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वेक अप करनाल में ग्रंथ अकादमी उपाध्यक्ष के साथ राज्यसभा सांसद का संवाद

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देश में अभी 4 लाख चिकित्सकों की कमी : ले. जन. वत्स

करनाल। देश में इस समय लगभग 12 लाख रजिर्स्टड चिकित्सक (डॉक्टर्स) हैं जो कि आवश्यकता से 4 लाख कम हैं। इन 12 लाख डाक्टर्स में से भी बहुत से विदश में बस गए हैं जिससे डाक्टरों की देश में ख़ासी कमी है। रेडियो ग्रामोदय के कार्यक्रम वेक अप करनाल में हरियाणा ग्रन्थ अकादमी के उपाध्यक्ष डा. वीरेन्द्र सिंह चौहान व राज्य सभा सांसद लेफ्टिनेंट जनरल (रिटायर्ड) डॉ. डी. पी. वत्स के बीच चर्चा में यह बात उभरकर सामने आयी। भारतीय जनता पार्टी के सांसद लेफ्टिनेंट जनरल वत्स के साथ डॉक्टर चौहान ने उनके सेना अधिकारी व संसदीय जीवन के विभिन्न पक्षों पर विस्तार से बात की। राज्यसभा दिवस के उपलक्ष में इस कार्यक्रम का आयोजन किया गया था।

चिकित्सक होने के नाते चिकित्सा से जुड़े प्रश्न के सन्दर्भ में सांसद डॉक्टर वत्स ने कहा कि मेडिकल काउंसिंल आफ इंडिया को समाप्त कर नया कमीशन बनाये जाने के बाद इस क्षेत्र में बहुत समस्याएं समाप्त हुई। अब हमारे देश से चिकित्सकों की सप्लाई दुनिया भर में होती है। देश में मेडिकल कमीशन बनने के बाद मेडिकल कालेजों में 50 हजार सीटें बढ़ गई हैं। हरियाणा में तो आने वाले समय में डिस्ट्रिक लेवल पर मेडिकल कालेज खोले जाने की योजना है।डॉक्टर वत्स का सुझाव था कि नये प्रावधानों में कुछ समय के लिए डाक्टरों की देहात में पोस्टिंग में अनिवार्य किया जाना चाहिए।

राज्य सभा के बारे में सांसद डी. पी. वत्स ने बताया कि राज्य सभा को ऊपरी सदन (अपर हाउस) कहा जाता है। यहां पर इलेक्शन की न्यूनतम उम्र 35 वर्ष है जबकि लोक सभा के लिए इलेक्शन की आयु 25 वर्ष है । यह स्थाई सदन (परमानेंट हाउस) है क्योंकि यह पूर्ण रूप से कभी भंग नहीं होता। हर दो साल में चुनाव होते रहते हैं, सांसद आते रहते हैं और जाते रहते हैं । उपराष्ट्रपति जिनका संवैधानिक स्टेटस लोकसभा के स्पीकर से अधिक होता है इसके सभापति होते हैं।

संविधान की मूल प्रति पर भारतीय संस्कृति को दर्शाती हुई तस्वीरों के बारे में एक श्रोता द्वारा पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि संविधान के जो संस्करण बाजार में उपलब्ध हैं, उनमें वह अब नहीं मिलते। संस्कृति को प्रस्तुत करते इन चित्रों को कब, क्यों और कैसे हटा दिया गया इसके विषय में कोई भी प्रामाणिक तथ्य उनकी जानकारी में नहीं है ।

एक प्रश्न के उत्तर में उन्होंने कहा कि जीवन में अनुशासन, दृढ़ निश्चय से पूर्ण व्यवहार और राष्ट्र के प्रति समर्पित सोच, ये गुण प्रत्येक नागरिक के लिए उतने ही आवश्यक हैं जितने कि एक सैनिक के लिए। ये गुण एक ओर सेना में कार्य करते हुए एक सैनिक के व्यक्तित्व में स्वतः आत्मसात हो जाते हैं. दूसरी ओर एक आम नागरिक में इन गुणों को रोपित करने का कार्य राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ बखूबी कर रहा है।

राज्य सभा में उनके द्वारा उठाए गए प्रश्नों और की गयी चर्चाओं के बारे में बताते हुए डॉ. वत्स ने कहा कि स्वास्थ्य , शिक्षा , रक्षा से जुड़े विषयों के विशेषज्ञ होने के नाते और प्रदेश से सीधा सरोकार होने के नाते इन्हीं विषयों पर उन्होंने अनेक बार कई प्रश्न उठाए हैं। प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में जल आपूर्ति व जल से जुड़ी विभिन्न समस्याओं को लेकर जल शक्ति मंत्रालय से विभिन्न चर्चा की है।

रोहतक से डॉ. सुरेन्द्र के युवाओं में बेरोजगारी की समस्या के समाधान को लेकर पूछे गए प्रश्न के उत्तर में डॉ. वत्स ने कहा कि केवल सरकारी नौकरी को ही रोजगार मानने की मानसिकता से बाहर आना होगा। युवाओं को प्राईवेट सेक्टर की नौकरियों पर भी ध्यान केन्द्रित करना चाहिए। प्राईवेट नौकरी में भी युवाओं को तरक्की के बहुत से आयाम मिल सकते हैं। अगर शिक्षा, पारिवारिक परिवेश और युवा की स्वयं की मानसिकता स्व रोजगार की है तो यह बेरोजगारी से लड़ने का सर्वोत्तम विकल्प है। साथ ही जनसंख्या नियंत्रण पर भी काम करना होगा। उद्यमिता को बढावा देकर प्राईवेट सेक्टर की नौकरियों में इजाफा करना होगा जो कि वर्तमान सरकार का प्रमुख लक्ष्य है और इस ओर काफी कार्य हुआ भी है । उन्होंने कहा कि देश में स्वास्थ्य पर्यटन (हेल्थ टूरिज्म ) एक उभरता क्षेत्र है युवाओं को रोजगार की संभावनाओं के लिए भी इस पर ध्यान देना चाहिए । डाक्टर्स को भी इसके माध्यम से विदेश से विदेशी मुद्रा को देश में ला सकने की योजनाओं पर कार्य करना चाहिए ।

जनसंख्या नियंत्रण पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि जनसख्या नियंत्रण कानून देश में होना चाहिए। इस विषय पर जबरदस्ती नहीं होनी चाहिए बल्कि पर्याप्त जागरूकता फैलाकर जनसंख्या की भयावह होती स्थिति को नियंत्रण में लाना चाहिए। यदि हम आज इस विषय पर कार्य करना शुरू करेंगे तो भी इसके परिणाम आते-आते लगभग 30 वर्ष का समय लगेगा।

सांसद के रूप में अपने हलके में कराए गए कार्यों के सम्बन्ध में उन्होंने बताया कि कोविड से पहले एमपी फंड से साढ़े सात करोड़ रुपये खर्च किए। राजस्थान की सीमा से जुड़े अनेक गाँवों में जहाँ पीने के पानी की भयंकर समस्या थी और पाइप लाइन नहीं थी वहां पानी के टैंकरों को दिया गया जिससे दूसरे स्थान से नियमित रूप से टैंकरों के माध्यम से पीने योग्य स्वच्छ पानी पहुँच सके। युवा स्वास्थ्य के प्रति जागरूक हों । खेल और सेना के योग्य बन सकें इसलिए जगह जगह जिम बनवाये। सामान्य आवागमन सुचारू हो सके इसलिए विभिन्न गांवों में अनेकों गलियां बनवाई। गउशालाओं को अनुदान दिया, पशुओं के लिए शेड बनवाये।

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