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गरीबों को निजी अस्पतालों में इलाज के लिए सरकार देगी आर्थिक सहायता : डॉ. चौहान

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वेकअप करनाल कार्यक्रम में कोरोना के संकट काल में सामाजिक संगठनों की भूमिका पर चर्चा

करनाल। कोरोना महामारी से जूझ रहे प्रदेश के बीपीएल परिवार भी अपना उपचार ठीक से करवा सकें इसके लिए मनोहर लाल खट्टर की सरकार ने आर्थिक सहायता देने की घोषणा की है। गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन कर रहे परिवार के लोगों को निजी अस्पतालों में भर्ती होने पर इलाज के लिए सात दिनों तक ₹5000 प्रतिदिन के हिसाब से दिए जायेंगे। इसके अलावा सरकार ने निजी अस्पतालों में मरीजों से लूट-खसोट को रोकने के लिए उपचार की दरें या पैकेज तय कर दिए हैं ताकि अस्पतालों की मनमानी पर अंकुश लग सके। नई व्यवस्था के तहत कोरोना पॉजिटिव मरीजों के आइसोलेशन बेड का शुल्क ₹8000 प्रति दिन होगा। ऑक्सीजन की जरूरत वाले मरीजों के लिए नॉन आईसीयू ऑक्सीजन बेड का शुल्क ₹13000 प्रति दिन होगा। इसी प्रकार गंभीर मरीजों के लिए ऑक्सीजन सुविधा से युक्त आईसीयू बेड की फीस ₹15000 प्रतिदिन होगी। नकद भुगतान करने वाले मरीजों के लिए इस पैकेज में टेस्ट, दवाएं, बेडसाइड डायलिसिस, डॉक्टर की फीस आदि शामिल हैं। रेम डे सिविर जैसी दवाओं का भुगतान मरीज को इस पैकेज के अतिरिक्त करना होगा। इन दरों को अस्पताल के डिस्चार्ज काउंटरों पर लगाने की व्यवस्था सुनिश्चित की गई है।

उपरोक्त जानकारी रेडियो ग्रामोदय के वेकअप करनाल कार्यक्रम में कोरोना काल में सामाजिक संगठनों की भूमिका पर हरियाणा ग्रंथ अकादमी के उपाध्यक्ष डॉ. वीरेंद्र सिंह चौहान और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के जिला सेवा प्रमुख दिनेश गर्ग तथा विभाग संपर्क प्रमुख कपिल अत्रेजा के बीच चर्चा के दौरान उभरकर सामने आई। डॉ चौहान ने कहा कि समाज का एक-एक जीवन कीमती है। इसलिए कोशिश यही होनी चाहिए कि बीमारी से एक भी प्राण न जाए।
इस संकट काल में सामाजिक संगठन किस प्रकार अपनी भूमिका निभा रहे हैं ? डॉ. चौहान के इस सवाल पर संघ के विभाग संपर्क प्रमुख कपिल अत्रेजा ने बताया कि आरएसएस की कोशिश है कि बीमारी से परेशान होकर अस्पताल आने वाला कोई भी मरीज बिना उपचार के वापस ना जाए। यदि संबंधित अस्पताल में बेड उपलब्ध न भी हो तो जब तक अन्य अस्पतालों में उसके लिए बेड का इंतजाम नहीं हो जाता, तब तक उसे इस अस्पताल में प्राथमिक उपचार मिलता रहे। उन्होंने बताया कि कोरोना मरीजों को अस्पतालों में बेड व अन्य आवश्यक सुविधाएं सुनिश्चित कराने के लिए संगठन ने एक टीम बनाकर 18 अस्पतालों को चिन्हित किया है। इनमें सबसे प्रमुख नाम कल्पना चावला अस्पताल का है।

अस्पतालों में रोज-रोज बदलती स्थितियों पर संघ के कार्यकर्ता किस प्रकार निगरानी रखते हैं? डॉ. चौहान के इस सवाल पर कपिल अत्रेजा ने बताया कि प्रत्येक अस्पताल के लिए एक वरिष्ठ कार्यकर्ता तैनात किया गया है जिसके अंतर्गत 3-4 अन्य कार्यकर्ताओं की टीम अस्पताल में बारी-बारी ड्यूटी देती है। पारदर्शिता बरतने के उद्देश्य से अस्पताल प्रबंधन की ओर से सुबह और शाम बिस्तरों की उपलब्धता की अद्यतन सूची जारी की जाती है जिसमें यह भी बताया जाता है कि उपलब्ध बेड किन-किन सुविधाओं से युक्त है। संघ के कार्यकर्ता अस्पताल के उन बिस्तरों का भी पूरा ब्यौरा मांगते हैं जो खाली नहीं हैं।

संघ के जिला सेवा प्रमुख दिनेश गर्ग ने बताया कि कार्यकर्ताओं की टीमों का जिले के सभी अस्पतालों में संपर्क है और किसी न किसी माध्यम से उन्हें यह सूचना मिल जाती है। उन्होंने बताया कि अस्पताल में बेड के लिए मरीजों के फोन आते ही उन्हें चिकित्सकों की काउंसलिंग टीम के पास भेज दिया जाता है जो उन्हें उचित सलाह देती है। इस टीम में 15 से 20 डॉक्टर शामिल हैं। मरीजों के लिए यह नि:शुल्क परामर्श सेवा संघ की सहयोगी संस्था सेवा भारती के प्रयासों से संभव हो पाया है।

उन्होंने बताया कि सिर्फ ऑक्सीजन की जरूरत वाले मरीजों के लिए अलग से आइसोलेशन सेंटर बनाए गए हैं जिसका मुख्यमंत्री के हाथों लोकार्पण किया गया है। दिनेश गर्ग ने बताया कि कंसल्टेंसी टीम का यह प्रयास है कि यदि बहुत आवश्यक न हो तो मरीजों का घर पर ही उपचार सुनिश्चित किया जा सके। चर्चा के दौरान डॉ. चौहान ने वैक्सीनेशन पर जोर देते हुए कहा कि वैक्सीन लगवाना सबके लिए अत्यंत आवश्यक है। टीका लगने के बाद भी कोरोना हो सकता है, लेकिन तब यह संक्रमण जानलेवा नहीं रहता।

करनाल को मिल रहा 15 टन ऑक्सीजन

कपिल अत्रेजा ने बताया कि ऑक्सीजन सप्लाई की स्थिति में अब सुधार आया है। करनाल जिले को 15 टन ऑक्सीजन की सप्लाई की जा रही है, जिसमें कल्पना चावला अस्पताल को 8 टन और बाकी के 17 अस्पतालों को 7 टन ऑक्सीजन की आपूर्ति की जा रही है। उन्होंने इसे करनाल जिले के लिए पर्याप्त बताया। उन्होंने कहा कि अब ज़िले में ज़रूरतमंद मरीज़ों को उनके घर पर ही ऑक्सीजन की आपूर्ति का सिलसिला भी शुरू हो चुका है।

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