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समय बीत रहा है, आइए टी.बी. मुक्त भारत के लिए एकजुट हों : डॉ. चौहान

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विश्व क्षय रोग दिवस पर जिला क्षय रोग अधिकारी ने लोगों को किया जागरूक

करनाल। लगभग 50% लोगों में क्षय रोग के बैक्टीरिया हैं लेकिन बीमारी केवल उन 2% लोगों में ही पनपती है जिनका शरीर बैक्टीरिया से लड़ नहीं पाता। क्षय रोग सामान्यतः फेफड़ों में होता है किंतु बाल व नाखून को छोड़कर यह शरीर के किसी भी भाग में हो सकता है । फेफड़ों या छाती के क्षय रोग को पलमनरी टीबी और बाकी शरीर के क्षय रोग को नॉन पलमनरी टीबी कहते हैं। विश्व क्षय रोग दिवस पर रेडियो ग्रामोदय के वेकअप करनाल कार्यक्रम में जिला क्षय रोग अधिकारी डॉक्टर सिम्मी कपूर व ग्रंथ अकादमी उपाध्यक्ष डॉ. वीरेंद्र सिंह चौहान के मध्य हुई ऑनलाइन वार्ता में यह बात उभर कर सामने आयी।

क्षय रोग मरीजों से जुड़े आंकड़ों की चर्चा करते हुए डॉ. सिम्मी ने बताया की डब्ल्यूएचओ के अनुसार विश्व के 27% क्षय रोगी भारत से हैं अर्थात विश्व का अमूमन हर चौथा क्षय रोगी भारतीय है। हरियाणा की बात करें तो लगभग 70000 मरीज हर वर्ष क्षय रोग से पीड़ित होते हैं। करनाल जिले में वर्ष 2020 में 3743 क्षय रोगी चिन्हित हुए हैं।

क्षय रोग का आयु से संबंध को स्पष्ट करते हुए जिला क्षय रोग अधिकारी डॉक्टर कपूर ने कहा की क्षय रोग किसी भी आयु के व्यक्ति को हो सकता है किंतु इसके अधिकांशतः मरीज 15 वर्ष से 45 वर्ष के मध्य के पुरुष मिलते हैं क्योंकि वह विभिन्न आर्थिक, सामाजिक कारणों से अधिक लोगों के संपर्क में आते हैं।

क्षय रोगी को चिन्हित करने के संबंध में डॉ वीरेंद्र सिंह चौहान द्वारा पूछे गए एक सवाल के जवाब में डॉ सिम्मी कपूर ने कहा की मरीज स्वयं तो आते ही हैं किंतु समय- समय पर विभाग द्वारा क्षय रोग जांच शिविरों के माध्यम से भी रोगी चिन्हित किए जाते हैं।

कोविड का क्षय रोगी पर प्रभाव को लेकर पिंजोर से हिमांशु मेहता को बताते हुए डॉ. कपूर ने कहा कि छाती की टी.बी. और क्षय रोग के प्रारंभिक लक्षण सामान हैं किन्तु कोविड को लेकर क्षय रोगी को दिल और सांस के रोगियों जितना खतरा नहीं है ।

क्षय रोग के इलाज प्रक्रिया, खर्चे व दवाइयों के बारे में बताते हुए डॉ सिम्मी ने कहा कि सामान्यतः क्षय रोगी 6 माह के इलाज में पूरी तरह ठीक हो जाता है। किसी भी क्षय रोगी को सभी दवाइयां स्वास्थ्य केंद्रों पर पूर्णतः निशुल्क मिलती हैं। निशुल्क जांच के अतिरिक्त ₹500 प्रति माह की पोषण सहायता भी हर क्षय रोगी को उसके खाते में पैसे जमा करके प्रदान की जाती है। क्षय रोग दवाई द्वारा पूर्णतः ठीक हो जाता है । इसके उपचार में किसी भी प्रकार की सर्जरी की आवश्यकता नहीं होती।

रोग के लक्षणों को स्पष्ट करते हुए डॉक्टर सिम्मी ने कहा कि खांसी व बुखार, फेफड़ों की टी.बी. का लक्षण है इसकी जांच बलगम के टेस्ट द्वारा की जाती है। बुखार के साथ शरीर के अन्य हिस्सों में गांठों का होना भी गांठों की टी. बी का लक्षण है जिसकी जांच सुई डालकर प्राप्त बूंद का एफ.एन.ए.सी. टेस्ट करा कर की जाती है। हड्डी वाली टी.बी. की जांच एक्स-रे , एम. आर. आई. और सी.टी. द्वारा की जाती है। सभी प्रकार की जांच स्वास्थ्य केंद्रों में निशुल्क की जाती है। बलगम की जांच सभी स्वास्थ्य केंद्रों पर उपलब्ध है जबकि अन्य जांचों के लिए रोगी को सिविल अस्पताल पहुंचना होगा।

पानीपत से प्राचार्य मोहन मित्तल के क्षय रोग से पीड़ित विद्यार्थियों के प्रति विद्यालय प्रबंधन के दायित्व को लेकर पूछे गए प्रश्न के उत्तर में डॉ. सिम्मी ने कहा कि क्षय रोगी से छुआछूत व भेदभाव की आवश्यकता नहीं है। गांठ वाला व हड्डी वाला क्षय रोग तो साथ बैठने से फैलता ही नहीं है तथा छाती वाला क्षय रोग भी डेढ़ – दो माह के उपचार के बाद फैलाव की स्थिति से बाहर हो जाता है। छाती वाले क्षय रोगी पहले डेढ़-दो माह के उपचार के दौरान मास्क व सामाजिक दूरी के नियम का अनुपालन करें उसके बाद सामान्य व्यवहार कर सकते हैं। बलगम की रिपोर्ट नेगेटिव आने तक पीड़ित विद्यार्थी को अन्य विद्यार्थियों के साथ कक्षा में बैठने से बचना चाहिए क्योंकि भीड़ में क्षय रोग के फैलाव का खतरा बढ़ता है।

भारत के क्षय रोग मुक्त होने में बाधाओं संबंधी डॉक्टर चौहान के प्रश्न के उत्तर में डॉक्टर सिम्मी कपूर ने कहा की जनसंख्या घनत्व अधिक होना भी एक बाधा है किंतु उससे बड़ी बाधा इलाज पूरा किए बिना इलाज छोड़ देना है । उन्होंने बताया कि पूरा इलाज 6 माह में होता है रोगी को इलाज का लाभ वह लक्षणों में कमी प्राय 2 माह से प्रारंभ हो जाती है जिसके चलते अनेक मरीज पूरा ठीक हुए बिना और इलाज की अवधि पूरे किए बिना ही इलाज छोड़ देते हैं। यह ढिलाई खतरा बन जाती है और सामान्य टी.बी. की समस्या बढ़कर mdr-tb बन जाती है । जिससे इलाज की अवधि और इलाज के दौरान मरीज को होने वाला कष्ट भी बढ़ जाता है।

कार्यक्रम के अंत में अकादमी उपाध्यक्ष डॉ वीरेंद्र सिंह चौहान व क्षय रोग जिला अधिकारी डॉक्टर सिम्मी कपूर ने सभी क्षय रोगियों से अनुरोध किया की इलाज बीच में ना छोड़े क्योंकि अगर एक भी मरीज बच जाता है तो वह एक ही वर्ष में 10 से 15 लोगों को रोगी बनाने की क्षमता रखता है।

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