ग्रामोदय

वैकल्पिक फसलों की हो खेती : डॉ. चौहान

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वेक अप करनाल में ग्राउंड वाटर संरक्षण पर चर्चा

करनाल। पृथ्वी पर जीवन के अस्तित्व को बचाने के लिए भू-जल का संरक्षण बहुत जरूरी है। जमीन के नीचे स्थित इस जलसंपदा को बचाने के लिए हमें इसका दोहन सीमित करना होगा। भूजल का दोहन कम करने के अनेक उपायों में कृषि और बागवानी भी एक है। हमें अपनी खेती करने के अंदाज को बदलना होगा। धान की फसल उपजाने में ग्राउंड वाटर की बड़ी मात्रा का दोहन होता है। एक अनुमान के अनुसार 1 किलो धान के उत्पादन में 4000 लीटर पानी की आवश्यकता होती है। इसके कारण करनाल जिले के गांवों में भूजल का स्तर घटकर अब 100 से 120 फीट नीचे चला गया है। पहले या स्तर जमीन से सिर्फ 30 फीट नीचे हुआ करता था। यह घटता भूजल स्तर चिंता का विषय है। इसलिए किसानों को अब ध्यान से अन्य फसलों की ओर जाना होगा। इसी उद्देश्य को ध्यान में रखकर हरियाणा सरकार ने 3 साल पहले मेरा पानी मेरी विरासत योजना शुरू की थी जिसके तहत कई प्रावधान किए गए हैं।

उपरोक्त टिप्पणी हरियाणा ग्रंथ अकादमी के उपाध्यक्ष डॉ. वीरेंद्र सिंह चौहान ने रेडियो ग्रामोदय के कार्यक्रम वेकअप करनाल में असंध के कृषि विकास अधिकारी डॉ. राधेश्याम से चर्चा के दौरान की। मेरा पानी मेरी विरासत योजना को धरातल पर उतारने में पेश आ रही समस्याओं पर चर्चा करते हुए डॉ. राधेश्याम ने बताया कि पहले इस योजना को जलशक्ति अभियान के नाम से किसानों के बीच प्रचारित किया गया था। ब्लॉक एवं जिला स्तर पर किसान कैंप लगाकर किसानों को जागरूक किया गया कि एक किलो धान का उत्पादन करने में औसतन 4000 लीटर पानी खर्च होता है जबकि इसकी वैकल्पिक फसल मक्की के उत्पादन में मात्र 800 लीटर पानी की खपत होती है। इसलिए किसानों को वैकल्पिक फसलों की बिजाई पर ध्यान देना चाहिए। डॉ राधेश्याम ने बताया की वैकल्पिक फसलों में मक्की, बाजरा, कपास, मूंग, उड़द, तिल आदि शामिल हैं।

वेक अप करनाल

डॉ. चौहान ने बताया कि किसानों को जागरूक करने के सुपरिणाम सामने आए। इस योजना के तहत हरियाणा में करीब एक लाख एकड़ भूमि धान मुक्त हो गई। धान न बोने वाले किसानों के खाते में प्रदेश सरकार ने 52 करोड़ रुपए से ज्यादा की राशि डाली। अब सरकार का लक्ष्य दो लाख एकड़ भूमि को धान उत्पादन से मुक्त करने का है। उनकी बात को आगे बढ़ाते हुए डॉ राधेश्याम ने बताया कि पहले मक्की के खरीदारों का अभाव था। इसे दूर करने के लिए सरकार ने वैकल्पिक फसलों का न्यूनतम समर्थन मूल्य घोषित किया और फसलों के खरीदार भी तैयार किए। इसका नतीजा यह हुआ कि हरियाणा के 15 जिलों में करीब 15 सौ एकड़ भूमि में किसानों ने मक्की की फसल उपजाई। उन्होंने स्पष्ट किया कि मेरा पानी मेरी विरासत योजना के तहत सरकारी पोर्टल पर अपनी फसलों का पंजीकरण कराने वाले किसानों की ही फसल सरकार द्वारा खरीदी गई।

डॉ. राधेश्याम ने बताया कि धान के वैकल्पिक फसलों के उत्पादन के लिए विभाग को पूरे करनाल जिले के लिए 8700 एकड़ भूमि का लक्ष्य दिया गया है। फसलों का पंजीकरण कराने में उपलाना का स्थान सबसे ऊपर है। पंजीकरण की अंतिम तिथि 25 जून है। उन्होंने बताया की सरकार ने वैकल्पिक फसलों में चारे के उत्पादन को भी शामिल किया है। चारा उपजाने वाले किसानों को सरकार ₹7000 के हिसाब से पैसे देगी। इसके अलावा वैकल्पिक फसलों का बीमा कराने के लिए प्रीमियम का खर्चा भी सरकार की ओर से वहन किया जाएगा।

इस अवसर पर डॉ चौहान ने बताया की फसलों की चॉइस को बदलने के लिए हरियाणा सरकार ने वर्ष 2030 तक के लिए एक बागवानी विजन तैयार किया है। बागवानी विजन में भावांतर भरपाई योजना के तहत इस बार 23 फसलों को शामिल किया गया है जिनमें 14 सब्जियां भी शामिल हैं। इस योजना के तहत 21 फसलों के संरक्षित मूल्य निर्धारित किए गए हैं। साथ ही यह प्रावधान भी किया गया है कि यदि भावांतर भरपाई योजना में शामिल फल व सब्जियों की पूरी फसल प्राकृतिक आपदा के कारण नष्ट हो जाती है तो उसके पूरे खर्च की भरपाई मुख्यमंत्री बागवानी बीमा योजना के अंतर्गत की जाएगी। इसके तहत किसानों को ₹30000 प्रति एकड़ के हिसाब से क्लेम मिलेगा। फलों के मामले में भरपाई की यह दर ₹40000 प्रति एकड़ होगी। इस बीमा योजना का लाभ लेने के लिए किसानों को 2.5% राशि का भुगतान करना होगा।

डॉ चौहान ने बताया कि मनोहर लाल खट्टर की सरकार ने किसानों के लिए एक और योजना शुरू की है। इसके तहत यदि कोई किसान 1 एकड़ क्षेत्र में 400 पौधे लगाता है तो उसे अगले 3 साल तक प्रदेश सरकार प्रति एकड़ ₹10000 देगी। यह भी जल संरक्षण और हरियाली बढ़ाने के उद्देश्य से किया गया है। उन्होंने बताया कि इस बार वैकल्पिक फसलों की सूची से बाजरा को हटा लिया गया है।

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