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पर्यावरण के महत्व को समझें, गांवों में चले जागरूकता अभियान : डॉ. चौहान

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रेडियो ग्रामोदय के वेकअप करनाल में धरती को हरा-भरा बनाने के उपायों पर चर्चा

करनाल। धरती से मनुष्य का संबंध माता और पुत्र जैसा है। धरती बचेगी, तभी इस पर मौजूद जीवन बचेगा। पर्यावरण को बचाए बिना पृथ्वी को बचाना संभव नहीं है। आज धरती संकट में है, इसीलिए मानव जीवन पर भी बड़ा खतरा मंडरा रहा है। कोरोना समेत विभिन्न कालखंड में उत्पन्न होने वाली महामारी संभवत: पर्यावरण प्रदूषण का ही दुष्परिणाम है। अपनी धरती को हरा-भरा और खुशहाल रखने के लिए हमें हरसंभव प्रयास करने होंगे। पौधरोपण उनमें से एक है।

यह विचार रेडियो ग्रामोदय के वेकअप करनाल कार्यक्रम में पृथ्वी और पर्यावरण संरक्षण के विषय पर करनाल के मंडलीय वन अधिकारी (डीएफओ) नरेश रंगा से चर्चा के दौरान हरियाणा ग्रंथ अकादमी के उपाध्यक्ष डॉ. वीरेंद्र सिंह चौहान ने व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि हमारे पूर्वज पर्यावरण के प्रति अत्यंत सजग एवं दूरदर्शी थे जबकि उस वक्त पृथ्वी पर पर्यावरण का कोई संकट नहीं था। हमारी संपूर्ण जीवन शैली और परंपराएं इस प्रकार निर्धारित की गई कि पृथ्वी और पर्यावरण को कोई नुकसान न पहुंचे और इस पर मौजूद संपूर्ण जीवन सुरक्षित रहे।

डीएफओ नरेश रंगा ने इस अवसर पर कहा कि शुद्ध जल और शुद्ध वायु जीवन का आधार हैं और हर व्यक्ति का मौलिक अधिकार भी। भावी पीढ़ी को शुद्ध जल और शुद्ध वायु देना हम सबका दायित्व है। इसलिए आने वाले कल के लिए हमें अपने वर्तमान को दुरुस्त करना होगा। पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता आज समय की जरूरत है। वन विभाग इस दिशा में कार्य कर रहा है और करनाल के गांवों में बढ़े स्तर पर पौधारोपण किया गया है ।

करनाल जिले में वन क्षेत्र के विस्तार के लिए विभाग ने और क्या-क्या कार्य किए हैं? डॉ. चौहान के इस सवाल पर नरेश रंगा ने बताया कि गांव की जमीन और सड़कों पर पेड़-पौधे लगाने के लिए एक ग्रीन बैंक तैयार किया गया है। करनाल शहर में प्रवेश से लेकर अंदर काफी दूरी तक सड़क के दोनों तरफ पेड़ और फूल वाले पौधे लगाए गए हैं। यहाँ पर पौधारोपण के एक सेगमेंट से दूसरे सेगमेंट की बीच की दूरी जो समान्यत: 4x 4 मीटर होती है उसे घटाकर 2×2 मीटर किया गया है, जिससे अपेक्षाकृत अधिक पेड़-पौधे लगाए जा सके। उन्होंने कहा कि पौधरोपण के लिए पर्याप्त जमीन नहीं मिलती। जमीन को लेकर किसानों से अक्सर संघर्ष चलता रहता है। पौधरोपण किए जाने के बाद किसान उसे आग लगाकर नष्ट कर देते हैं।

डॉ. चौहान ने रंगा से सहमति जताते हुए कहा कि करनाल जिले की ग्रामीण सड़कों पर पौधे लगाने के लिए ग्राम पंचायतों को ही पहल करनी होगी। यह आने वाली पीढ़ी के लिए अत्यंत आवश्यक है। किसानों को जागरूक करने के लिए अभियान चलाना आवश्यक है। समाज और सरकार के बीच कड़ी बनना हमारा दायित्व है।

नरेश रंगा ने बताया कि विभाग के कर्मियों ने गांवों में घर-घर जाकर लोगों को करीब एक लाख पौधे बांटे और ग्रामीणों को प्रेरित किया कि खेत या बाड़े में जहां भी संभव हो, पौधे लगाएं। उन्होंने कहा कि हर व्यक्ति को अपने जीवन में कम से कम 10 पौधे अवश्य लगाने चाहिए। रंगा ने जानकारी दी कि मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने भी स्कूली बच्चों को पौधे लगाने के लिए प्रेरित किया था। इसके तहत करीब 1.25 लाख पौधे लगाने का लक्ष्य है।

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