ग्रामोदय

शिक्षा और स्वास्थ्य सेवा व्यापार नहीं, पेटेंट फ्री हो कोरोना वैक्सीन : सतीश

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रेडियो ग्रामोदय के वेकअप करनाल कार्यक्रम में पेटेंट फ्री कोरोना वैक्सीन अभियान पर चर्चा

करनाल। शिक्षा और स्वास्थ्य सेवा व्यापार के विषय नहीं हो सकते। भारतीय जीवन दर्शन यही कहता है। इन दोनों क्षेत्रों से जुड़ी वस्तुओं पर पूरी मानव जाति का अधिकार है। इसलिए इन्हें पेटेंट के दायरे से मुक्त रखना होगा। कोरोना महामारी से विश्व भर में हो रही लाखों लोगों की मौत के बावजूद इसकी रोकथाम के लिए अब तक विकसित दवाओं व वैक्सीन के उत्पादन को पेटेंट की जंजीरों से जकड़ कर रखना और अपने व्यावसायिक फायदे के लिए लोगों की मौत को चुपचाप देखते रहना सर्वथा अनुचित है और निंदनीय भी। यह संपूर्ण मानव जाति के प्रति अपराध है। भारत के स्वदेशी जागरण मंच ने कोरोना वैक्सीन व दवाओं को पेटेंट के नियंत्रण से मुक्त रखने के लिए राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक अभियान छेड़ा है जिससे सभी लोगों को जुड़ना चाहिए।

उपरोक्त विचार रेडियो ग्रामोदय के वेकअप करनाल कार्यक्रम में स्वदेशी जागरण मंच के राष्ट्रीय सह संगठक सतीश कुमार के साथ हरियाणा ग्रंथ अकादमी के उपाध्यक्ष डॉ. वीरेंद्र सिंह चौहान की चर्चा के दौरान उभर कर सामने आए। सतीश कुमार गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय के कुलपति डॉक्टर भगवती प्रसाद के साथ कोरोना से संग्राम से जुड़े विभिन्न पक्षों पर इस शोध पूर्वक तैयार की गई एक पुस्तक के सह लेखक भी हैं।
इस अवसर पर डॉ. वीरेंद्र सिंह चौहान ने कहा की कोरोना महामारी के दौरान वैक्सीन व आवश्यक दवाएं न मिलने के कारण विश्व भर में लोग दम तोड़ रहे हैं। इसका समाधान यथाशीघ्र निकलना चाहिए। राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के वरिष्ठ प्रचारक और स्वदेशी जागरण मंच के राष्ट्रीय संगठक सतीश कुमार ने कहा कि किसी भी परिस्थिति में सिर्फ अपना व्यवसायिक फायदा देखना विदेशी सोच है। । शिक्षा और स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में भी ये कंपनियां अपनी बौद्धिक संपदा का सर्वाधिकार सुरक्षित रखना चाहती हैं। लेकिन वैश्विक महामारी के दौर में जीवन रक्षक दवाओं और वैक्सीन को पेटेंट से मुक्त रखना ही होगा।

सतीश ने बताया कि विश्व व्यापार संगठन (डब्लूटीओ) का गठन बौद्धिक संपदा को सुरक्षित रखने के लिए ही किया गया था। लेकिन वर्ष 2001 के दोहा में आयोजित ट्रिप्स सम्मेलन में भारत ने यह बात मनवा ली थी कि सामान्य परिस्थितियों में तो पेटेंट कानून लागू होगा, लेकिन वैश्विक महामारी के समय में बौद्धिक संपदा को विश्व के सभी देशों के लिए खुला रखना होगा ताकि वह भी इसका लाभ उठा सकें। पिछले एक वर्ष के भीतर विश्व भर में कोरोना की अब तक मुख्यतः आठ वैक्सीन ही विकसित हो पाई हैं। इस समय विश्व भर में 1200 करोड़ वैक्सीन की जरूरत है, लेकिन इन कंपनियों की क्षमता 100 करोड़ से ज्यादा उत्पादन करने की नहीं है। पिछले 5 महीने के दौरान सिर्फ 170 करोड़ वैक्सीन का ही उत्पादन हो पाया है। सतीश कुमार ने सवाल उठाया कि यदि उत्पादन की गति यही रही तो दुनिया की 738 करोड़ आबादी को वैक्सीन देने में चार साल लगेंगे। तो क्या तब तक लाखों लोगों को मरने देंगे?

डॉ. वीरेंद्र सिंह चौहान ने विश्व भर में कोरोना वैक्सीनेशन की अद्यतन स्थिति के बारे में पूछा तो सतीश कुमार ने बताया कि वि अमेरिका में 75 फ़ीसदी वयस्क लोगों को वैक्सीन दी गई है तो यूरोपीय देशों में यह आंकड़ा 60% के करीब है। दूसरी तरफ 52 अफ्रीकी देशों में अब तक सिर्फ दो फ़ीसदी वयस्क लोगों को ही वैक्सीन लगाई गई है। भारत ने कोरोना की स्वदेशी वैक्सीन विकसित की है, इसलिए हम अपेक्षाकृत ज्यादा वैक्सीन लगा पाए।

चर्चा के दौरान डॉ. चौहान ने कहा कि विश्व भर में कोरोना के कारण अपनी जान गवाने वाले लोगों की सूची में भारत 15वें स्थान पर है। वैक्सीनेशन की गति में भी हम विश्व के अन्य देशों के मुकाबले बेहतर स्थिति में हैं। इसके बावजूद देश के ही कुछ लोग दुनिया में भारत और भारतीय सरकार की छवि खराब करने के प्रयास में लगे हैं।

डॉ. चौहान की बात का समर्थन करते हुए सतीश कुमार ने कहा कि प्रति दस लाख की आबादी के हिसाब से अमेरिका में 1.2 लाख लोगों को कोरोना संक्रमण हुआ जबकि इसके मुकाबले भारत में सिर्फ 18000 लोग संक्रमित हुए। इसी प्रकार अमेरिका में प्रति दस लाख की आबादी पर 1870 लोग कोरोना से मरे। भारत में यह आंकड़ा 215 लोगों का रहा जबकि भारत की आबादी 138 करोड़ के करीब मानी जा रही है। सतीश कुमार ने बताया कि संक्रमितों के मामले में भी भारत की स्थिति यूरोपीय देशों से बेहतर रही है। अमेरिका में 600 शव अंत्येष्टि के लिए स्थान के इंतजार में अभी भी रखे हुए हैं। भारत में कोरोना की दूसरी लहर इतनी तेजी से आई जिसका किसी को भी पूर्वानुमान नहीं था। इसीलिए इसे संभालने में हमें 15 दिन लग गए।

पेटेंट फ्री अभियान से जुड़ें

सतीश कुमार ने बताया कि देश और दुनिया के कम से कम 20 लाख लोगों को पेटेंट मुक्त वैक्सीन अभियान से जोड़ने के लिए स्वदेशी जागरण मंच ने एक अभियान छेड़ा है। इसके तहत लोगों से ऑनलाइन जुड़ने और अपना डिजिटल हस्ताक्षर करने की अपील की जा रही है। इसके लिए joinswadeshi.com नाम से एक वेबसाइट लिंक जारी किया गया है। इसके अलावा एक पुस्तक भी लिखी गई है जिसका विमोचन होना बाकी है। पुस्तक में महामारियों का इतिहास, चीन के वुहान शहर से कोरोना विश्व भर में कैसे फैला, भारत ने इसकी रोकथाम के लिए क्या-क्या पूर्व तैयारियां कीं– इन बातों का विस्तार से वर्णन किया गया है।

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