन को लेकर किसानों से अक्सर संघर्ष चलता रहता है। पौधरोपण किए जाने के बाद किसान उसे आग लगाकर नष्ट कर देते हैं।

डॉ. चौहान ने रंगा से सहमति जताते हुए कहा कि करनाल जिले की ग्रामीण सड़कों पर पौधे लगाने के लिए ग्राम पंचायतों को ही पहल करनी होगी। यह आने वाली पीढ़ी के लिए अत्यंत आवश्यक है। किसानों को जागरूक करने के लिए अभियान चलाना आवश्यक है। समाज और सरकार के बीच कड़ी बनना हमारा दायित्व है।

नरेश रंगा ने बताया कि विभाग के कर्मियों ने गांवों में घर-घर जाकर लोगों को करीब एक लाख पौधे बांटे और ग्रामीणों को प्रेरित किया कि खेत या बाड़े में जहां भी संभव हो, पौधे लगाएं। उन्होंने कहा कि हर व्यक्ति को अपने जीवन में कम से कम 10 पौधे अवश्य लगाने चाहिए। रंगा ने जानकारी दी कि मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने भी स्कूली बच्चों को पौधे लगाने के लिए प्रेरित किया था। इसके तहत करीब 1.25 लाख पौधे लगाने का लक्ष्य है।

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कोरोना ने आयुर्वेद और योग की महत्ता को पुनर्स्थापित किया : डॉ. चौहान

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रेडियो ग्रामोदय के वेकअप करनाल कार्यक्रम में कोरोना के उपचार में आयुर्वेद की भूमिका पर चर्चा

करनाल। कोरोना महामारी से उत्पन्न विश्वव्यापी संकट ने दुनिया में आयुर्वेद और योग की महत्ता को पुनर्स्थापित किया है। कोरोना हमारी श्वसन प्रक्रिया को छिन्न-भिन्न करने वाला एक ऐसा खतरनाक वायरस है जो सीधा हमारे फेफड़ों पर असर करता है और हमारी समस्त प्रतिरोधक क्षमता को नष्ट कर देता है। योग शरीर के सभी अंगों को सक्रिय करने वाला एक ऐसा व्यायाम है जो न सिर्फ फेफड़ों को मजबूत करता है, बल्कि हमारी प्रतिरोधक क्षमता को भी बढ़ाता है। कोरोना से लड़ने में योग से बेहतर कोई विकल्प नहीं जो आयुर्वेद की ही देन है।

उपरोक्त विचार रेडियो ग्रामोदय के वेकअप करनाल कार्यक्रम में हरियाणा ग्रंथ अकादमी उपाध्यक्ष डॉ. वीरेंद्र सिंह चौहान और आयुर्वेद के विशेषज्ञ डॉ. संदीप सिंधड के बीच कोरोना के उपचार में आयुर्वेद की भूमिका पर चर्चा के दौरान उभरकर सामने आए। डॉ. चौहान ने कहा कि आयुर्वेदिक चिकित्सा एवं योगासन कोरोना के प्राणघातक प्रभावों को काफी हद तक कम करने में सक्षम है। संक्रमण के प्रारंभिक चरण में तो अधिकतर मरीज घरेलू उपचार से ही ठीक हो जाते हैं जो वास्तव में आयुर्वेदिक चिकित्सा होती है।

आयुर्वेदिक चिकित्सा के तहत किए जाने वाले विभिन्न उपायों पर प्रकाश डालते हुए असंध निवासी डॉ. संदीप ने कहा कि संक्रमण हो जाने पर मरीज को सर्वप्रथम खुद को आइसोलेट कर लेना चाहिए और हमेशा मास्क का प्रयोग करना चाहिए। इसके अलावा हर दिन सुबह कम से कम एक घंटा सूक्ष्म प्राणायाम अवश्य करना चाहिए। भस्त्रिका, कपालभाति, अनुलोम-विलोम आदि ऐसे योगासन हैं जिनका शत-प्रतिशत असर प्रमाणित है।

जब कोरोना फेफड़ों को जकड़ ले तो क्या करना चाहिए? डॉ. चौहान के इस सवाल पर डॉ. संदीप ने बताया कि नियमित व्यायाम के अलावा मरीजों को रोजमर्रा के खानपान में इम्यूनिटी बढ़ाने वाले आहार को शामिल करना चाहिए। सरकारी अस्पतालों में मिलने वाला आयुष काढ़ा यदि उपलब्ध ना हो तो घर पर ही सोंठ, हल्दी, अदरक, तुलसी व काली मिर्च आदि का काढ़ा तैयार कर दिन में दो-तीन बार इसका सेवन करना चाहिए और पांच छह बार गर्म पानी पीना चाहिए। नियमित रूप से भाप लेना भी फायदेमंद है। डॉ. संदीप ने हर मौसम में चवनप्राश का गर्म पानी के साथ सेवन करने की सलाह देते हुए कहा कि इससे इम्युनिटी बढ़ती है। उन्होंने चवनप्राश को दूध के साथ लेने से मना किया और इसे नुकसानदेह बताया।

डॉ. संदीप ने फ्रिज में रखे भोज्य पदार्थ और न्यूडल, पिज़्ज़ा, बर्गर आदि से बचने की सलाह दी। इस पर सहमति जताते हुए डॉ. चौहान ने कहा कि फ्रिज से रिश्ते को पुन: परिभाषित करने की जरूरत है। फ्रिज का ठंडा खाना कई बीमारियों का कारण बन रहा है। दोनों ने कोरोना से बचने के लिए वैक्सीन के दोनों डोज लगवाने की आवश्यकता को रेखांकित करते हुए कहा कि वैक्सीनेशन के बाद जान जाने का खतरा 90 फ़ीसदी तक कम हो जाता है। आयुर्वेदिक चिकित्सक ने प्राणायाम के तहत एक दिन पेट और दूसरे दिन कमर के बल लेटकर योगासन करने की सलाह दी।

पौधारोपण का लें संकल्प

चर्चा के दौरान डॉ. चौहान ने कहा कि कोरोना से संक्रमित गंभीर मरीज ऑक्सीजन के लिए जद्दोजहद कर रहे हैं और इसके न मिलने पर दम तोड़ देते हैं। इसलिए, प्रकृति प्रदत्त इस अनमोल उपहार को संरक्षित करना हम सबका कर्तव्य है। यह पृथ्वी पर मौजूद जीवन को बचाने के लिए अत्यंत आवश्यक है। इसलिए हम सभी को पौधरोपण पर अधिक ध्यान देना चाहिए। डॉ. चौहान ने आह्वान किया कि हर व्यक्ति कम से कम दो पौधे लगाने का संकल्प अवश्य ले ताकि हमारी भावी पीढ़ी सुरक्षित रह सके और भविष्य में ऑक्सीजन का संकट ना हो।

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