ग्रामोदय

Month: May 2021

आयुर्वेद प्राचीन एवं वैज्ञानिक पद्धति : डॉ. जयदीप

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रेडियो ग्रामोदय के कार्यक्रम ‘जय हो’ में कहा, जून में इस योग शिक्षकों की नियुक्ति तय

करनाल। कोरोना से लड़ने में आयुर्वेदिक दवाओं और योग की उपयोगिता को आज सभी मान रहे हैं। आयुर्वेद की महत्ता विश्व स्तर पर प्रमाणित हो चुकी है। आयुर्वेद बनाम एलोपैथी का विवाद निरर्थक है। यह किसी आयुर्वेद विरोधी रणनीति का हिस्सा हो सकता है।

चिकित्सा विज्ञान में एलोपैथी के योगदान को नकारा नहीं जा सकता। एलोपैथी से विरोध नहीं, उसका भी पूरा सम्मान है, लेकिन चिकित्सा के नाम पर कोई धर्मांतरण का एजेंडा चलाए, भारतीय संस्कृति पर हमला हो, तो उसका मुखर विरोध होना ही चाहिए।यह बिंदु रेडियो ग्रामोदय के कार्यक्रम ‘जय हो’ में हरियाणा योग आयोग के अध्यक्ष डॉ. जयदीप आर्य व हरियाणा ग्रंथ अकादमी उपाध्यक्ष डॉ. वीरेंद्र सिंह चौहान की बातचीत के दौरान उभरकर सामने आए।

योग आयोग के कार्यों पर प्रकाश डालते हुए डॉ. जयदीप आर्य ने इस अवसर पर बताया कि स्कूली पाठ्यक्रमों में भी योग को शामिल करने के लिए एससीईआरटी के साथ मिलकर हरियाणा योग आयोग ने एक सिलेबस तैयार किया है जिसे इसी सत्र से लागू कर दिया जाएगा। हरियाणा देश का एक मात्र ऐसा राज्य है जहां गणतंत्र दिवस एवं स्वतंत्रता दिवस समारोहों में योग को शामिल किया गया है। इन समारोहों में सूर्य नमस्कार समेत योग की अन्य प्रस्तुतियां निर्धारित कर दी गई हैं।

'जय हो' में योग पर वार्ता डॉ. जयदीप आर्य जी के साथ

हरियाणा योग आयोग के अध्यक्ष डॉ. जयदीप आर्य के साथ वार्ता

डॉ. वीरेंद्र सिंह चौहान ने पूछा कि हाल में उत्पन्न हुए आयुर्वेद बनाम एलोपैथ के विवाद को वह किस प्रकार देखते हैं? इस पर डॉ. जयदीप ने कहा कि स्वामी रामदेव के जिस बयान पर विवाद पैदा हुआ, वह उनका अपना बयान नहीं था। उन्होंने व्हाट्सएप पर आए एक संदेश को पढ़कर सुनाया था। कभी भारतीय चिकित्सा विज्ञान काफी उन्नत अवस्था में था, लेकिन स्वाधीनता के बाद इस दिशा में ज्यादा काम नहीं हो पाया। इसमें कोई संदेह नहीं कि देर-सबेर आधुनिक चिकित्सा पद्धति को भारतीय संस्कृति और इसके चिकित्सा विज्ञान की शरण में आना ही होगा।

योग शिक्षकों की नियुक्ति प्रक्रिया प्रारंभ

हरियाणा ग्रंथ अकादमी उपाध्यक्ष डॉ. वीरेंद्र सिंह चौहान के साथ चर्चा में हरियाणा योग आयोग के अध्यक्ष डॉ. जयदीप आर्य ने बताया कि मुख्यमंत्री मनोहरलाल खट्टर और स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज की अगवाई में हरियाणा सरकार भारत की पारंपरिक चिकित्सा पद्धति को गौरवपूर्ण स्थान दिलाने के लिए विभिन्न परियोजनाओं पर काम कर रही है। इसके तहत प्रदेश के गावों में एक हजार योगशालाओं के निर्माण का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।इसके लिए 1500 करोड़ रुपए आवंटित कर दिए गए हैं। अब तक 528 व्यायामशालाओं का निर्माण पूरा हो चुका है और इनमें योग शिक्षकों की नियुक्ति की प्रक्रिया भी जून के पहले हफ्ते तक पूरी कर ली जाएगी।

उन्होंने कहा कि जिला स्तरीय चयन समितियों को जल्द से जल्द ही यह कार्य पूरा करने के लिए कहा गया है। इस प्रक्रिया में पुराने योग शिक्षकों को वरीयता देने के लिए 5% का कोटा निर्धारित किया गया है। डॉक्टर जयदीप के अनुसार अंततः एक हज़ार योग शिक्षकों की नियुक्ति होनी है नहीं और पूर्व में कार्य कर चुके अधिकांश योग शिक्षक नई व्यवस्था में नई प्रक्रिया के अनुसार समाहित हो सकेंगे.योग शिक्षकों की नियुक्ति के लिए क्या-क्या योग्यताएं निर्धारित की गई हैं? डॉ. चौहान के इस सवाल पर डॉ. जयदीप ने बताया कि योग शिक्षकों की अर्हता के तौर पर योग में डिप्लोमा एवं लेवल-वन का सर्टिफिकेट होना आवश्यक है जो किसी मान्यता प्राप्त संस्था या आर्ट ऑफ लिविंग, पतंजलि योगपीठ आदि से प्रमाणित हो।

भेंटवार्ता की ऑडियो यहाँ सुना जा सकता है….

कोरोना संक्रमण से बचाव कैसे करें

आयुर्वेद विशेषज्ञ डॉ. जयदीप आर्य ने बताया कि कोरोना संक्रमण से बचने का सबसे अच्छा तरीका यही है कि इसके वायरस को फेफड़ों तक नहीं पहुँचने दिया जाए और संक्रमण के पहले दो तीन दिन में नाक और गले में ही मार दिया जाए। इसमें आयुर्वेद एवं योग अत्यंत प्रभावकारी भूमिका निभा सकता है। नाक में सरसों का तेल या गाय के घी को गुनगुना कर डालें, भाप लें, गरारा करें और अनुलोम-विलोम, कपालभाति, भ्रामरी एवं उज्जयी प्राणायाम का अभ्यास नियमित रूप से करें तो कोरोना संक्रमण से बचा जा सकता है।

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व्यायामशालाओं को जल्द मिलेंगे योग शिक्षक : डॉ. जयदीप

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' जय हो ' में आज वार्ता डॉ. जयदीप आर्य जी के साथ

आयुर्वेद प्राचीन एवं वैज्ञानिक पद्धति, एलोपैथी का अपना महत्व है : डॉ. जयदीप
रेडियो ग्रामोदय के कार्यक्रम ‘जय हो’ में कहा, जून में इस योग शिक्षकों की नियुक्ति तय

पंचकूला / करनाल। कोरोना से लड़ने में आयुर्वेदिक दवाओं और योग की उपयोगिता को आज सभी मान रहे हैं। आयुर्वेद की महत्ता विश्व स्तर पर प्रमाणित हो चुकी है। आयुर्वेद बनाम एलोपैथी का विवाद निरर्थक है। यह किसी आयुर्वेद विरोधी रणनीति का हिस्सा हो सकता है। चिकित्सा विज्ञान में एलोपैथी के योगदान को नकारा नहीं जा सकता। एलोपैथी से विरोध नहीं, उसका भी पूरा सम्मान है, लेकिन चिकित्सा के नाम पर कोई धर्मांतरण का एजेंडा चलाए, भारतीय संस्कृति पर हमला हो, तो उसका मुखर विरोध होना ही चाहिए।यह बिंदु रेडियो ग्रामोदय के कार्यक्रम ‘जय हो’ में हरियाणा योग आयोग के अध्यक्ष डॉ. जयदीप आर्य व हरियाणा ग्रंथ अकादमी उपाध्यक्ष डॉ. वीरेंद्र सिंह चौहान की बातचीत के दौरान उभरकर सामने आए।

योग आयोग के कार्यों पर प्रकाश डालते हुए डॉ. जयदीप आर्य ने इस अवसर पर बताया कि स्कूली पाठ्यक्रमों में भी योग को शामिल करने के लिए एससीईआरटी के साथ मिलकर हरियाणा योग आयोग ने एक सिलेबस तैयार किया है जिसे इसी सत्र से लागू कर दिया जाएगा। हरियाणा देश का एक मात्र ऐसा राज्य है जहां गणतंत्र दिवस एवं स्वतंत्रता दिवस समारोहों में योग को शामिल किया गया है। इन समारोहों में सूर्य नमस्कार समेत योग की अन्य प्रस्तुतियां निर्धारित कर दी गई हैं।

डॉ. वीरेंद्र सिंह चौहान ने पूछा कि हाल में उत्पन्न हुए आयुर्वेद बनाम एलोपैथ के विवाद को वह किस प्रकार देखते हैं? इस पर डॉ. जयदीप ने कहा कि स्वामी रामदेव के जिस बयान पर विवाद पैदा हुआ, वह उनका अपना बयान नहीं था। उन्होंने व्हाट्सएप पर आए एक संदेश को पढ़कर सुनाया था। कभी भारतीय चिकित्सा विज्ञान काफी उन्नत अवस्था में था, लेकिन स्वाधीनता के बाद इस दिशा में ज्यादा काम नहीं हो पाया। इसमें कोई संदेह नहीं कि देर-सबेर आधुनिक चिकित्सा पद्धति को भारतीय संस्कृति और इसके चिकित्सा विज्ञान की शरण में आना ही होगा।

कोरोना काल में आयुर्वेद और योग की भूमिका को किस प्रकार आंका जा सकता है? डॉ. चौहान के इस सवाल पर डॉ. जयदीप ने कहा कि कोरोना से संक्रमित हुए करीब 85% मरीज योग और आयुर्वेद के उपचार से ठीक हुए। इसका आयुष मंत्रालय के ऐप पर प्रमाणिक दस्तावेज मौजूद है जिसे दुनिया भर के विशेषज्ञों ने माना है। हरियाणा पहला ऐसा राज्य है जिसने कोरोना मरीजों के उपचार के लिए दी जाने वाली कोरोना किट में एलोपैथी दवाओं के साथ-साथ आयुर्वेदिक दवाएं भी शामिल करने का साहस दिखाया और इसके व्यापक सकारात्मक परिणाम सामने आए। वायुमंडल में मौजूद कोरोना वायरस को नष्ट करने के लिए प्रदेश के गांव-गांव में यज्ञ के वाहन चलाए गए। कोरोना के उपचार में कोरोनिल अत्यंत लाभकारी है।

योग शिक्षकों की नियुक्ति प्रक्रिया प्रारंभ

हरियाणा ग्रंथ अकादमी उपाध्यक्ष डॉ. वीरेंद्र सिंह चौहान के साथ चर्चा में हरियाणा योग आयोग के अध्यक्ष डॉ. जयदीप आर्य ने बताया कि मुख्यमंत्री मनोहरलाल खट्टर और स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज की अगवाई में हरियाणा सरकार भारत की पारंपरिक चिकित्सा पद्धति को गौरवपूर्ण स्थान दिलाने के लिए विभिन्न परियोजनाओं पर काम कर रही है। इसके तहत प्रदेश के गावों में एक हजार योगशालाओं के निर्माण का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।इसके लिए 1500 करोड़ रुपए आवंटित कर दिए गए हैं। अब तक 528 व्यायामशालाओं का निर्माण पूरा हो चुका है और इनमें योग शिक्षकों की नियुक्ति की प्रक्रिया भी जून के पहले हफ्ते तक पूरी कर ली जाएगी।

उन्होंने कहा कि जिला स्तरीय चयन समितियों को जल्द से जल्द ही यह कार्य पूरा करने के लिए कहा गया है। इस प्रक्रिया में पुराने योग शिक्षकों को वरीयता देने के लिए 5% का कोटा निर्धारित किया गया है। डॉक्टर जयदीप के अनुसार अंततः एक हज़ार योग शिक्षकों की नियुक्ति होनी है नहीं और पूर्व में कार्य कर चुके अधिकांश योग शिक्षक नई व्यवस्था में नई प्रक्रिया के अनुसार समाहित हो सकेंगे.योग शिक्षकों की नियुक्ति के लिए क्या-क्या योग्यताएं निर्धारित की गई हैं? डॉ. चौहान के इस सवाल पर डॉ. जयदीप ने बताया कि योग शिक्षकों की अर्हता के तौर पर योग में डिप्लोमा एवं लेवल-वन का सर्टिफिकेट होना आवश्यक है जो किसी मान्यता प्राप्त संस्था या आर्ट ऑफ लिविंग, पतंजलि योगपीठ आदि से प्रमाणित हो।

कोरोना संक्रमण से बचाव कैसे करें

आयुर्वेद विशेषज्ञ डॉ. जयदीप आर्य ने बताया कि कोरोना संक्रमण से बचने का सबसे अच्छा तरीका यही है कि इसके वायरस को फेफड़ों तक नहीं पहुँचने दिया जाए और संक्रमण के पहले दो तीन दिन में नाक और गले में ही मार दिया जाए। इसमें आयुर्वेद एवं योग अत्यंत प्रभावकारी भूमिका निभा सकता है। नाक में सरसों का तेल या गाय के घी को गुनगुना कर डालें, भाप लें, गरारा करें और अनुलोम-विलोम, कपालभाति, भ्रामरी एवं उज्जयी प्राणायाम का अभ्यास नियमित रूप से करें तो कोरोना संक्रमण से बचा जा सकता है।

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विघटनकारी तत्वों के भरोसे ना छोडें राजनीति , कर्मठ को मौका दें

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रेडियो ग्रामोदय के ‘म्हारे गाम की बात’ कार्यक्रम में गांव राहड़ा पर चर्चा

 

असंध । देश और राज्यों का विकास एवं उनका सुचारू संचालन संस्थागत माध्यमों से ही संभव है। इस व्यवस्था का निर्माण राजनीतिक प्रणाली से ही हो सकता है। इसे इस तरह समझा जाए कि हमारे सामाजिक जीवन का नियमन और संचालन करने के लिए किसी ना किसी व्यवस्था का होना जरूरी है। व्यवस्थाहीन समाज को ही जंगलराज कहते हैं। इसलिए, उस व्यवस्था के निर्माण के लिए जो माध्यम विकसित हुआ उसे ही राजनीति कहते हैं। अच्छी शासन व्यवस्था और शांतिपूर्ण जीवन-यापन के लिए कर्मठ एवं इमानदार लोगों को आगे आना होगा। राजनीति में उनकी सख्त जरूरत है।

उपरोक्त विचार रेडियो ग्रामोदय के कार्यक्रम ‘म्हारे गाम की बात’ में राहडा के ग्रामीणों से चर्चा के दौरान हरियाणा ग्रंथ अकादमी के उपाध्यक्ष डॉ. वीरेंद्र सिंह चौहान ने व्यक्त किए। डॉ. चौहान ने यह टिप्पणी सामाजिक कार्यकर्ता और कारोबारी नरेंद्र राणा के उस बयान पर की जिसमें उन्होंने राजनीति को गंदी चीज बताया था और इससे दूर रहने की बात कही थी।

डॉ. चौहान ने कहा कि गावों के विकास के लिए यह जरूरी है कि स्थानीय समस्याएं व आपसी विवाद आपस में ही मिल-बैठकर सुलझा लिए जाएं। आपसी विवाद का थाना-कचहरी तक जाना अच्छी बात नहीं। इससे आपसी सौहार्द और गांव की सामाजिक समरसता पर असर पड़ता है। चर्चा के एक प्रतिभागी शुभम राणा ने भी उनकी इस बात का समर्थन किया।

गांव राहडा की पृष्ठभूमि और वहां विकास की स्थिति पर चर्चा करते हुए नरेंद्र राणा ने कहा कि यह गांव कब बसा, इस संबंध में कोई प्रामाणिक जानकारी उपलब्ध नहीं है। इस गांव में तीन पट्टियां हैं और यहां कई जातियों के लोग निवास करते हैं। ग्राम पंचायत का पिछला कार्यकाल संतोषजनक कहा जा सकता है। इस दौरान गांव में विकास के कई कार्य हुए। पाइपलाइन बिछाई गई, पेयजल के लिए मोटर भी लगाया गया। यह मोटर पिछले साल तक तो ठीक कार्य कर रहा था, लेकिन इस साल इसका संचालन सुचारू रूप से नहीं हो पा रहा। गांव की कुछ गलियों के पुनर्निर्माण की जरूरत है।

गांव के कितने लोग सरकारी नौकरियों में हैं? डॉ. चौहान के इस सवाल पर टिंकू रोजड़ा ने बताया कि सरकारी नौकरियों में काम करने वाले उनके करीब 5-6 दोस्त पिछले पांच साल तक गांव में रहे। उन्होंने बताया कि गांव में 2 लोग ऐसे भी थे जो न्यायिक सेवा में जज के पद पर नियुक्त थे।

टिंकू रोजड़ा ने कहा कि गांव में पानी निकासी की समस्या है और सड़कें भी टूटी हुई हैं। इसके अलावा गांव का स्कूल भवन भी जर्जर अवस्था में है जिसका निर्माण करने की जरूरत है।

टिंकू ने बताया कि दो साल पहले गांव के एक युवा सॉफ्टवेयर इंजीनियर वीरेंद्र ने ग्रामवासियों का डेटाबेस तैयार करने की अभिनव पहल की थी और एक ऐप तैयार किया था जिसकी लॉन्चिंग खुद मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने की थी। इस डेटाबेस में गांववासियों के बारे में संपूर्ण जानकारी उपलब्ध थी। मसलन, गांव का कौन सा व्यक्ति क्या व्यवसाय करता है, कहां तक पढ़ा लिखा है और उसका मोबाइल नंबर क्या है, उसका फोटो आदि। इसके अलावा इस ऐप में यह भी जानकारी थी कि गांव में कितने स्कूल, पेट्रोल पंप, आटा चक्की और नागरिक सुविधा के अन्य साधन उपलब्ध हैं। लेकिन कतिपय कारणों से यह आईडिया सिरे नहीं चढ़ पाया।

डॉ. चौहान ने पूछा कि गांव राहडा में सामूहिक प्रयास से सर्वप्रथम कौन सा कार्य करने की जरूरत है? इस पर टिंकू ने कहा कि गांव में फिलहाल एक श्मशान घाट की सख्त जरूरत है। इसके अलावा गांव को हरा-भरा बनाने के लिए पौधरोपण करने की भी जरूरत है।

डॉ चौहान ने कहा कि गांवों को साफ-सुथरा और हरा-भरा बनाए रखने के लिए सबको मिलकर प्रयास करना होगा। उन्होंने किसानों की समस्याओं को देखते हुए गांव में एक फार्मर प्रोड्यूसर ऑर्गेनाइजेशन (एफपीओ) बनाने की सलाह दी ताकि कृषि उत्पादों के लिए विपणन की समस्या का समाधान हो सके।

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जौहड़ों से हटे अतिक्रमण, ईमानदार व्यक्ति को चुनें पंचायत प्रतिनिधि : डॉ. चौहान

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रेडियो ग्रामोदय के कार्यक्रम ‘म्हारे गाम की बात’ में  बाल-पबाना पर चर्चा

करनाल। हरियाणा के गावों में अधिकतर जौहड़ अतिक्रमण का शिकार हो चुके हैं। सरकारी रिकॉर्ड में उनका जो आकार वर्णित है वह धरातल पर मौजूद नहीं है। जलाशयों पर यह अतिक्रमण जहां जलसंकट का कारण बन रहा है, वहीं इससे पानी निकासी की समस्या भी गंभीर हुई है। इसके परिणामस्वरूप नालियों का गंदा पानी गलियों व सड़कों पर फैलता है और राहगीरों को आने-जाने में परेशानी होती है। प्रदेश सरकार जौहड़ों को संरक्षित करने की दिशा में पुरज़ोर प्रयास कर रही है और इसके लिए हरियाणा तालाब प्राधिकरण गठित किया जा चुका है।

 रेडियो ग्रामोदय के कार्यक्रम ‘म्हारे गाम की बात’ में  बाल-पबाना गाँव से जुड़े मसलों पर ग्रामीणों से चर्चा के दौरान हरियाणा ग्रंथ अकादमी के उपाध्यक्ष डॉ. वीरेंद्र सिंह चौहान ने यह टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि जलाशयों के स्वरूप से कोई छेड़छाड़ नहीं होनी चाहिए। सुप्रीम कोर्ट का भी निर्देश है कि तालाबों का स्वरूप न बदला जाए। लेकिन आज स्थिति यह है कि अतिक्रमण के कारण गांवों में कहीं कहीं तो जौहडों को ढूंढना मुश्किल हो गया है। उन्होंने ग्रामवासियों को आगामी पंचायतीराज के चुनावों में पढ़े लिखे और ईमानदार जन प्रतिनिधि चुनने के लिए कहा जो दोनों ग्रामों की वर्तमान स्थिति में सकारात्मक परिवर्तन की न केवल योजना बनाएँ बल्कि उन्हें प्रभावी ढंग से लागू भी करें।डॉक्टर चौहान ने कहा कि गाँव के विकास कार्यों में अनियमितता के जो मामले जाँच के अधीन हैं उन में दोषी पाए जाने वाले व्यक्तियों को क़ानून सम्मत तरीक़े से दंडित किया जाएगा।

म्हारे गाम की बात…@ रेडियो ग्रामोदय 90.4

चर्चा के दौरान गांव पबाना के समाजसेवी विशाल विलवस ने बताया कि पबाना हसनपुर गांव में विकास की स्थिति संतोषजनक है। दसवीं तक के स्कूल हैं ।पीने के पानी के लिए तीन नलकूपों की भी व्यवस्था है। गांव में अस्पताल के लिए अपना स्थाई भवन है। ग्राम सचिवालय की इमारत अभी निर्माणाधीन है। उन्होंने कहा कि गाँव में स्टेडियम के लिए बजट स्वीकृत होने की जानकारी मिली है और इसके बाद ग्रामवासी इस पर काम शुरू होने की बेसब्री से प्रतीक्षा कर रहे हैं।

डॉ. वीरेंद्र सिंह चौहान ने प्रतिभागियों से ही दोनों गांवों के विकास की वर्तमान स्थिति और भविष्य की योजनाओं पर खुलकर विमर्श किया।इस पर गांव पबाना-हसनपुर के शिक्षक नरेश प्रजापति ने बताया कि गांव में विकास की स्थिति पहले की तुलना में काफ़ी अच्छी है। वहां सभी समुदायों के बीच आपसी भाईचारा बना हुआ है। नरेश ने गांव में स्थित सरकारी स्कूल के सामने गंदगी फैले होने का जिक्र किया और कहा कि इस पर ध्यान देने की जरूरत है। इस पर डॉ. चौहान ने कहा कि स्वच्छता वैसे तो स्थानीय प्रशासन की जिम्मेदारी है, लेकिन गांव वासियों को भी अपने स्तर पर पहल करनी चाहिए।

बाल राजपूतान के रणदीप सिंह ने भी गांव में पानी निकासी की समस्या की ओर ध्यान दिलाया। उन्होंने कहा कि पानी की निकासी न होने के कारण सड़कों पर गंदा पानी फैला रहता है। इस पर डॉ. चौहान ने कहा कि पानी निकासी की समस्या जौहड़ों से कब्जे हटाने के बाद ही दूर हो सकती है।

डॉ. चौहान ने जब सरकारी नौकरियों के मामले में दोनों गांवों की हिस्सेदारी के संबंध में जानना चाहा तो नरेश प्रजापति ने बताया  कि सरकारी नौकरियों के मामले में पबाना-हसनपुर की हिस्सेदारी नाम मात्र की ही है। कई साल पहले गांव में सेना के दो कर्नल निवास करते थे, लेकिन अब वे गांव से बाहर जा चुके हैं। रणदीप सिंह ने बताया कि गांव के सरकारी स्कूल की पढ़ाई तो अच्छी है, लेकिन खेलों के मामले में गांव के बच्चों की कोई खास उपलब्धि नहीं है।

बाल पबाना के लिए जल्द शुरू होगा शैक्षणिक प्रोजेक्ट

चर्चा के दौरान कई ग्रामीणों ने गांव के बच्चों के लिए कोचिंग सेंटर खोलने की जरूरत बताई ताकि उन्हें करियर बनाने के लिए प्रशिक्षित किया जा सके और ख़ासकर सरकारी नौकरियों में गाँव की हिस्सेदारी बढ़े। नरेश प्रजापति ने कहा कि गांव में मेडिकल की पढ़ाई के लिए कोई व्यवस्था नहीं है। विशाल विलवस  ने भी कहा कि गांव के बच्चों को प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए उचित मार्गदर्शन नहीं मिल पाता। यह मार्गदर्शन बिना कोचिंग सेंटर खोले नहीं हो सकता। इस पर डॉ. वीरेंद्र सिंह चौहान ने कहा कि दोनों गांवों में ग्रामोदय समितियों का गठन कर जल्द ग्रामोदय अभियान की ओर से ऑनलाइन करियर काउंसलिंग केंद्र से शुरू किया जाएगा।

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शिक्षा और स्वास्थ्य सेवा व्यापार नहीं, पेटेंट फ्री हो कोरोना वैक्सीन : सतीश

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रेडियो ग्रामोदय के वेकअप करनाल कार्यक्रम में पेटेंट फ्री कोरोना वैक्सीन अभियान पर चर्चा

करनाल। शिक्षा और स्वास्थ्य सेवा व्यापार के विषय नहीं हो सकते। भारतीय जीवन दर्शन यही कहता है। इन दोनों क्षेत्रों से जुड़ी वस्तुओं पर पूरी मानव जाति का अधिकार है। इसलिए इन्हें पेटेंट के दायरे से मुक्त रखना होगा। कोरोना महामारी से विश्व भर में हो रही लाखों लोगों की मौत के बावजूद इसकी रोकथाम के लिए अब तक विकसित दवाओं व वैक्सीन के उत्पादन को पेटेंट की जंजीरों से जकड़ कर रखना और अपने व्यावसायिक फायदे के लिए लोगों की मौत को चुपचाप देखते रहना सर्वथा अनुचित है और निंदनीय भी। यह संपूर्ण मानव जाति के प्रति अपराध है। भारत के स्वदेशी जागरण मंच ने कोरोना वैक्सीन व दवाओं को पेटेंट के नियंत्रण से मुक्त रखने के लिए राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक अभियान छेड़ा है जिससे सभी लोगों को जुड़ना चाहिए।

उपरोक्त विचार रेडियो ग्रामोदय के वेकअप करनाल कार्यक्रम में स्वदेशी जागरण मंच के राष्ट्रीय सह संगठक सतीश कुमार के साथ हरियाणा ग्रंथ अकादमी के उपाध्यक्ष डॉ. वीरेंद्र सिंह चौहान की चर्चा के दौरान उभर कर सामने आए। सतीश कुमार गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय के कुलपति डॉक्टर भगवती प्रसाद के साथ कोरोना से संग्राम से जुड़े विभिन्न पक्षों पर इस शोध पूर्वक तैयार की गई एक पुस्तक के सह लेखक भी हैं।
इस अवसर पर डॉ. वीरेंद्र सिंह चौहान ने कहा की कोरोना महामारी के दौरान वैक्सीन व आवश्यक दवाएं न मिलने के कारण विश्व भर में लोग दम तोड़ रहे हैं। इसका समाधान यथाशीघ्र निकलना चाहिए। राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के वरिष्ठ प्रचारक और स्वदेशी जागरण मंच के राष्ट्रीय संगठक सतीश कुमार ने कहा कि किसी भी परिस्थिति में सिर्फ अपना व्यवसायिक फायदा देखना विदेशी सोच है। । शिक्षा और स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में भी ये कंपनियां अपनी बौद्धिक संपदा का सर्वाधिकार सुरक्षित रखना चाहती हैं। लेकिन वैश्विक महामारी के दौर में जीवन रक्षक दवाओं और वैक्सीन को पेटेंट से मुक्त रखना ही होगा।

सतीश ने बताया कि विश्व व्यापार संगठन (डब्लूटीओ) का गठन बौद्धिक संपदा को सुरक्षित रखने के लिए ही किया गया था। लेकिन वर्ष 2001 के दोहा में आयोजित ट्रिप्स सम्मेलन में भारत ने यह बात मनवा ली थी कि सामान्य परिस्थितियों में तो पेटेंट कानून लागू होगा, लेकिन वैश्विक महामारी के समय में बौद्धिक संपदा को विश्व के सभी देशों के लिए खुला रखना होगा ताकि वह भी इसका लाभ उठा सकें। पिछले एक वर्ष के भीतर विश्व भर में कोरोना की अब तक मुख्यतः आठ वैक्सीन ही विकसित हो पाई हैं। इस समय विश्व भर में 1200 करोड़ वैक्सीन की जरूरत है, लेकिन इन कंपनियों की क्षमता 100 करोड़ से ज्यादा उत्पादन करने की नहीं है। पिछले 5 महीने के दौरान सिर्फ 170 करोड़ वैक्सीन का ही उत्पादन हो पाया है। सतीश कुमार ने सवाल उठाया कि यदि उत्पादन की गति यही रही तो दुनिया की 738 करोड़ आबादी को वैक्सीन देने में चार साल लगेंगे। तो क्या तब तक लाखों लोगों को मरने देंगे?

डॉ. वीरेंद्र सिंह चौहान ने विश्व भर में कोरोना वैक्सीनेशन की अद्यतन स्थिति के बारे में पूछा तो सतीश कुमार ने बताया कि वि अमेरिका में 75 फ़ीसदी वयस्क लोगों को वैक्सीन दी गई है तो यूरोपीय देशों में यह आंकड़ा 60% के करीब है। दूसरी तरफ 52 अफ्रीकी देशों में अब तक सिर्फ दो फ़ीसदी वयस्क लोगों को ही वैक्सीन लगाई गई है। भारत ने कोरोना की स्वदेशी वैक्सीन विकसित की है, इसलिए हम अपेक्षाकृत ज्यादा वैक्सीन लगा पाए।

चर्चा के दौरान डॉ. चौहान ने कहा कि विश्व भर में कोरोना के कारण अपनी जान गवाने वाले लोगों की सूची में भारत 15वें स्थान पर है। वैक्सीनेशन की गति में भी हम विश्व के अन्य देशों के मुकाबले बेहतर स्थिति में हैं। इसके बावजूद देश के ही कुछ लोग दुनिया में भारत और भारतीय सरकार की छवि खराब करने के प्रयास में लगे हैं।

डॉ. चौहान की बात का समर्थन करते हुए सतीश कुमार ने कहा कि प्रति दस लाख की आबादी के हिसाब से अमेरिका में 1.2 लाख लोगों को कोरोना संक्रमण हुआ जबकि इसके मुकाबले भारत में सिर्फ 18000 लोग संक्रमित हुए। इसी प्रकार अमेरिका में प्रति दस लाख की आबादी पर 1870 लोग कोरोना से मरे। भारत में यह आंकड़ा 215 लोगों का रहा जबकि भारत की आबादी 138 करोड़ के करीब मानी जा रही है। सतीश कुमार ने बताया कि संक्रमितों के मामले में भी भारत की स्थिति यूरोपीय देशों से बेहतर रही है। अमेरिका में 600 शव अंत्येष्टि के लिए स्थान के इंतजार में अभी भी रखे हुए हैं। भारत में कोरोना की दूसरी लहर इतनी तेजी से आई जिसका किसी को भी पूर्वानुमान नहीं था। इसीलिए इसे संभालने में हमें 15 दिन लग गए।

पेटेंट फ्री अभियान से जुड़ें

सतीश कुमार ने बताया कि देश और दुनिया के कम से कम 20 लाख लोगों को पेटेंट मुक्त वैक्सीन अभियान से जोड़ने के लिए स्वदेशी जागरण मंच ने एक अभियान छेड़ा है। इसके तहत लोगों से ऑनलाइन जुड़ने और अपना डिजिटल हस्ताक्षर करने की अपील की जा रही है। इसके लिए joinswadeshi.com नाम से एक वेबसाइट लिंक जारी किया गया है। इसके अलावा एक पुस्तक भी लिखी गई है जिसका विमोचन होना बाकी है। पुस्तक में महामारियों का इतिहास, चीन के वुहान शहर से कोरोना विश्व भर में कैसे फैला, भारत ने इसकी रोकथाम के लिए क्या-क्या पूर्व तैयारियां कीं – इन बातों का विस्तार से वर्णन किया गया है।

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घर का फ्रिज भी हो सकता है ब्लैक फंगस का ठिकाना : डॉ. चौहान

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रेडियो ग्रामोदय के वेकअप करनाल कार्यक्रम में ब्लैक फंगस के संभावित ठिकानों पर चर्चा

करनाल। ब्लैक फंगस के जीवाणु नम जगहों पर पनपते हैं। इनमें आपके घर का रेफ्रिजरेटर भी शामिल हो सकता है। बंद फ्रिज के अंदर यदि ब्रेड लंबे समय तक रखा रहे तो उसमें फंगस उत्पन्न होने लगता है। इसके अलावा लकड़ी पत्ते व अन्य जगहों पर भी फंगस पनपता है जो इस बीमारी का कारण बन सकता है। कोरोना के उपचार के दौरान कई बार ऐसा भी देखा गया है कि लोग ऑक्सीजन कंसंट्रेटर में डिस्टिल्ड वाटर के बजाय साधारण पानी डाल देते हैं। इससे भी ब्लैक फंगस पैदा होता है। इसलिए ऑक्सीजन कंसंट्रेटर में साधारण पानी का इस्तेमाल कतई न करें।

ब्लैक फंगस पर क्या कहते है PGIMS रोहतक के वरिष्ठ नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. राजेंद्र चौहान

उपरोक्त महत्वपूर्ण जानकारी रेडियो ग्रामोदय के वेकअप करनाल कार्यक्रम में हरियाणा ग्रंथ अकादमी के उपाध्यक्ष डॉ. वीरेंद्र सिंह चौहान और प्रसिद्ध नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. राजेंद्र सिंह चौहान के बीच चर्चा के दौरान सामने आई। डॉ. चौहान ने बताया कि ब्लैक फंगस सीधा आंख में प्रवेश नहीं करता। इस जीवाणु के मस्तिष्क तक पहुंचने के रास्ते में कई चरण हैं। मसलन यह सांस के साथ नाक और मुंह के जरिए शरीर में प्रवेश कर सकता है या ग्रहण किए जाने वाले भोज्य पदार्थों के साथ भी शरीर में प्रवेश कर सकता है। इसके अलावा चोट लगने पर यदि त्वचा में छेद हो जाए, तो उस स्थान से भी फंगस शरीर में प्रवेश कर सकता है। ब्लैक फंगस कमजोर प्रतिरोधक क्षमता वाले लोगों को ही आम तौर पर प्रभावित करता है।

ब्लैक फंगस शरीर में प्रवेश करने के बाद किस प्रकार नुकसान पहुंचाता है? ग्रंथ अकादमी उपाध्यक्ष डॉ. चौहान के इस सवाल पर नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. राजेंद्र सिंह ने बताया की ब्लैक फंगस नाक के रास्ते शरीर में प्रवेश करने के बाद पहले साइनस को प्रभावित करता है। उसके बाद यह जबड़ों की मांसपेशियों या चीक बोन में अपना ठिकाना बनाता है जिसके फलस्वरूप गालों में सूजन आ जाती है। इसके बाद यह दांतो को प्रभावित करता है और फिर आंख में प्रवेश करता है।

डॉ चौहान ने बताया कि शरीर में प्रवेश करने के बाद ब्लैक फंगस के जीवाणु धमनियों में रक्त को जमा देते हैं। इस प्रक्रिया में शरीर की कोशिकाएं मरने लगती हैं। यह अत्यंत खतरनाक स्थिति होती है। ब्लैक फंगस के रोगियों की मृत्यु दर 50 फ़ीसदी आंकी गई है जो चिंताजनक है।

ब्लैक फंगस से सबसे ज्यादा खतरा किन-किन लोगों को हो सकता है? ग्रंथ अकादमी उपाध्यक्ष डॉ. चौहान के इस सवाल पर डॉ. राजेंद्र सिंह ने बताया कि कोरोना के उपचार के दौरान स्टेरॉइड का अत्यधिक सेवन करने वाले, अनियंत्रित मधुमेह के रोगियों, एचआईवी से संक्रमित लोगों, किडनी की बीमारी से ग्रस्त और इम्यूनो सप्रेसेंट दवाओं का सेवन करने वाले लोगों को ब्लैक फंगस से संक्रमित होने का खतरा सबसे ज्यादा है। ब्लैक फंगस के रोगियों को उपचार के लिए खून की नस में दवा दी जाती है जो कई दिनों तक चलता है। इसलिए, ब्लैक फंगस के रोगियों का उपचार हर हालत में अस्पताल में ही कराना होगा। नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ राजेंद्र सिंह चौहान ने यह भी सलाह दी कि पल्स ऑक्सीमीटर की तरह अब हर घर में ग्लूकोमीटर भी रखना जरूरी हो गया है। ऐसे कई मामले देखे गए हैं कि जो लोग कोरोना संक्रमण से पहले डायबिटीज के रोगी नहीं थे, उनमें भी ठीक होने के बाद मधुमेह के लक्षण पाए जा रहे हैं। ऐसा स्टेरॉयड की दवाएं लेने के कारण हो रहा है।

ब्लैक फंगस हो जाने पर इसके लक्षणों को कैसे पहचाना जाए? डॉ. चौहान के इस सवाल पर नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. राजेंद्र सिंह ने बताया कि कोरोना से ठीक होने के बाद भी यदि बुखार आए, छाती में असहजता महसूस हो, आंखों से धुंधला दिखे, मल में खून आए, नाक से काला जैसा तरल पदार्थ निकलने लगे और तालू में भी काले धब्बे नजर आए तो इसे ब्लैक फंगस का लक्षण समझना चाहिए। आंख में प्रवेश कर जाने के बाद ब्लैक फंगस के जीवाणु तेजी से फैलते हैं और 3 से 4 दिनों के भीतर मरीज की मृत्यु की भी नौबत आ सकती है। लेकिन यदि इसका समय पर उपचार शुरू कर दिया जाए तो शत-प्रतिशत इलाज संभव है।

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ब्लैक फंगस लाइलाज नहीं, सावधानियां बरतें तो हो सकता है इससे बचाव : डॉ. चौहान

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रेडियो ग्रामोदय के वेकअप करनाल कार्यक्रम में ब्लैक फंगस के लक्षणों एवं इससे बचाव पर चर्चा

करनाल। ब्लैक फंगस एक खतरनाक बीमारी जरूर है, लेकिन लाइलाज नहीं। कोरोना की तरह यह वायरस चीन से आयातित नहीं है और न ही यह छुआछूत से फैलने वाला संक्रमण है। ब्लैक फंगस एक विशेष प्रकार के फफूंदी से फैलने वाली बीमारी है जिसके जीवाणु वायुमंडल में हर जगह पाए जाते हैं। मजबूत इम्यूनिटी वाले लोगों को इसके जीवाणु नुकसान नहीं पहुंचा पाते, लेकिन कमजोर प्रतिरोधक क्षमता वाले लोग आसानी से इसके शिकार बन जाते हैं। अगर संक्रमण के शुरुआती चरण में ही इसकी पहचान हो जाए तो ब्लैक फंगस का शत-प्रतिशत इलाज संभव है।

उपरोक्त जानकारी रेडियो ग्रामोदय के वेकअप करनाल कार्यक्रम में ब्लैक फंगस के लक्षण एवं इससे बचाव के विषय पर चर्चा के दौरान उभरकर सामने आई। बीमारी के प्रति अपने जागरूकता अभियान के तहत हरियाणा ग्रंथ अकादमी के उपाध्यक्ष डॉ. वीरेंद्र सिंह चौहान करनाल स्थित कल्पना चावला मेडिकल कॉलेज स्थित ईएनटी विभाग में सहायक प्रोफेसर डॉ. विकास ढिल्लों के साथ बातचीत कर रहे थे। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार ने ब्लैक फंगस को भी अधिसूचित बीमारी घोषित कर दिया है। फलों और सब्जियों पर भी मौजूद रहने वाले इसके जीवाणु नाक और मुंह के रास्ते शरीर में प्रवेश कर जाते हैं। ब्लैक फंगस से करनाल में एक मरीज की मौत होने का भी समाचार है।

ऐसा क्यों है कि कोरोना से ठीक हुए लोगों और मधुमेह रोगियों में ही ब्लैक फंगस के सर्वाधिक मामले पाए जा रहे हैं? डॉ. चौहान के इस सवाल पर डॉ. विकास ढिल्लों ने कहा कि कोरोना हमारी इम्यूनिटी को कमजोर कर देता है। कोरोना के उपचार के दौरान मरीजों को स्टेरॉइड की दवा भी दी जाती है जो हमारे खून मैं मौजूद वाइट ब्लड कॉरपसल्स की प्रतिरोधक क्षमता को घटा देता है। स्टेरॉइड चाहे एनाबॉलिक हो या कोई और, हमारी इम्यूनिटी को कम करता ही है। ब्लैक फंगस कमजोर प्रतिरोधक क्षमता वाले लोगों को ही प्रभावित करता है। कमजोर इम्यूनिटी वाले लोगों में अनियंत्रित मधुमेह के रोगी, एचआईवी मरीज, एंटी कैंसर दवाई लेने वाले लोगों व कोरोना से ठीक हो चुके लोगों के अलावा किडनी, लीवर या किसी अन्य अंग का प्रत्यारोपण करवाने वाले लोग शामिल हैं।

डॉ. विकास ढिल्लों ने बताया कि ब्लैक फंगस मिट्टी और वायुमंडल में मौजूद होता है जो काले रंग का होता है। जीभ पर काले रंग की या तालु के ऊपर सफेद रंग की परत का चढ़ जाना ब्लैक फंगस के लक्षण हैं। कवक काले और उजले दोनों रंग के होते हैं। कल्पना चावला अस्पताल में ब्लैक फंगस के अब तक 10-12 मामले सामने आ चुके हैं।

डॉ. चौहान ने पूछा कि इस बीमारी के लक्षणों को कैसे पहचाने और किस स्टेज में जाने के बाद मरीज का बचना मुश्किल हो जाता है? इस सवाल पर डॉ. विकास ने बताया कि कोरोना से ठीक होने के बाद फिर से बुखार आना शुरू हो जाए, चेहरे के एक भाग में दर्द होना शुरू हो या नाक बंद हो जाए, नाक से रक्त मिश्रित तरल पदार्थ निकलने लगे या चेहरे पर एक तरफ संवेदना महसूस होना बंद हो जाए, दांत हिलने लगे, टूटते समय काला सा पदार्थ निकले या जीभ पर काली जैसी परत जम जाए, आंखों से धुंधला या दो – दो आकृतियां दिखने लगे और चेहरे की त्वचा भी काली पड़ने लगे तो इसे ब्लैक फंगस का लक्षण समझना चाहिए। ब्लैक फंगस के रोगी अक्सर तब उपचार के लिए आते हैं जब वह सेप्टीसीमिया में जा चुका होता है। यदि शुरुआत में ही डॉक्टर से संपर्क किया जाए तो शत-प्रतिशत इलाज संभव है।

ब्लैक फंगस के रोगियों का किस अवस्था में जाने के बाद बचना मुश्किल होता है? डॉ. चौहान के इस सवाल पर डॉ. विकास ने बताया कि मरीज की जब आंख खराब हो जाती है और फंगस मस्तिष्क में चला जाता है तो मामला नियंत्रण से बाहर चला जाता है। इसे ही सेप्टीसीमिया कहते हैं। यह बीमारी का अंतिम चरण होता है। ब्लैक फंगस के रोगियों का अस्पताल में डॉक्टरों की देखरेख में ही उपचार संभव है क्योंकि दवाएं नसों के माध्यम से दी जाती हैं एवं शरीर के अन्य हिस्सों पर भी कड़ी निगरानी रखनी पड़ती है।

पांच मिनट तक नाक दबाकर मुंह से सांस लें

डॉक्टर विकास ने बताया कि नाक से खून बहने या नकसीर के रोगियों को सीधा बैठकर नाक को 5 मिनट तक उंगलियों से दबाकर रखना चाहिए और मुंह से सांस लेना चाहिए। ऐसा करने से नाक से रक्त का प्रवाह रुक जाएगा और आराम मिलेगा। यह क्रिया लेट कर कदापि नहीं करना चाहिए। उन्होंने कहा कि अक्सर कान खुजाने की आदत भी अच्छी नहीं है। इससे कान का पर्दा फटने या परदे में छेद होने का खतरा बढ़ जाता है।

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सरकारी योजनाओं का लाभ लोगों तक पहुँचाने के लिए वित्तीय साक्षरता पर ज़ोर देने की आवश्यकता : चौहान

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बैंक कर्मचारी सहयोग न करें तो लीड डिस्ट्रिक्ट मैनेजर को करें शिकायत

करनाल। सरकार की योजनाओं का लाभ धरातल तक पहुँचाने के लिए वित्तीय साक्षरता अत्यंत आवश्यक है। वित्तीय साक्षरता के अभाव में ग्रामीण अंचल के उपभोक्ता अक्सर सरकारी योजनाओं का लाभ लेने से वंचित रह जाते हैं। बैंकों में उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ता है और कई बार निराश होकर भी लौटना पड़ता है। सरकारी योजनाओं और उनका लाभ लेने के लिए निर्धारित शर्तों के प्रति आम उपभोक्ताओं को जागरूक करने के लिए बैंकों ने कई कदम उठाए हैं। रेडियो ग्रामोदय भी इस दिशा में अपना योगदान देगा।

यह बात हरियाणा ग्रंथ अकादमी के उपाध्यक्ष डॉ. वीरेंद्र सिंह चौहान ने रेडियो ग्रामोदय के वेकअप करनाल कार्यक्रम में बैंक प्रतिनिधियों से वित्तीय साक्षरता पर चर्चा के दौरान कही। चर्चा में उनके साथ करनाल के लीड जिला प्रबंधक सुरेंद्र कुमार सिंघाल, उनकी सहयोगी आयुषी और क्रिसिल फाऊंडेशन के प्रतिनिधि भारत भूषण भी शामिल थे। डॉ. चौहान ने कहा कि मुद्रा व जनधन जैसी योजनाओं का लाभ लेते समय उपभोक्ताओं को बैंकों में समस्याओं का सामना करना पड़ता है। लोगों को जागरूक कर इन समस्याओं का निदान करना हमारा लक्ष्य हैं।बैंकों की ओर सेबरती जाने वाली कोताही पर भी सरकार निरंतर नज़र बनाए रखती है।

एलडीएम सुरेंद्र सिंघाल ने कहा कि ग्रामीण उपभोक्ताओं के पास बहूत बार योजनाओं की सही जानकारी नहीं होती और न ही पूरे दस्तावेज होते हैं। दस्तावेज पूरे न होने के कारण ही उन्हें बैंकों से लौटना पड़ता है। उन्होंने कहा कि बैंक की शाखाओं में प्रबंधक या किसी कर्मचारी द्वारा अनावश्यक परेशान किए जाने पर इसकी शिकायत फोन पर सीधा लीड जिला प्रबंधक से की जा सकती है या व्हाट्सएप व मेल के माध्यम से भी सूचना दी जा सकती है। शिकायत पर तुरंत कार्रवाई होगी।

डॉ. वीरेंद्र सिंह चौहान ने बताया कि हरियाणा सरकार ने प्रदेश में लाल डोरा की व्यवस्था समाप्त करने का फैसला किया है। नई व्यवस्था के अंतर्गत गाँव में रहने वाले प्रत्येक व्यक्ति को दस्तावेजों में उसकी भूमिका मालिकाना हक़ प्राप्त हो जाएगा। सिरसी गाँव से शुरू हुई यह व्यवस्था अब धीरे धीरे ज़िले के अन्य हिस्सों और इसी प्रकार हरियाणा के अन्य भागों में भी चरणबद्ध ढंग से लागू की जा रही है। इससे ग्रामवासी अपनी मिल्कियत की भूमि के आधार पर आसानी से बैंक ऋण आदि प्राप्त कर सकेंगे।

सुरेंद्र सिंघाल ने बताया कि किसान क्रेडिट कार्ड लेने वाले उपभोक्ताओं को भी पशुधन क्रेडिट कार्ड दिया जा सकता है, लेकिन इससे पहले बैंकों को यह सुनिश्चित करना होगा कि उपभोक्ता पात्रता की सभी शर्तों को पूरा कर रहा है या नहीं। ₹160000 तक के लिए बैंक के पास कोई जमीन बंधक रखने की जरूरत नहीं होती। यदि उपभोक्ता पर पहले से ही ₹200000 का ऋण हो और वह पशुधन क्रेडिट कार्ड के लिए भी आवेदन कर रहा हो तो बैंक पात्रता की अन्य शर्तों की भी जांच करेगा।

बैंक प्रतिनिधि आयुषी ने बताया कि पिछले साल लॉकडाउन के दौरान जन धन खाताधारक महिलाओं के खातों में 3 महीने तक ₹500 प्रति माह के हिसाब से केंद्र सरकार की ओर से डाले गए थे। जिनके खाते नहीं खुले, उन्हें इस योजना का लाभ नहीं मिल पाया। उन्होंने जानकारी दी कि औसतन खाते में ₹10000 जमा करने के बाद उपभोक्ता ₹10000 का ओवरड्राफ्ट ले सकता है। यह सुविधा क्रेडिट कार्ड जैसी है। जिसका जनधन खाता आधार से लिंक है, उसी उपभोक्ता को ओवरड्राफ्ट की सुविधा मिल सकती है।

क्रिसिल फाउंडेशन के प्रतिनिधि भारत भूषण ने बताया कि सेंटर फॉर फाइनेंशियल लिटरेसी कार्यक्रम आरबीआई, नाबार्ड, लीड बैंक और क्रिसिल फाउंडेशन के सहयोग से हरियाणा के 4 जिलों में चलाया जा रहा है जिनमें करनाल भी शामिल है। इसके तहत गांव-गांव जाकर लोगों को वित्तीय लेनदेन की जानकारी दी जाती है। उन्होंने किसी भी प्रकार की जानकारी फोन पर शेयर ना करने की सलाह दी।

आशा वर्कर की तर्ज पर ग्राम शक्ति

आयुषी ने बताया कि वित्तीय साक्षरता के लिए गावों में आशा वर्कर व आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की तर्ज पर ग्राम शक्ति कार्यकर्ताओं को तैयार किया गया है जो ऑनलाइन ऐप के माध्यम से महिलाओं को वित्तीय लेनदेन का प्रशिक्षण प्रदान करती हैं। यह सुविधा सिर्फ महिलाओं के लिए ही है। इसके बाद पढ़ी-लिखी प्रशिक्षित महिलाओं को बैंकों में काम दिलाने का भी प्रयास किया जाता है।

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नीलोखेड़ी के सवालों का हल निकालना होगा : डॉ. चौहान

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शहर की समस्याओं पर वेकअप करनाल में खुली चर्चा
सांसद और विधायक के बीच बेहतरीन तालमेल की माँग

करनाल। देश विभाजन के बाद बसाया गया नीलोखेड़ी आज तक विकास के मामले में ऊँचाइयों को नहीं छू पाया जो उसकी स्थापना के समय सोची विचारी गई थी। कई बार भी विपक्ष के प्रतिनिधि को विधायक चुनकर भेजने के कारण शायद यह स्थिति रही, मगर यह इकलौता कारण नहीं हो सकता।इसे चंडीगढ़ की तर्ज पर बसाने की बात कही गई थी और शुरुआती दौर में स्वयं पंडित नेहरू प्रधानमंत्री होते हुए दो बार यहाँ आए भी। मगर इस नगरी के भाग्य शायद चंडीगढ़ सरीखा बनाना नहीं था। एक बार नीलोखेड़ी को हरियाणा की नई राजधानी के रूप में विकसित करने की बात भी चली मगर वह भी सिरे नहीं चढ़ पाई।परिणाम यह है कि यह शहर मात्र एक-सवा किलोमीटर के दायरे में ही सिमट कर रह गया है।

उपरोक्त विचार-बिंदु रेडियो ग्रामोदय के वेकअप करनाल कार्यक्रम में नीलोखेड़ी की समस्याओं पर स्थानीय निवासियों से हरियाणा ग्रंथ अकादमी उपाध्यक्ष डॉ. वीरेंद्र सिंह चौहान की बातचीत के दौरान उभरकर सामने आए। डॉ. चौहान ने कहा कि राज्य की मनोहर लाल खट्टर की सरकार ने प्रदेश के हर जिले के विकास के लिए धन का समान रूप से आवंटन किया और धन की कहीं कमी नहीं आने दी। इसके बावजूद नीलोखेड़ी के लोगों की कुछ आकांक्षाएं अभी अधूरी है। उन्होंने कहा कि नीलोखेड़ी को सबडिवीजन बनाना विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण साबित होगा और इस दिशा में औपचारिकताएं तेज गति से पूर्ण की जा रही है। उन्होंने कहा कि शहर में बस स्टेण्ड की पुरानी माँग को भी यथाशीघ्र पूरा किया जाना सरकार की प्राथमिकताओं में शुमार है और इसके रास्ते में खड़ी बाधाओं को जल्द दूर किया जाएगा।यह दोनों ही मामले करनाल के सांसद और नीलोखेड़ी के विधायक द्वारा में समुचित तरीक़े से आगे बढ़ायी जा रहे हैं।

चर्चा में जुड़े सामाजिक कार्यकर्ता और भाजपा नेता शिवनाथ कपूर ने बताया कि आज से 32 साल पहले कुछ समस्याएं जहाँ मौजूद थीं, वह आज भी हैं। उन्होंने नीलोखेड़ी में कोरोना संक्रमण की स्थिति की जानकारी देते हुए कहा कि शहर में कोरोना के 100 पुष्ट मामले अस्पताल में उपचाराधीन हैं। शिवनाथ कपूर ने बताया कि नीलोखेड़ी के अस्पताल में 12 अतिरिक्त ऑक्सीजन बेड की व्यवस्था की गई है जिनमें 6 मरीज भर्ती हैं। इसके अलावा नीलोखेड़ी में 100 बिस्तरों वाला एक नया अस्पताल भी बनने जा रहा है।

चर्चा के दौरान एक विकास ने लॉकडाउन के दौरान छोटे दुकानदारों को पेश आने वाले आर्थिक संकट की ओर ध्यान दिलाया। इस पर डॉ. चौहान ने कहा कि दुकानदारों की समस्या से इनकार नहीं किया जा सकता। प्रदेश सरकार ने लॉकडाउन को यथासंभव टालने की कोशिश की, लेकिन परिस्थितियों ने ऐसा नहीं होने दिया। यह मजबूरी का फैसला है। जीवन बचाना हमारी सबसे बड़ी प्राथमिकता है। जब जीवन ही नहीं बचेगा तो दुकानदार रोजगार कैसे करेगा?

समाजसेवी पंकज शर्मा ने बताया कि कोरोना काल में सामाजिक संगठन भी अपना योगदान दे रहे हैं। नीलोखेड़ी के रक्तदाता परिवार आर्थिक रूप से कमजोर लोगों की मदद कर रहे हैं।

मस्कट से चर्चा में जुड़े दीपक शर्मा ने कहा कि करनाल के सांसद संजय और विधायक धर्मपाल के अंदर गोंदर परस्पर अधिक तालमेल के साथ कार्य करें तो अधर में लटके इस क्षेत्र के अनेक कार्य तेज गति से सिरे चढ़ सकते हैं।इस पर शिवनाथ कपूर ने कहा कि पूर्व विधायक भगवान दास कबीरपंथी ने भी क्षेत्र के विकास के लिए भरपूर परिश्रम किया।

युवा सामाजिक कार्यकर्ता योगी गाबा ने वैक्सीनेशन के लिए आवंटित स्लॉट के अनुसार टीकाकरण न होने का जिक्र किया। उन्होंने बताया कि टीकाकरण के लिए निर्धारित समय पर वैक्सीन नहीं लग पाता और उन्हें टीकाकरण के लिए इंतजार करना पड़ता है। उन्होंने सब डिवीज़न बनाने के साथ साथ बस अड्डे की माँग को भी जल्द पूरा किए जाने की बात कही। आशीष सिधवानी ने रोज़गार के नए अवसरों की व्यवस्था करने तथा केन्द्रीय प्रेस परिसर की 35 एकड़ भूमि का सदुपयोग किए जाने की माँग उठायी।

चर्चा में शिवनाथ कपूर, पंकज शर्मा, योगी गाबा, दीपक शर्मा और विकास के अलावा आशीष, अजय वर्मा, पारस खुराना और गुलाब सिंह पोसवाल ने भी भाग लिया।

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कोरोना से अनाथ हुए बच्चों को गोद लेगी सरकार : डॉ. चौहान

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रेडियो ग्रामोदय के वेकअप करनाल कार्यक्रम में हरियाणा राज्य बाल कल्याण परिषद के कार्यों पर चर्चा

करनाल। कोरोना ने न सिर्फ आम जनजीवन को प्रभावित किया है, बल्कि बच्चों पर भी खासा दुष्प्रभाव डाला है। एक तरफ जहां लंबे समय तक घरों में कैद रहने के कारण बच्चों की मानसिक स्थिति पर असर पड़ा है, वहीं दूसरी ओर कई ऐसे बच्चे भी हैं जिन्होंने इस बीमारी में अपने माता-पिता और पूरे परिवार को खो दिया है। गरीब व जरूरतमंद बच्चों को बेहतर भविष्य और अनाथ बच्चों को सहारा देने के लिए प्रदेश सरकार गंभीर है। हरियाणा राज्य बाल कल्याण परिषद उन सभी बेसहारा बच्चों को गोद लेगा जो कोरोना के कारण अनाथ हो गए हैं।

यह जानकारी हरियाणा ग्रंथ अकादमी के उपाध्यक्ष डॉ. वीरेंद्र सिंह चौहान ने रेडियो ग्रामोदय के वेकअप करनाल कार्यक्रम में हरियाणा राज्य बाल कल्याण परिषद के मानद महासचिव प्रवीण अत्री के साथ परिषद के कार्यों पर चर्चा के दौरान दी। उन्होंने कहा कि कोरोना से बच्चों में उपजे तनाव के कारण उनका विकास बाधित न हो, इसके लिए सरकार की विभिन्न संस्थाएं प्रयासरत हैं और हरियाणा राज्य बाल कल्याण परिषद भी उनमें से एक है।

परिषद के कार्यों एवं गतिविधियों के संबंध में डॉ. चौहान द्वारा पूछे गए सवाल पर प्रवीण अत्री ने बताया कि बाल कल्याण परिषद गरीब व जरूरतमंद बच्चों के पालन-पोषण एवं विकास के लिए प्रयासरत है। बच्चों के कल्याण के लिए परिषद बाल भवनों के माध्यम से कई गतिविधियां संचालित करता है। उन्होंने कहा कि परिषद का मकसद गरीब बच्चों को पढ़ा-लिखा कर उन्हें एक अच्छा नागरिक बनने में मदद करना और हर बच्चे के चेहरे पर खुशी लाना है। अनाथ और बेसहारा बच्चों के पालन-पोषण के लिए प्रदेशभर के जिलों में शिशु गृह बनवाए गए हैं जिनमें बच्चों की काउंसलिंग भी की जाती है।

प्रवीण अत्री ने बताया कि कोरोना के संकट काल में बच्चों को मानसिक तनाव से उबारने के लिए बाल भवन की ओर से गत 17 मई से ऑनलाइन ग्रीष्मकालीन शिविर का आयोजन किया जा रहा है। इस ग्रीष्मकालीन शिविर के दौरान बच्चों की विभिन्न प्रतिस्पर्धाएं आयोजित होंगी जिन्हें चार आयु वर्ग में बांटा गया है। इन स्पर्धाओं में कुल 36 गतिविधियों को शामिल किया गया है जैसे नृत्य, संगीत, योग, चित्रकारी आदि।

शिविर में भाग लेने के लिए परिषद की ओर से एक पोर्टल का लिंक www.childwelfareharyana.com जारी किया गया है जिसके माध्यम से बच्चे जिला स्तर पर अपना नामांकन करवा सकते हैं। शिविर के दौरान बच्चों को विभिन्न गतिविधियों का प्रशिक्षण दिया जाएगा और इसके बाद उन्हें अपना वीडियो तैयार कर पोर्टल पर अपलोड करना होगा। प्रतियोगिता के अंत में विजेता बच्चों के नाम की घोषणा होगी और उन्हें पुरस्कृत भी किया जाएगा।

डॉ. चौहान ने पूछा कि बच्चों की इतने बड़े स्तर पर प्रतिभागिता सुनिश्चित करने के लिए परिषद की ओर से क्या-क्या प्रयास किए गए हैं? इस पर प्रवीण अत्री ने बताया कि प्रदेशभर में डिवीजन एवं जिला स्तर के अधिकारियों को टारगेट दिए गए हैं और जिला शिक्षा अधिकारियों एवं डॉक्टरों की वीडियो भी इसमें डाली गई है। इस कार्य में जिलों में मौजूद अटल सेवा केंद्रों की भी मदद ली जा रही है।

हेल्पलाइन नंबर 1098 पर दें सूचना

हरियाणा राज्य बाल कल्याण परिषद के मानद महासचिव प्रवीण अत्री ने बताया कि परिषद सभी बेसहारा बच्चों और खासकर कोरोना से अनाथ हुए बच्चों को गोद लेगा। राज्य के शिशु गृहों मैं ऐसे बच्चों के पालन-पोषण के लिए प्रावधान भी कर दिए गए हैं जहां उनके रहने और खाने-पीने का इंतजाम किया गया है। हेल्पलाइन नंबर 1098 पर ऐसे बच्चों के बारे में जानकारी दी जा सकती है। उन्होंने कहा कि बच्चों की देखरेख करने के लिए बाल भवनों के पास पर्याप्त मात्रा में संसाधन मौजूद हैं।

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