ग्रामोदय

योग प्राचीनतम भारतीय विद्या : डॉ. चौहान

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असंध के नगरपालिका पार्क में चलने वाली महिला योग कक्षा में योगाभ्यासियों एवं योग शिक्षकों को संबोधन

असंध। योग प्राचीनतम भारतीय विद्या है जो पूर्णत: शरीर विज्ञान पर आधारित है। शरीर का सिर्फ व्याधियों से मुक्त होना ही संपूर्ण स्वास्थ्य नहीं है। शरीर के साथ-साथ मन-मस्तिष्क और आत्मा का भी स्वस्थ होना उतना ही जरूरी है। इन तीनों के स्वस्थ हुए बिना मनुष्य को पूर्णत: स्वस्थ नहीं कहा जा सकता। जीवन का यह गूढ़ ज्ञान हमारे ऋषि-मुनियों ने हजारों साल पहले दे दिया था। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने इसे अब जाकर माना है। भारतीय संस्कृति एवं जीवन दर्शन में छिपे ज्ञान के अनमोल भंडार को हमें फिर से ढूंढ कर उस पर अमल करना होगा। उपरोक्त विचार हरियाणा ग्रंथ अकादमी के उपाध्यक्ष एवं भाजपा प्रदेश प्रवक्ता डॉ. वीरेंद्र सिंह चौहान ने व्यक्त किए। वह असंध की पतंजलि योग समिति द्वारा नगरपालिका पार्क में चलाई जा रही महिला योग कक्षा के योगाभ्यासियों एवं योग शिक्षकों को संबोधित कर रहे थे।

डॉ. चौहान ने कहा कि आधुनिकता की होड़ और पाश्चात्य संस्कृति के अंधानुकरण में हम अपनी अनमोल प्राचीन भारतीय विद्या एवं सांस्कृतिक विरासत को भूल बैठे थे। राजनीति की संकीर्ण सोच ने भी प्राचीन भारतीय विद्या का निरादर करने में कोई कसर नहीं छोड़ी। लेकिन ऐसे माहौल में भी योग गुरु बाबा रामदेव जैसे लोग मौजूद हैं जिन्होंने लुप्त होती जा रही भारतीय विरासत को पुनर्जीवित कर योग को घर-घर और विश्व भर में पहुंचाया। योग को वैश्विक पहचान दिलाने में बाबा रामदेव का योगदान कभी भुलाया नहीं जा सकता।

ग्रंथ अकादमी उपाध्यक्ष डॉ. वीरेंद्र सिंह चौहान ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी योग को वैश्विक पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उन्होंने अपनी करिश्माई नेतृत्व क्षमता से पूरे विश्व को योग की परिधि में लाने का काम किया है। यह भारत की नए अंदाज की राजनीति की वैश्विक स्वीकार्यता का प्रतीक है कि संयुक्त राष्ट्र संघ के अधिकांश देश अब हर साल योग दिवस मनाते हैं । उन्होंने कहा की योग के नियमित अभ्यासी सिर्फ शारीरिक स्वास्थ्य को ही बढ़ावा नहीं दे रहे, बल्कि वह विभिन्न बीमारियों पर हर साल होने वाले अरबों रुपए के खर्च को भी बचा रहे हैं। कोरोना काल में योग के गुणकारी तत्वों को सबने देखा और महसूस किया है। इसकी महत्ता का अंदाजा इस बात से भी लगाया जा सकता है कि योग अब आधुनिक चिकित्सा पद्धति में भी शामिल होता जा रहा है। इस अवसर पर डॉ. चौहान ने महिलाओं के लिए योग कक्षा के संचालन के लिए पतंजलि योग समिति का आभार व्यक्त किया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता पतंजलि योग समिति की असंध इकाई के संरक्षक मायाराम शास्त्री एवं समिति के प्रभारी एडवोकेट नरेंद्र शर्मा ने की। इस अवसर पर महिला पतंजलि प्रभारी सुनीता गोयल, योग शिक्षिका किरण भी उपस्थित रहे ।

भारतीय कालगणना विश्व की प्राचीनतम कालगणना

डॉ. वीरेंद्र सिंह चौहान ने कहा कि भारतीय कालगणना संसार की सबसे प्राचीन वैज्ञानिक कालगणना है। कालगणना समेत भारतीय संस्कृति की अनेक ऐसी धरोहर हैं जो देश की मातृशक्ति की बदौलत आज भी जीवित हैं। डॉ. चौहान ने मातृशक्ति को नमन करते हुए उनका आह्वान किया कि वे भारतीय कालगणना पद्धति को कदापि ना भूलें। अपने घरों में देसी कैलेंडर अवश्य रखें और बच्चों के सामने देसी तिथियों की चर्चा अवश्य करें। आज के बच्चे ही कल के देश के कर्णधार हैं। उन्हें भारत की सांस्कृतिक विरासत से रूबरू कराना अत्यंत जरूरी है।

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