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धर्मांतरण की प्रवृत्ति खतरनाक, समाज को करें जागरूक : डॉ. चौहान

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रेडियो ग्रामोदय के कार्यक्रम ‘म्हारे गाम की बात’ में गांव उपलाना पर चर्चा

करनाल। धर्मांतरण की प्रवृत्ति अत्यंत खतरनाक है। यह सामाजिक ताने-बाने को तोड़ने का काम करता है जो देश में अशांति का मुख्य कारण है। देश के हर नागरिक को अपनी स्वेच्छा से किसी भी धर्म का पालन करने या उसे स्वीकार करने की आजादी है, लेकिन धोखे, पैसे के लालच या डर दिखाकर किसी का भी धर्मांतरण कराना कानूनन अपराध है।

धर्मांतरण के खिलाफ देश में पहले से कानून बने हुए हैं। इसके बावजूद ऐसी घटनाएं कमोबेश देश के हर हिस्से में देखने-सुनने को मिलती हैं। इसलिए धर्मांतरण रोकने के लिए सिर्फ कानून काफी नहीं है। इसके खिलाफ लोगों को जागरूक करना होगा और धैर्य के साथ कोई योजना बनानी होगी।

वार्ता का ऑडियो …..
यूट्यूब पर देखें पूरा कार्यक्रम…….

ये विचार हरियाणा ग्रंथ अकादमी के उपाध्यक्ष डॉ. वीरेंद्र सिंह चौहान ने रेडियो ग्रामोदय के कार्यक्रम ‘म्हारे गाम की बात’ में ग्रामीणों से चर्चा के दौरान व्यक्त किए। यह टिप्पणी उन्होंने उपलाना की वस्तुस्थिति पर चर्चा के दौरान की। कार्यक्रम में गांव उपलाना पर चर्चा के दौरान ग्रामीण सुनील दत्त ने बताया कि ईसाई ऐ मिशनरियों की गतिविधियां उप लाना सहित क्षेत्र में कई गांवों में बढ़ रही हैं। इसके चलते भविष्य में भी सामाजिक व क़ानूनी जटिलताएं पैदा हो सकती है।

चर्चा में भाग ले रहे इंजीनियर विश्वजीत सिंह राणा और बैंक मित्र नाहर सिंह ने बताया कि उपलाना हरियाणा का एक ऐसा गांव है जो विकास के अधिकतर मामलों में प्रदेश के अन्य गांवों से काफी आगे है। नाहर सिंह ने बताया कि इस गांव को संयुक्त पंजाब के समय कुंवर रामपाल सिंह को विधायक बनने का श्रेय प्राप्त है। कंवर रामपाल बहुत कम उम्र में विधायक बन गए थे। हरियाणा बनने पर वे मंत्री भी रहे।उन्होंने गांव और क्षेत्र के विकास के लिए बहुत कार्य किए। उनके विकास कार्यों का यह असर है कि आज तक गांव में आपसी भाईचारा बना हुआ है।

विश्वजीत सिंह राणा ने बताया कि इस गांव में लगभग सभी बुनियादी सुविधाएं मौजूद हैं। गांव का अपना सब स्टेशन है और एक बहुत बड़ी गौशाला भी है जो करीब डेढ़ सौ एकड़ में फैली हुई है। गांव में दो सरकारी और दो प्राइवेट स्कूल हैं जिनमें पढ़ाई का स्तर काफी संतोषजनक है। गांव में एक अच्छा चिकित्सालय भी है । इसके अलावा गांव में सड़कों एवं गलियों का निर्माण भी हो चुका है।

विश्वजीत ने बताया कि गांव उपलाना में तीन बड़े आर्मी अधिकारी भी रह चुके हैं। उनके अलावा गाँव के सपूत तो भी सैनिक दरबारा सिंह भी थे जो कारगिल युद्ध में वीरगति को प्राप्त हुए थे। वीर चक्र से विभूषित कर्नल देवेंद्र सिंह अब सेवानिवृत्त हो चुके हैं।

उपलाना गांव का इतिहास बताते हुए विश्वजीत ने कहा कि बुजुर्गों से उन्होंने सुना है कि क़रीब करीब 1000 साल पहले जींद से आए कलायत होते हुए तीन भाइयों ने तीन स्थानों को आबाद किया। सबसे बड़े भाई ने असंध को बसाया, उससे छोटे भाई ने सालवन और सबसे छोटे भाई ने गांव उपलाना को बसाया। मुस्लिम शासन काल में बड़े भाई का परिवार धर्मांतरण के बाद मुसलमान बन गया। लेकिन उपलाना और सालवन धर्मांतरण के इस कुचक्र से बचे रहे। आज सालवन और उपलाना राजपूतों के बड़े गांव माने जाते हैं।

कमेटी की बैठकें ज्यादा नहीं होती और इसके कार्यों की कागजों में ही खानापूर्ति होती है। नाहर ने बताया कि गांव के लोगों का बैंकों से जुड़ाव काफी अच्छा है। गांव में 1063 राशन कार्डधारी हैं और हर राशन कार्डधारी परिवार का खाता बैंक में खुला है।
कार्यक्रम में शामिल हुए युवा जैविक कृषक शैलेंद्र ने कहा कि अगर हम ख़ुद को और अपने परिजनों को भोजन के ज़रिए मिल रहे ज़हर के दुष्प्रभावों से बचाना चाहते हैं तो हमें जैविक खेती की तरफ़ रुख़ करना पड़ेगा। उन्होने कहा की शुरुआत में कम से कम इतनी जैविक खेती हर किसान को करनी चाहिए जिससे कि उसे अपने परिवार के नहीं उपभोग के लिए पर्याप्त अनाज और सब्ज़ियां मिल जाए।

स्कूल मैनेजमेंट कमेटियों को सक्रिय करें

डॉ. वीरेंद्र सिंह चौहान ने कार्यक्रम में बताया कि हरियाणा के सभी राजकीय स्कूलों में स्कूल मैनेजमेंट कमिटी गठित करने का प्रावधान किया गया है जो स्कूल और शिक्षा संबंधी स्थिति का निगाह रखती है और उन्हें दुरुस्त करने के लिए आवश्यक कदम उठाती है। अपने गाँव के राजकीय विद्यालय की बेहतरी के लिए और गाँव में यह समिति सक्रिय होनी चाहिए। उन्होंने पूछा कि उपलाना में स्कूल प्रबंधन कमेटी कितना सक्रिय है? इस पर नाहर सिंह ने बताया कि उपलाना में स्कूल प्रबंधन कमेटी ज्यादा सक्रिय नहीं है।

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