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पाकिस्तान पर स्पष्ट थे डॉक्टर भीमराव अंबेडकर के विचार

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जिहादी सोच से निपटने में बाबा साहेब के विचार आज भी प्रासंगिक : डॉ. सी.पी. सिंह

करनाल। भारत विभाजन के समय गांधी ने अगर डॉ. भीमराव अंबेडकर की मांग मान ली होती तो देश संभवत: आज इस्लामी आतंकवाद की समस्या से न जूझ रहा होता। इस्लामिक आतंकवाद और अलगाववाद के सन्दर्भ में बाबा साहेब के विचार आज भी प्रासंगिक हैं। डॉ. अम्बेडकर की दूरदर्शिता इस बात से प्रमाणित होती है कि आज जो हो रहा है, उसकी कल्पना उन्होंने अपने जीवन काल में कर ली थी। यह मानना है प्रसिद्ध शिक्षा शास्त्री डॉ. सी. पी. सिंह का। अंबेडकर जयंती के अवसर पर रेडियो ग्रामोदय पर आयोजित वेकअप करनाल कार्यक्रम में वह वीरवार को डॉ . वीरेंद्र सिंह चौहान से रूबरू थे।

कार्यक्रम के दौरान स्वतंत्रता संग्राम में गांधी , नेहरू, पटेल व अंबेडकर समेत अन्य नेताओं की भूमिका, भारत विभाजन, अनुच्छेद 370 व गांधी से अंबेडकर के गंभीर मतभेदों सहित कई अन्य मुद्दों पर डॉ. चौहान द्वारा पूछे गए सवालों का डॉ. सी. पी. सिंह ने बड़ी बेबाकी और संजीदगी से जवाब दिया और अपनी राय रखी।

विभाजन के समय महात्मा गांधी से हुए गंभीर मतभेदों पर डॉ. चौहान द्वारा पूछे गए सवाल पर डॉ.सी.पी. सिंह ने डॉ. अंबेडकर की पुस्तक ‘थॉट्स ऑन पाकिस्तान’ का हवाला देते हुए कहा कि अंबेडकर मानते थे कि इस्लाम में अन्य मतों या मतावलंबियों के लिए कोई स्थान नहीं है। वह अन्य उपासना पद्धति की इजाजत नहीं देता। इसलिए जब धर्म के आधार पर भारत का विभाजन हो तो नवगठित इस्लामिक देश पाकिस्तान में कोई गैर मुस्लिम न रहे और भारत में भी कोई मुस्लिम न रहे। ऐसा ना होने पर देश जिहादी सोच से मुक्त नहीं रह पाएगा और विभाजन की परिस्थितियां भविष्य में भी पैदा हो सकती हैं। डॉ. सी.पी. सिंह ने पाकिस्तान के पहले हिंदू कानून मंत्री डॉ. जोगेंद्र नाथ मंडल का हवाला देते हुए कहा कि पाकिस्तान से उन्हें अपनी जान बचाकर भागना पड़ा था और उनकी यहां गुमनामी में मौत हुई। उन्होंने कहा कि अंबेडकर जानते थे कि मुस्लिम देश पाकिस्तान में हिंदुओं के लिए अपनी पहचान बचा कर रखना मुश्किल होगा।

डॉ. सी. पी. सिंह ने कहा कि अंबेडकर के गांधी और नेहरू से गंभीर वैचारिक मतभेद थे। जम्मू कश्मीर में धारा 370 लगाने के मुद्दे पर भी अंबेडकर ने अपने कानून मंत्री रहते इसमें सहयोग करने से साफ इनकार कर दिया था और इसे एक राष्ट्र विरोधी कृत्य बताया था। डॉ. वीरेंद्र सिंह चौहान के एक सवाल पर डॉ. सी.पी. सिंह ने कहा कि अंग्रेज चाहते थे कि भारतीय मानसिक रूप से उनके गुलाम बने रहें और इस साजिश के तहत उन्होंने कई किताबें लिखी। उन्होंने दलितों को गुमराह करने का प्रयास किया जिससे काफी हद तक अंबेडकर भी प्रभावित हुए। डॉ. सी.पी. सिंह ने कहा कि इस्लाम के प्रति अपनी स्पष्ट सोच के कारण ही अंबेडकर ने इस्लाम और ईसाई धर्म के बजाय बौद्ध धर्म को अपनाया जो वास्तव में सनातन धर्म की ही शाखा है। डॉ. सी.पी. सिंह ने कहा कि सुभाष चंद्र बोस के कारण अंग्रेजों को भारत छोड़कर जाना पड़ा। गांधी सोचते थे कि वह अंग्रेजों से बिना सीधी लड़ाई लड़े भी उन्हें देश छोड़ने पर मजबूर कर देंगे। चर्चा के दौरान डॉ. वीरेंद्र सिंह चौहान ने बताया कि अंबेडकर के गांधी से मतभेद इतने गहरे थे कि बीबीसी को दिए एक साक्षात्कार में अंबेडकर ने उन्हें महात्मा और दलित हितैषी मानने से भी इंकार कर दिया था।

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