ग्रामोदय

आचार्य अभिनवगुप्त से आमजन को अवगत कराना जरूरी

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विचार गोष्ठी में अभिनव गुप्त के व्यक्तित्व व शैव दर्शन पर चर्चा

करनाल । आचार्य अभिनवगुप्त जैसे विराट व्यक्तित्व वाले विद्वान एवं उनके अद्भुत शैव दर्शन के प्रति आज की युवा पीढ़ी का अनभिज्ञ होना अत्यंत दुख एवं चिंता का विषय है। आचार्य अभिनवगुप्त ही नहीं, उनके अलावा भी ऐसे कई विश्व स्तरीय मनीषी एवं विचारक हैं जिनके बारे में आज की युवा पीढ़ी को कोई जानकारी नहीं है। जनसाधारण और खासकर आज की युवा पीढ़ी को आचार्य अभिनवगुप्त के व्यक्तित्व एवं उनके जीवन दर्शन को समझना बहुत जरूरी है। ऐसे महापुरुषों की जीवनी पर छोटी पुस्तकों की एक श्रृंखला शुरू होनी चाहिए। मुख्यमंत्री श्री मनोहरलाल की अध्यक्षता में कार्य करने वाली हरियाणा ग्रंथ अकादमी ऐसे महापुरुषों के जीवन और दर्शन पर आधारित परिचयात्मक पुस्तकमाला प्रकाशित करने की योजना बनाएगी। इस शृंखला में पहली पुस्तक आचार्य अभिनव गुप्त के व्यक्तित्व और कार्यों को समर्पित होगी। यह टिप्पणी हरियाणा ग्रंथ अकादमी के उपाध्यक्ष डॉ.वीरेंद्र सिंह चौहान ने आचार्य अभिनवगुप्त की जयंती पर आयोजित राष्ट्रीय विचार गोष्ठी की अध्यक्षता करते हुए की।

गोष्ठी के दौरान कई वक्ताओं एवं कश्मीरी विद्वानों ने अपने विचार व्यक्त किए। गोष्ठी की शुरुआत करते हुए जवाहरलाल नेहरु विश्वविद्यालय के संस्कृत एवं प्राच्य विद्या अध्ययन संस्थान के डॉ. रजनीश मिश्रा ने कहा कि विश्व भर का शिक्षित समुदाय जिस देश को सबसे ज्यादा पसंद करता है, वह भारत देश ही है। यह भारत की ज्ञान मूलक संस्कृति की विशेषता है। यह संस्कृति आत्मा को अभिमुख करने एवं स्वयं को अपने आप से साक्षात्कार कराने का ज्ञान देती है। इस संस्कृति में कुछ ऐसे भी प्रश्न पूछे जाते रहेंगे जो अन्य संस्कृतियों में मिलना मुश्किल है। जिस ज्ञान की हमें निरंतर खोज है वह मोक्ष देने वाला ज्ञान है। निरंतर इस ज्ञान की खोज में लिप्त रहने के कारण ही इस देश का नाम भारत सार्थक होता है। डॉ. मिश्रा ने कहा कि आचार्य अभिनवगुप्त ने ज्ञान और साधना की सभी धाराओं में लेखन किया।

कश्मीरी विद्वान और नाद पत्रिका के मुख्य संपादक सुनील रैना ने आचार्य अभिनवगुप्त के जीवन पर प्रकाश डालते हुए कहा कि आचार्य की चर्चा कश्मीरी शैव दर्शन का उल्लेख किए बिना पूरी नहीं हो सकती। आचार्य अभिनव गुप्त 10 वीं शताब्दी के आसपास आए। विडंबना है कि अभिनवगुप्त के दर्शन को मात्र अकादमिक स्तर तक सीमित कर दिया गया है। उनके जीवन दर्शन को सरल भाषा में परिभाषित करने की जरूरत है ताकि आम लोग भी इसे समझ सकें। कश्मीर शिव शक्ति की भूमि रही है। निर्मल पुराण में कहा गया है कि कश्मीर की भूमि स्वयं पार्वती है। भगवान शिव उनके महेश्वर हैं।

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