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कोरोना ने आयुर्वेद और योग की महत्ता को पुनर्स्थापित किया : डॉ. चौहान

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रेडियो ग्रामोदय के वेकअप करनाल कार्यक्रम में कोरोना के उपचार में आयुर्वेद की भूमिका पर चर्चा

करनाल। कोरोना महामारी से उत्पन्न विश्वव्यापी संकट ने दुनिया में आयुर्वेद और योग की महत्ता को पुनर्स्थापित किया है। कोरोना हमारी श्वसन प्रक्रिया को छिन्न-भिन्न करने वाला एक ऐसा खतरनाक वायरस है जो सीधा हमारे फेफड़ों पर असर करता है और हमारी समस्त प्रतिरोधक क्षमता को नष्ट कर देता है। योग शरीर के सभी अंगों को सक्रिय करने वाला एक ऐसा व्यायाम है जो न सिर्फ फेफड़ों को मजबूत करता है, बल्कि हमारी प्रतिरोधक क्षमता को भी बढ़ाता है। कोरोना से लड़ने में योग से बेहतर कोई विकल्प नहीं जो आयुर्वेद की ही देन है।

उपरोक्त विचार रेडियो ग्रामोदय के वेकअप करनाल कार्यक्रम में हरियाणा ग्रंथ अकादमी उपाध्यक्ष डॉ. वीरेंद्र सिंह चौहान और आयुर्वेद के विशेषज्ञ डॉ. संदीप सिंधड के बीच कोरोना के उपचार में आयुर्वेद की भूमिका पर चर्चा के दौरान उभरकर सामने आए। डॉ. चौहान ने कहा कि आयुर्वेदिक चिकित्सा एवं योगासन कोरोना के प्राणघातक प्रभावों को काफी हद तक कम करने में सक्षम है। संक्रमण के प्रारंभिक चरण में तो अधिकतर मरीज घरेलू उपचार से ही ठीक हो जाते हैं जो वास्तव में आयुर्वेदिक चिकित्सा होती है।

आयुर्वेदिक चिकित्सा के तहत किए जाने वाले विभिन्न उपायों पर प्रकाश डालते हुए असंध निवासी डॉ. संदीप ने कहा कि संक्रमण हो जाने पर मरीज को सर्वप्रथम खुद को आइसोलेट कर लेना चाहिए और हमेशा मास्क का प्रयोग करना चाहिए। इसके अलावा हर दिन सुबह कम से कम एक घंटा सूक्ष्म प्राणायाम अवश्य करना चाहिए। भस्त्रिका, कपालभाति, अनुलोम-विलोम आदि ऐसे योगासन हैं जिनका शत-प्रतिशत असर प्रमाणित है।

जब कोरोना फेफड़ों को जकड़ ले तो क्या करना चाहिए? डॉ. चौहान के इस सवाल पर डॉ. संदीप ने बताया कि नियमित व्यायाम के अलावा मरीजों को रोजमर्रा के खानपान में इम्यूनिटी बढ़ाने वाले आहार को शामिल करना चाहिए। सरकारी अस्पतालों में मिलने वाला आयुष काढ़ा यदि उपलब्ध ना हो तो घर पर ही सोंठ, हल्दी, अदरक, तुलसी व काली मिर्च आदि का काढ़ा तैयार कर दिन में दो-तीन बार इसका सेवन करना चाहिए और पांच छह बार गर्म पानी पीना चाहिए। नियमित रूप से भाप लेना भी फायदेमंद है। डॉ. संदीप ने हर मौसम में चवनप्राश का गर्म पानी के साथ सेवन करने की सलाह देते हुए कहा कि इससे इम्युनिटी बढ़ती है। उन्होंने चवनप्राश को दूध के साथ लेने से मना किया और इसे नुकसानदेह बताया।

डॉ. संदीप ने फ्रिज में रखे भोज्य पदार्थ और न्यूडल, पिज़्ज़ा, बर्गर आदि से बचने की सलाह दी। इस पर सहमति जताते हुए डॉ. चौहान ने कहा कि फ्रिज से रिश्ते को पुन: परिभाषित करने की जरूरत है। फ्रिज का ठंडा खाना कई बीमारियों का कारण बन रहा है। दोनों ने कोरोना से बचने के लिए वैक्सीन के दोनों डोज लगवाने की आवश्यकता को रेखांकित करते हुए कहा कि वैक्सीनेशन के बाद जान जाने का खतरा 90 फ़ीसदी तक कम हो जाता है। आयुर्वेदिक चिकित्सक ने प्राणायाम के तहत एक दिन पेट और दूसरे दिन कमर के बल लेटकर योगासन करने की सलाह दी।

पौधारोपण का लें संकल्प

चर्चा के दौरान डॉ. चौहान ने कहा कि कोरोना से संक्रमित गंभीर मरीज ऑक्सीजन के लिए जद्दोजहद कर रहे हैं और इसके न मिलने पर दम तोड़ देते हैं। इसलिए, प्रकृति प्रदत्त इस अनमोल उपहार को संरक्षित करना हम सबका कर्तव्य है। यह पृथ्वी पर मौजूद जीवन को बचाने के लिए अत्यंत आवश्यक है। इसलिए हम सभी को पौधरोपण पर अधिक ध्यान देना चाहिए। डॉ. चौहान ने आह्वान किया कि हर व्यक्ति कम से कम दो पौधे लगाने का संकल्प अवश्य ले ताकि हमारी भावी पीढ़ी सुरक्षित रह सके और भविष्य में ऑक्सीजन का संकट ना हो।

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