ग्रामोदय

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रेडियो ग्रामोदय के ‘म्हारे गाम की बात’ कार्यक्रम में गांव राहड़ा पर चर्चा

 

असंध । देश और राज्यों का विकास एवं उनका सुचारू संचालन संस्थागत माध्यमों से ही संभव है। इस व्यवस्था का निर्माण राजनीतिक प्रणाली से ही हो सकता है। इसे इस तरह समझा जाए कि हमारे सामाजिक जीवन का नियमन और संचालन करने के लिए किसी ना किसी व्यवस्था का होना जरूरी है। व्यवस्थाहीन समाज को ही जंगलराज कहते हैं। इसलिए, उस व्यवस्था के निर्माण के लिए जो माध्यम विकसित हुआ उसे ही राजनीति कहते हैं। अच्छी शासन व्यवस्था और शांतिपूर्ण जीवन-यापन के लिए कर्मठ एवं इमानदार लोगों को आगे आना होगा। राजनीति में उनकी सख्त जरूरत है।

उपरोक्त विचार रेडियो ग्रामोदय के कार्यक्रम ‘म्हारे गाम की बात’ में राहडा के ग्रामीणों से चर्चा के दौरान हरियाणा ग्रंथ अकादमी के उपाध्यक्ष डॉ. वीरेंद्र सिंह चौहान ने व्यक्त किए। डॉ. चौहान ने यह टिप्पणी सामाजिक कार्यकर्ता और कारोबारी नरेंद्र राणा के उस बयान पर की जिसमें उन्होंने राजनीति को गंदी चीज बताया था और इससे दूर रहने की बात कही थी।

डॉ. चौहान ने कहा कि गावों के विकास के लिए यह जरूरी है कि स्थानीय समस्याएं व आपसी विवाद आपस में ही मिल-बैठकर सुलझा लिए जाएं। आपसी विवाद का थाना-कचहरी तक जाना अच्छी बात नहीं। इससे आपसी सौहार्द और गांव की सामाजिक समरसता पर असर पड़ता है। चर्चा के एक प्रतिभागी शुभम राणा ने भी उनकी इस बात का समर्थन किया।

गांव राहडा की पृष्ठभूमि और वहां विकास की स्थिति पर चर्चा करते हुए नरेंद्र राणा ने कहा कि यह गांव कब बसा, इस संबंध में कोई प्रामाणिक जानकारी उपलब्ध नहीं है। इस गांव में तीन पट्टियां हैं और यहां कई जातियों के लोग निवास करते हैं। ग्राम पंचायत का पिछला कार्यकाल संतोषजनक कहा जा सकता है। इस दौरान गांव में विकास के कई कार्य हुए। पाइपलाइन बिछाई गई, पेयजल के लिए मोटर भी लगाया गया। यह मोटर पिछले साल तक तो ठीक कार्य कर रहा था, लेकिन इस साल इसका संचालन सुचारू रूप से नहीं हो पा रहा। गांव की कुछ गलियों के पुनर्निर्माण की जरूरत है।

गांव के कितने लोग सरकारी नौकरियों में हैं? डॉ. चौहान के इस सवाल पर टिंकू रोजड़ा ने बताया कि सरकारी नौकरियों में काम करने वाले उनके करीब 5-6 दोस्त पिछले पांच साल तक गांव में रहे। उन्होंने बताया कि गांव में 2 लोग ऐसे भी थे जो न्यायिक सेवा में जज के पद पर नियुक्त थे।

टिंकू रोजड़ा ने कहा कि गांव में पानी निकासी की समस्या है और सड़कें भी टूटी हुई हैं। इसके अलावा गांव का स्कूल भवन भी जर्जर अवस्था में है जिसका निर्माण करने की जरूरत है।

टिंकू ने बताया कि दो साल पहले गांव के एक युवा सॉफ्टवेयर इंजीनियर वीरेंद्र ने ग्रामवासियों का डेटाबेस तैयार करने की अभिनव पहल की थी और एक ऐप तैयार किया था जिसकी लॉन्चिंग खुद मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने की थी। इस डेटाबेस में गांववासियों के बारे में संपूर्ण जानकारी उपलब्ध थी। मसलन, गांव का कौन सा व्यक्ति क्या व्यवसाय करता है, कहां तक पढ़ा लिखा है और उसका मोबाइल नंबर क्या है, उसका फोटो आदि। इसके अलावा इस ऐप में यह भी जानकारी थी कि गांव में कितने स्कूल, पेट्रोल पंप, आटा चक्की और नागरिक सुविधा के अन्य साधन उपलब्ध हैं। लेकिन कतिपय कारणों से यह आईडिया सिरे नहीं चढ़ पाया।

डॉ. चौहान ने पूछा कि गांव राहडा में सामूहिक प्रयास से सर्वप्रथम कौन सा कार्य करने की जरूरत है? इस पर टिंकू ने कहा कि गांव में फिलहाल एक श्मशान घाट की सख्त जरूरत है। इसके अलावा गांव को हरा-भरा बनाने के लिए पौधरोपण करने की भी जरूरत है।

डॉ चौहान ने कहा कि गांवों को साफ-सुथरा और हरा-भरा बनाए रखने के लिए सबको मिलकर प्रयास करना होगा। उन्होंने किसानों की समस्याओं को देखते हुए गांव में एक फार्मर प्रोड्यूसर ऑर्गेनाइजेशन (एफपीओ) बनाने की सलाह दी ताकि कृषि उत्पादों के लिए विपणन की समस्या का समाधान हो सके।

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