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व्यायामशालाओं को जल्द मिलेंगे योग शिक्षक : डॉ. जयदीप

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आयुर्वेद प्राचीन एवं वैज्ञानिक पद्धति, एलोपैथी का अपना महत्व है : डॉ. जयदीप
रेडियो ग्रामोदय के कार्यक्रम ‘जय हो’ में कहा, जून में इस योग शिक्षकों की नियुक्ति तय

पंचकूला / करनाल। कोरोना से लड़ने में आयुर्वेदिक दवाओं और योग की उपयोगिता को आज सभी मान रहे हैं। आयुर्वेद की महत्ता विश्व स्तर पर प्रमाणित हो चुकी है। आयुर्वेद बनाम एलोपैथी का विवाद निरर्थक है। यह किसी आयुर्वेद विरोधी रणनीति का हिस्सा हो सकता है। चिकित्सा विज्ञान में एलोपैथी के योगदान को नकारा नहीं जा सकता। एलोपैथी से विरोध नहीं, उसका भी पूरा सम्मान है, लेकिन चिकित्सा के नाम पर कोई धर्मांतरण का एजेंडा चलाए, भारतीय संस्कृति पर हमला हो, तो उसका मुखर विरोध होना ही चाहिए।यह बिंदु रेडियो ग्रामोदय के कार्यक्रम ‘जय हो’ में हरियाणा योग आयोग के अध्यक्ष डॉ. जयदीप आर्य व हरियाणा ग्रंथ अकादमी उपाध्यक्ष डॉ. वीरेंद्र सिंह चौहान की बातचीत के दौरान उभरकर सामने आए।

योग आयोग के कार्यों पर प्रकाश डालते हुए डॉ. जयदीप आर्य ने इस अवसर पर बताया कि स्कूली पाठ्यक्रमों में भी योग को शामिल करने के लिए एससीईआरटी के साथ मिलकर हरियाणा योग आयोग ने एक सिलेबस तैयार किया है जिसे इसी सत्र से लागू कर दिया जाएगा। हरियाणा देश का एक मात्र ऐसा राज्य है जहां गणतंत्र दिवस एवं स्वतंत्रता दिवस समारोहों में योग को शामिल किया गया है। इन समारोहों में सूर्य नमस्कार समेत योग की अन्य प्रस्तुतियां निर्धारित कर दी गई हैं।

डॉ. वीरेंद्र सिंह चौहान ने पूछा कि हाल में उत्पन्न हुए आयुर्वेद बनाम एलोपैथ के विवाद को वह किस प्रकार देखते हैं? इस पर डॉ. जयदीप ने कहा कि स्वामी रामदेव के जिस बयान पर विवाद पैदा हुआ, वह उनका अपना बयान नहीं था। उन्होंने व्हाट्सएप पर आए एक संदेश को पढ़कर सुनाया था। कभी भारतीय चिकित्सा विज्ञान काफी उन्नत अवस्था में था, लेकिन स्वाधीनता के बाद इस दिशा में ज्यादा काम नहीं हो पाया। इसमें कोई संदेह नहीं कि देर-सबेर आधुनिक चिकित्सा पद्धति को भारतीय संस्कृति और इसके चिकित्सा विज्ञान की शरण में आना ही होगा।

कोरोना काल में आयुर्वेद और योग की भूमिका को किस प्रकार आंका जा सकता है? डॉ. चौहान के इस सवाल पर डॉ. जयदीप ने कहा कि कोरोना से संक्रमित हुए करीब 85% मरीज योग और आयुर्वेद के उपचार से ठीक हुए। इसका आयुष मंत्रालय के ऐप पर प्रमाणिक दस्तावेज मौजूद है जिसे दुनिया भर के विशेषज्ञों ने माना है। हरियाणा पहला ऐसा राज्य है जिसने कोरोना मरीजों के उपचार के लिए दी जाने वाली कोरोना किट में एलोपैथी दवाओं के साथ-साथ आयुर्वेदिक दवाएं भी शामिल करने का साहस दिखाया और इसके व्यापक सकारात्मक परिणाम सामने आए। वायुमंडल में मौजूद कोरोना वायरस को नष्ट करने के लिए प्रदेश के गांव-गांव में यज्ञ के वाहन चलाए गए। कोरोना के उपचार में कोरोनिल अत्यंत लाभकारी है।

योग शिक्षकों की नियुक्ति प्रक्रिया प्रारंभ

हरियाणा ग्रंथ अकादमी उपाध्यक्ष डॉ. वीरेंद्र सिंह चौहान के साथ चर्चा में हरियाणा योग आयोग के अध्यक्ष डॉ. जयदीप आर्य ने बताया कि मुख्यमंत्री मनोहरलाल खट्टर और स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज की अगवाई में हरियाणा सरकार भारत की पारंपरिक चिकित्सा पद्धति को गौरवपूर्ण स्थान दिलाने के लिए विभिन्न परियोजनाओं पर काम कर रही है। इसके तहत प्रदेश के गावों में एक हजार योगशालाओं के निर्माण का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।इसके लिए 1500 करोड़ रुपए आवंटित कर दिए गए हैं। अब तक 528 व्यायामशालाओं का निर्माण पूरा हो चुका है और इनमें योग शिक्षकों की नियुक्ति की प्रक्रिया भी जून के पहले हफ्ते तक पूरी कर ली जाएगी।

उन्होंने कहा कि जिला स्तरीय चयन समितियों को जल्द से जल्द ही यह कार्य पूरा करने के लिए कहा गया है। इस प्रक्रिया में पुराने योग शिक्षकों को वरीयता देने के लिए 5% का कोटा निर्धारित किया गया है। डॉक्टर जयदीप के अनुसार अंततः एक हज़ार योग शिक्षकों की नियुक्ति होनी है नहीं और पूर्व में कार्य कर चुके अधिकांश योग शिक्षक नई व्यवस्था में नई प्रक्रिया के अनुसार समाहित हो सकेंगे.योग शिक्षकों की नियुक्ति के लिए क्या-क्या योग्यताएं निर्धारित की गई हैं? डॉ. चौहान के इस सवाल पर डॉ. जयदीप ने बताया कि योग शिक्षकों की अर्हता के तौर पर योग में डिप्लोमा एवं लेवल-वन का सर्टिफिकेट होना आवश्यक है जो किसी मान्यता प्राप्त संस्था या आर्ट ऑफ लिविंग, पतंजलि योगपीठ आदि से प्रमाणित हो।

कोरोना संक्रमण से बचाव कैसे करें

आयुर्वेद विशेषज्ञ डॉ. जयदीप आर्य ने बताया कि कोरोना संक्रमण से बचने का सबसे अच्छा तरीका यही है कि इसके वायरस को फेफड़ों तक नहीं पहुँचने दिया जाए और संक्रमण के पहले दो तीन दिन में नाक और गले में ही मार दिया जाए। इसमें आयुर्वेद एवं योग अत्यंत प्रभावकारी भूमिका निभा सकता है। नाक में सरसों का तेल या गाय के घी को गुनगुना कर डालें, भाप लें, गरारा करें और अनुलोम-विलोम, कपालभाति, भ्रामरी एवं उज्जयी प्राणायाम का अभ्यास नियमित रूप से करें तो कोरोना संक्रमण से बचा जा सकता है।

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